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139 मिलियन से अधिक लोग जलवायु संकट और कोविड-19 की चपेट में : नया विश्लेषण

More than 139 million people hit by climate crisis and COVID-19, new IFRC analysis reveals

न्यूयॉर्क, जिनेवा, 18 सितंबर 2021: इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज़ (IFRC) की एक रिपोर्ट के अनुसार, चरम मौसम की घटनाओं और महामारी ने एक साथ लाखों लोगों को बुरी तरह प्रभावित किया है। उनका कहना है कि जलवायु और कोविड संकट के संयोजन ने रिलीफ़ (राहत-सहायता प्रतिक्रिया) प्रयासों में बाधा डालने के साथ-साथ अभूतपूर्वमानवीय ज़रूरतें पैदा की हैं।

IFRC की रिपोर्ट के अनुसार, 140 मिलियन लोग – रूस की लगभग पूरी आबादी के बराबर – महामारी के दौरान बाढ़, सूखा, तूफान और जंगल की आग से प्रभावित हुए हैं। 65 से अधिक या पांच साल से कम उम्र के 660 मिलियन लोग हीटवेव (गर्मी की लहर) की चपेट में आ गए, जो संयुक्त राज्य अमेरिका की आबादी का लगभग दोगुना है।

The paper also highlights the need of addressing both crises simultaneously as the COVID-19 pandemic has affected livelihoods across the world and has made communities more vulnerable to climate risks.

कोविड की चपेट में आने के बाद से सबसे घातक घटना (जिसके लिए डाटा उपलब्ध है) पश्चिमी यूरोप में 2020 की हीटवेव थी, जिसमें बेल्जियम, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड और यूके में 11,000 से अधिक मौतें हुईं। जबकि भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका में 20.6 मिलियन लोगों को प्रभावित करने वाली महामारी के दौरान चक्रवात अम्फान ने सबसे गंभीर जलवायु संकट बनाया। हीटवेवों ने शीर्ष तीन सबसे घातक घटनाओं में से दो को बनाया, और आज होने वाली हर हीटवेव जलवायु परिवर्तन से अधिक संभावित और अधिक तीव्र हो जाती है। जून 2020 में आई बाढ़ से भारत में क़रीब 2000 लोग प्रभावित हुए थे।

The compound impact of extreme weather events and COVID-19

वैज्ञानिक घटना एट्रिब्यूशन अध्ययनों में पाया गया है कि ग्लोबल हीटिंग ने कई विशिष्ट घटनाओं को शक्तिशाली, लंबा या अधिक संभावित बना दिया। कुछ घटनाएं – जैसे कि प्रशांत नॉर्थवेस्ट में 2021 हीटवेवजलवायु परिवर्तन के बिना दुनिया में लगभग असंभवहोती।

जलवायु परिवर्तन मौजूदा संवेदनशीलताओं और खतरों को बदतर बना देता है, और इसने विशेष रूप से उन लोगों को प्रभावित किया है जो पहले से ही महामारी की वजह से संवेदनशील हैं। उदाहरण के लिए, सीरिया और इराक़ में जारी सूखा पानी की उपलब्धता और बिजली आपूर्ति दोनों को कम कर रहा है क्योंकि जलविद्युत बांध सूख जाते हैं, जिससे स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवा प्रभावित होती है। होंडुरास और दक्षिण एशिया में तूफ़ान के दौरान, रिलीफ़ (राहत-सहायता) कार्यों को अपने घरों से भागने वालों के लिए अतिरिक्त सार्वजनिक आश्रयों की तलाश करनी पड़ी ताकि सामाजिक दूरी को बनाए रखा जा सके।

संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य जगहों पर जंगल की आग से होने वाले धुएं ने लोगों के फेफड़ों को परेशान कर दिया और इससे कोविड के मामलों और कोविड से होने वाली मौतों में वृद्धि हुई।

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज़ (IFRC) का कहना है कि समुदायों को जलवायु परिवर्तन के प्रति एडाप्ट होने के लिए और अधिक सहायता की आवश्यकता है, और यह कि जलवायु और महामारी को एक साथ संबोधित करने से आर्थिक रूप से अधिक लचीली रिकवरी होगी।

