मौलाना साद के नाम जाने- पहचाने शायर मोहम्मद ख़ुर्शीद अकरम ‘सोज़’ का खुला पत्र

नाम :- मोहम्मद खुर्शीद अकरम तख़ल्लुस : सोज़ / सोज़ मुशीरी वल्दियत :- मौलाना अब्दुस्समद ( मरहूम ) जन्म तिथि :- 01/03/1965 जन्म स्थान : - बिहार शरीफ़, ज़िला :- नालंदा (बिहार) शिक्षा :- 1) बी.ए.             2) डिप. इन माइनिंग इंजीनियरिंग     उस्ताद-ए-सुख़न :-( स्व) हज़रत मुशीर झिन्झानवी देहलवी काव्य संकलन : - सोज़-ए-दिल सम्मान :- 1. आदर्श कवि सम्मान, और साहित्य श्री सम्मान संप्रति :- कोल इंडिया की वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड में कार्यरत संपर्क :- बी-22, कैलाश नगर, पोस्ट :- साखरा(कोलगाँव), तहसील :- वणी ज़िला :- यवतमाल , पिन:- 445307 (महाराष्ट्र)

Mohammad Khurshid Akram ‘Soz’ open letter

निज़ामुद्दीन मरकज के मुखिया मौलाना साद के नाम जाने- पहचाने शायर एवं सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद ख़ुर्शीद अकरम सोज़का खुला पत्र

मुहतरम व मुकर्रम जनाब मौलाना साद साहब

, السلام علیکم ورحمتہ اللہ وبرکاتہ

मरकज के जिन लोगों के ख़िलाफ FIR दर्ज़ की गई है. इसमें आप के अलावा आपके सात दीगर ( अन्य) साथियों के नाम हैं – मोहम्मद अशरफ, मोहम्मद सलमान, मुफ्ती शहज़ाद. डॉक्टर जीशान, मुर्सलीन सैफी साद, यूनुस ! आपलोगों के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 188, 279, 120B और महामारी ऐक्ट की धारा 3 के तहत केस दर्ज किया गया है.

हालांकि एक ऑडियो में आपने कहा है कि आप लोगों ने ख़ुद को क्वारंटीन किया हुआ है. लेकिन ऐसा बयान दे कर आप राहे-फ़रार इख़्तियार कर रहे हैं जबकि आपको सामने आकर हालात का सामना करना चाहिए!

आप से मोअद्दिबाना गुज़ारिश ( विनम्र निवेदन ) है कि आप अल्लाह पाक की रज़ा ( ख़ुशी) के लिए और क़ौम व मिल्लत को मज़ीद रुसवाई ( बे-इज़्ज़ति) से बचाने के लिए अपने साथियों के साथ अपने आपको क़ानून के हवाले कर दें, ताकि आपके और आपके साथियों के ऊपर भागने का जो इलज़ाम आयद हो रहा है वह ख़त्म हो !

आप अपने पैरोकारों को तवक्कुल इल्ललाह ( अल्लाह पर भरोसा ) की जो तालीम ( शिक्षा ) देते हैं उसी तालीम पर ख़ुद अमलपैरा हो कर सामने आईये.  अगर आप लोगों ने कोई क़ानून-शिकनी नहीं की है तो डरने की ज़रूरत क्या है ? वैसे भी आपके तर्जुमान Social Media पर Lock Down के पहले और इसके बाद हुकूमत की सभी हिदायात ( निर्देशों) की मरकज़ के ज़रिया पैरवी किये जाने के सबूत के तौर पर जो दस्तावेज़ पेश कर रहे हैं उन दस्तावेज़ को अदालत में पेश किया जाना चाहिए और इसके लिए आपलोगों को Surrender होने के बाद क़़ानूनी कार्रवाईयों का सामना करना चाहिए! और अगर दानिस्ता या ना-दानिस्ता तौर पर आप से ग़लती हुई है तो इसका अज़ाला ( प्रायश्चित) कीजिये !

इसलिये आपको अज्ञातवास से निकल कर जल्द-अज़-जल्द सामने आकर अपनी बात रखनी चाहिये और आपके अनुयायियों के ख़िलाफ़ गोदी मीडिया जो ज़हर फैला रहा है उसका जवाब देना चाहिए ! इस वक़्त आपके अनुयायियों (पैरोकारों) को खुद आपके मॉरल सपोर्ट की बेहद ज़रूरत है.

रखियो ‘ग़ालिब’ मुझे इस तल्ख़-नवाई में मुआ’फ़

आज कुछ दर्द मिरे दिल में सिवा होता है

फ़क़त वस्सलाम

मोहम्मद ख़ुर्शीद अकरम ‘सोज़’

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