मोदी मोह माने बाजार की तबाही

मोदी मोह माने बाजार की तबाही

Modi’s fascination is the destruction of the market

Understand what is the difference in the market between Manmohan Singh’s era and Modi’s era.

मनमोहन सिंह के युग और मोदी युग में बाजार में क्या अंतर है, इसे समझें। मनमोहन युग में फ्रिज लेने गया तो तीन-चार घंटे बाद घर पर सप्लाई हो गई। कल फिर फ्रिज लेने गया तो हैरत हुई कि बड़ी बड़ी दुकानों पर शोकेस में फ्रिज हैं लेकिन सप्लाई होगी सात-दस दिन बाद।

क्रोमा की दुकान (croma shop delhi) पर पता चला कि सैमसंग का फ्रिज (Samsung fridge) उनके दिल्ली गोदाम में नहीं है। गुजरात से मंगवाकर दस दिन में देंगे।

सारी बड़ी दुकानों पर ग्राहक नदारत थे। इसके बावजूद आप बाजार में मच रही तबाही को समझ नहीं पा रहे तो एकदम गधे हैं।

एक और अनुभव बताता हूं।

नॉर्थ दिल्ली की एक बड़ी दुकान पर डबल कॉट लेने गया, दुकान में सन्नाटा, यही दुकान कभी खाली नहीं देखी। कॉट पसंद किया तो दुकानदार बोला पांच दिन बाद सप्लाई दूंगा। इसी दुकान से पहले भी कॉट खरीदा था और मात्र दो घंटे बाद माल घर पहुंचा दिया गया।

आशय यह कि मोदी मोह माने बाजार की तबाही। उपभोक्ता बाजार का विध्वंस।

जगदीश्वर चतुर्वेदी

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