कोविड-19 महामारी की शुरुआत के बाद से, जलवायु संबंधी आपदाओं ने कम से कम 139.2 मिलियन लोगों के जीवन को प्रभावित किया है और यह 17,242 से अधिक लोगों की मौत का कारण बनी हैं।

यह एक्सट्रीम (चरम) – मौसम की घटनाओं और कोविड-19 के मिश्रित प्रभावों पर यह इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज़ (IFRC) और रेड क्रॉस रेड क्रिसेंट क्लाइमेट सेंटर द्वारा आज प्रकाशित एक नए विश्लेषण की खोज है। और अनुमानित 658.1 मिलियन लोग अत्यधिक तापमान के संपर्क में आए हैं। नए डाटा और विशिष्ट केस स्टडीज़ के माध्यम से, रिपोर्ट दिखाती है कि कैसे दुनिया भर में लोग कई संकटों का सामना कर रहे हैं और ओवरलैपिंग (अतिव्यापी) संवेदनशीलताओं से जूझ रहे हैं।

पेपर दोनों संकटों को एक साथ संबोधित करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालता है क्योंकि कोविड-19 महामारी ने दुनिया भर में आजीविका को प्रभावित किया है और समुदायों को जलवायु जोखिमों के प्रति अधिक संवेदनशील बना दिया है।

The world is facing an unprecedented humanitarian crisis where the climate change and COVID-19 are pushing communities to their limits

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज़ (IFRC) के अध्यक्ष, फ्रांसेस्को रोक्का (The IFRC President, Francesco Rocca), जिन्होंने बीती 16 दिसंबर को न्यूयॉर्क में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नई रिपोर्ट पेश की, ने कहा:

“दुनिया एक अभूतपूर्व मानवीय संकट का सामना कर रही है जहाँ जलवायु परिवर्तन और कोविड-19 समुदायों को उनकी सीमा तक धकेल रहे हैं। COP26 के होने तक के समय में, हम विश्व के नेताओं से न केवल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए, बल्कि जलवायु परिवर्तन के मौजूदा और होनेवाला मानवीय प्रभावों को सम्भोदित करने के लिए भी तत्काल कार्रवाई करने के लिए आग्रह करते हैं।”

रिपोर्ट कोविड-19 संकट के दौरान हुई एक्सट्रीम (चरम) – मौसम की घटनाओं के ओवरलैपिंग (अतिव्यापी) जोखिमों के प्रारंभिक विश्लेषण[1] के एक साल बाद आई है। महामारी का कहर दुनिया भर में लाखों लोगों के लिए प्रत्यक्ष स्वास्थ्य प्रभावों के साथ जारी है, लेकिन साथ ही बड़े पैमाने पर अप्रत्यक्ष प्रभाव भी है, जो थोड़ा-बहुत महामारी को रोकने के लिए लागू किए गए प्रतिक्रिया उपायों के कारण है। मौसम की एक्सट्रीम (चरम सीमा) के कारण होने वाली खाद्य असुरक्षा को कोविड-19 ने और बढ़ा दिया है। स्वास्थ्य प्रणालियों को उनकी सीमा तक धकेल दिया गया है और सबसे संवेदनशीलत लोगों को ओवरलैपिंग (अतिव्यापी) सदमों का सामना करना पड़ा है।

अफ़ग़ानिस्तान में जलवायु परिवर्तन का दुष्प्रभाव

अफ़ग़ानिस्तान में, भीषण सूखे के प्रभाव संघर्ष और कोविड-19 के कारण और भी बढ़ गए हैं। सूखे ने कृषि खाद्य उत्पादन को अशक्त बना दिया है और पशुधन को कम कर दिया है, जिससे लाखों लोग भूखे और कुपोषित रह गए हैं। अफ़ग़ान रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने सहायता बढ़ाई है, जिसमें लोगों के खाद्य आपूर्ति खरीदने के लिए भोजन और नकद सहायता, सूखा-प्रतिरोधी खाद्य फसलें लगाने और अपने पशुओं की सुरक्षा के लिए सहायता शामिल है।

