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PM Narendra Modi at 100 years of ASSOCHAM meet

प्रायोजित आतंकवाद, प्रायोजित राष्ट्रवाद और फेक न्यूज मोदी का माहौल बना रहे हैं

अपने ही “सत्य “में कैद नरेन्द्र मोदी

प्रायोजित आतंकवाद (Sponsored terrorism), प्रायोजित राष्ट्रवाद (Sponsored nationalism) और फेक न्यूज (Fake news) ये तीन तत्व मिलकर घर घर मोदी का माहौल बना रहे हैं। मोदी की नई रणनीति– सैनिकों की मौत को वोट बैंक में तब्दील करो। जो इसका विरोध करे उसे राष्ट्र शत्रु करार दो।

Vulgar politics tv show

वल्गर राजनीति का टीवी प्रदर्शन देखें,एक तरफ मोदी की जनसभा और स्क्रीन के दूसरी ओर सीआरपीएफ जवानों की अंतिम यात्रा के सीन! यह है नियोजित फेक राष्ट्रवाद! सुरक्षित और सैन्य संरक्षित रोड पर सुरक्षा खामी के कारण कश्मीर में सीआरपीएफ पर आतंकी हमला हुआ। सवाल यह है यह खामी किसके कारण हुई ? वे 350किलो बारूद कहां से लाए और कहां जमा किया ? जबकि सारे इलाके में घर-घर सर्च ऑपरेशन सेना कर चुकी थी, सीमा पर सेना की अहर्निश चौकसी है।

Congress did not make war an election issue

सन् 1965 और 1971में भारत से पाक हारा, पर कांग्रेस ने कभी सैनिकों को वोट बैंक का हिस्सा नहीं बनाया। कभी किसी नेता ने सैनिकों की अर्थियां दिखाकर राष्ट्रोन्माद पैदा नहीं किया। कांग्रेस ने युद्ध को चुनावी मुद्दा नहीं बनाया। मोदी राजनीति का सबसे गंदा खेल खेल रहे हैं, वे सैनिकों की मौत को वोट बैंक बनाने में लगे हैं। अब उनके पास विकास की बातें नहीं हैं! भारत के इतिहास में सैनिकों की अर्थियां दिखाकर किसी पीएम ने वोट नहीं मांगे। हद है घटिया राजनीति की।

मोदी ने छह साल के शासन में गलत कश्मीर नीति के चलते आतंकियों को महाबली बना दिया। आज कश्मीर में सबसे ज्यादा वहां की आम जनता परेशान है, लेकिन मोदी ने कभी कोई कदम नहीं उठाया जिससे आम जनता की परेशानी कम हो, बल्कि उलटे ऐसे कदम उठाए जिससे आम जनता और ज्यादा तकलीफ़ में रहे।

मोदी के राज्य में आतंकियों और हथियार उद्योग की बल्ले बल्ले है। वहीं अहर्निश मैदान में रहने से सैन्यबल परेशान हैं, लेकिन मोदी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, क्यों कि कश्मीर में भाजपा नदारत है, संघियों को कोई तकलीफ़ नहीं है। वहां सैन्य और आतंकी हमलों में कभी कोई संघी नहीं मारा गया, बल्कि गरीब कश्मीरी युवा मारे जा रहे हैं।

अब तक का अनुभव बताता है कि आतंकियों को सेना कभी हरा नहीं सकती, सीरिया-ईराक-यमन आदि देख लो ! कूटनीति, अक्ल और विवेक का विकल्प नहीं है सैन्यबल। सैन्यबल मूर्खता है, कूटनीति विवेक है। भारत की पहचान सैन्यबल से नहीं कूटनीति से बनी है। भारत की जनता को शांति चाहिए। सैन्यबल का प्रदर्शन और युद्ध नहीं। युद्ध महा-अपराध है।

सर्जीकल स्ट्राइक और उपग्रह प्रक्षेपण में अंतर नहीं मालूम आपको मोदीजी ! कम से कम सलाहकारों से पूछ लेते। भारत-पाक सीमा पर तैनात यूएन प्रतिनिधियों ने कहा है कोई सर्जीकल स्ट्राइक नहीं हुई। मोदी सरकार में झूठ की कोई सीमा नहीं है, लेकिन भारत-पाक की सीमाएं जरूर हैं। उन पर यूएन के प्रतिनिधि निगरानी रखते हैं। वे कह रहे हैं कि भारत ने कोई सर्जीकल स्ट्राइक नहीं की।