होंडुरास में जलवायु परिवर्तन का दुष्प्रभाव

होंडुरास में, महामारी के दौरान तूफ़ान एटा और आइओटा का सामना करने में, का मतलब अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना भी था। अस्थायी आश्रयों में हजारों लोग बेघर हो गए। उन आश्रयों में एंटी-कोविड-19 उपाय कार्यवाही के लिए शारीरिक दूरी और अन्य सुरक्षात्मक उपायों की आवश्यकता थी, जिनसे क्षमता सीमित हुई।

केन्या में, कोविड-19 के प्रभाव एक साल में बाढ़ और अगले साल सूखे के साथ-साथ टिड्डियों के प्रकोप से टकरा रहे हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 2.1 मिलियन से अधिक लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। देश में और पूर्वी अफ्रीका के पार, कोविड-19 प्रतिबंधों ने बाढ़ का सामना करने की सहायता प्रतिक्रिया और प्रभावित आबादी तक आउटरीच को धीमा कर दिया जिससे उनकी संवेदनशीलता बढ़ गई।

IFRC (आईएफआरसी) के बारे में

IFRC दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय नेटवर्क है, जिसमें 192 नेशनल रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट सोसाइटी शामिल हैं, जो दुनिया भर में लोगों की जान बचाने और सम्मान को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं।

दुनिया भर में रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट सोसायटीयां न केवल उन ओवरलैपिंग (अतिव्यापी) संकटों की प्रतिक्रिया में सहायता दे रही हैं बल्कि समुदायों को जलवायु जोखिमों के लिए तैयार करने और उनका अनुमान लगाने में भी मदद कर रही हैं।

उदाहरण के लिए बांग्लादेश में, रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज़ (IFRC) के नामित धन का उपयोग बाढ़ से संबंधित अर्ली वार्निंग मेसेजेस (पूर्व चेतावनी संदेशों) को लाउडस्पीकर के माध्यम से संवेदनशील क्षेत्रों में प्रसारित करने के लिए किया है ताकि लोग आवश्यक उपाय कार्यवाही कर सकें और यदि आवश्यक हो तो इवैक्यूएट (इलाक़ा ख़ाली) कर सकें।

RCRC (आरसीआरसी) क्लाइमेट सेंटर की एसोसिएट डायरेक्टर जूली अरिघी ने कहा :

“खतरों को आपदा बनने की ज़रूरत नहीं है। अगर हम स्थानीय स्तर पर संकटों की आशंका, शीघ्र कार्रवाई और जोखिम में कमी लाना जैसे करते हैं इसे बदलते हैं तो हम बढ़ते जोखिमों की प्रवृत्ति का मुक़ाबला कर सकते हैं और जीवन बचा सकते हैं। अंत में, हमें समुदायों को अधिक लचीला बनने में मदद करने की आवश्यकता है, विशेष रूप से सबसे संवेदनशील संदर्भों में।”

कोविड-19 महामारी का जलवायु जोखिमों पर अधिक देर तक रहने वाला प्रभाव पड़ा है। सरकारों को सामुदायिक एडाप्टेशन, प्रत्याशा प्रणाली और स्थानीय अभिनेताओं में निवेश करने के लिए प्रतिबद्ध होने की ज़रुरत है।

कोविड-19 रिकवरी में बड़े पैमाने पर खर्च यह साबित करता है कि सरकारें वैश्विक खतरों का सामना करने के लिए तेज़ी से और प्रबलतीव्र रूप से कार्य कर सकती हैं। यह शब्दों को क्रिया में बदलने और उसी ताक़त को जलवायु संकट के लिए समर्पित करने का समय है। हर दिन, हम मानव निर्मित जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को देख रहे हैं। जलवायु संकट यहाँ है, और हमें अभी कार्य करने की आवश्यकता है,” रोक्का ने कहा।

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