The political-digital character of Narendra Modi

मैं नरेन्द्र मोदी के राजनीतिक-डिजिटल चरित्र को लेकर 2007 से लगातार लिख रहा हूं। मेरी बातों को कांग्रेस वालों ने गंभीरता से नहीं लिया, वामदलों ने समझने और मानने से इंकार किया, यदि मोदीजी की डिजिटल कलाकारी को समझने की 2007 में ही कोशिश की गयी होती तो आज मोदी इतनी बडी चुनौती न होते, बल्कि वह बेकार पुराने मोबाइल की तरह कचरे के ढ़ेर में पड़े होते।

Apply digital literacy and media literacy on a broad scale.

अब भी समय है जागो जनता-कार्यकर्ता को डिजिटल तकनीक के इर्द-गिर्द सक्रिय करो, डिजिटल साक्षरता और मीडिया साक्षरता को व्यापक स्तर पर लागू करो। जनांदोलन करो लेकिन डिजिटल के साथ!

हाल के वर्षों में जेएनयू के कन्हैया कुमार आंदोलन से सीखो, जमीन पर लड़ो डिजिटल में प्रचार करो। जो डिजिटल होगा वही मोदी को परास्त करेगा!

मोदी व्यक्ति नहीं अनुभूति है! हर व्यक्ति मोदी अनुभूति की गिरफ्त में कैद है यह बीमारी एचआईवी से भी ज्यादा गंभीर है! यह वर्चुअल संस्कृति की देन है। वर्चुअल संस्कृति के असर के कारण ही मोदीजी अब रंग दिखा रहे हैं! वे लोहे को छूते हैं हीरा हो जाता है ! वे चिरकुट को छूते हैं वो साइबर शेर बन जाता है! पहले भारत की मुद्रा चलती ही नहीं थी अब सीधे देश से विदेश की ओर भाग रही है।

तिलस्मी हिंदूपुत्र हो तो मोदी जैसा ! बैंक लुट जाएं लेकिन जनता चूँ तक न करे! गाय कट जाएं हिंदू उफ़ तक न करें! युवा लड़के लड़कियाँ सरेआम पीटे जाएं युवा प्रतिवाद तक न करें! लड़कियों के साथ बलात्कार की घटनाएँ 70 साल का रिकार्ड तोड़ दें लेकिन लड़कियों के प्रतिवाद जुलूस न निकलें ! किसान आत्महत्या करके आँकड़ों का अम्बार लगा दें संसद बेचैन न हो! इसे ही कहते हैं वर्चुअल मोदी जो हर कातिल और ज़ालिम में रमा हुआ है! देश का पैराडाइम शिफ़्ट हो रहा है, अधिकार का जोखिम में रूपान्तरण हो रहा है।

पाओलो फ्रेरे ने इस तरह की स्थिति पर लिखा,

“दक्षिणपंथी संकीर्णतावादी वर्तमान को पालतू बनाता है। ताकि (वह आशा करता है कि) भविष्य इसी पालतू वर्तमान को पुनरूत्पन्न करे।”

यह भी लिखा

“दक्षिणपंथी संकीर्णतावादी ‘अपने’ ही सत्य में स्वयं को बंद कर लेता है।”

संकीर्णतावाद चूंकि मिथक गढ़ता है और अविवेकी होता है, इसलिए वह यथार्थ को एक मिथ्या ‘यथार्थ’ में बदल देता है।

संकीर्णतावाद मिथक गढ़ता है और उससे अलगाव पैदा करता है। संकीर्णतावाद, जो मतांधता पर पलता है, हमेशा नपुंसक बनाता है।

देश के मौजूदा हालात पर ब्रजनारायण चकबस्त की ये पंक्तियां पढ़ें –

भँवरमें क़ौम का बेड़ा है हिन्दियो ! होशियार।

अँधेरी रात है, काली घटा है और मँझधार।।

अगर पड़े रहे ग़फ़लत की नींद में सरशार।

तो ज़ेरे मौजे फ़ना होगा आबरू का मज़ार।।

मिटेगी क़ौम यह बेड़ा तमाम डूबेगा।

जहाँ में भीषमो अर्जुन नाम डूबेगा।।

जगदीश्वर चतुर्वेदी

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