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चुड़ैल से प्यार? हंसाने और डराने में नाकाम है ये रूही

फिल्म समीक्षा – रूही | Movie Review – Roohi

कोरोना काल की भयावहता से गुजरने के बाद आखिरकार सिनेमा हॉल खुल चुके हैं और फ़िल्म रिलीज़ हुई है रूही। इस फ़िल्म को स्त्री फ़िल्म के समक्ष बताकर प्रचारित किया गया था। लेकिन यह फ़िल्म  जब अपनी परतें खोलती है तो निकलकर कुछ और ही आता है। कई भाषाओं के सम्मिश्रण वाले डायलॉग भी फ़िल्म की कहानी को कमजोर बनाते हैं। खैर हॉरर-कॉमेडी के नाम पर बना यह फॉर्मूला इस फ़िल्म में ज्यादा चल नहीं पाया है।

स्त्री की तरह रूही की कहानी भी एक छोटे से गांव देहात में बसी है। दो दोस्त भंवरा पांडेय (राजकुमार राव) और कतन्नी (वरुण शर्मा) पत्रकार हैं, लेकिन पार्टटाइम किडनैपर भी हैं।

पत्रकारों का इतना बुरा समय शायद आपने कभी न देखा हो

भंवरा पांडेय तोतला भी है जो त को ट बोलता है। ऐसे भी पत्रकार हो सकते हैं फ़िल्म बताती है। पत्रकारों का इतना बुरा समय शायद आपने कभी देखा हो किसी फिल्म में और देखा होगा तो भूल गए होंगे। जिस गांव में ये रहते हैं उसके आसपास के कस्बों में पकड़वा विवाह यानी दुल्हन को उठाकर लाने और उससे जबर्दस्ती शादी करने की अजीब सी रस्म अदायगी की जा रही है। इसमें किसी भी लड़की को उठाकर उसकी मर्जी के खिलाफ लड़के से शादी करा दी जाती है। पहले भी इस तरह के मसाले कुछ एक फिल्मों में छिड़के गए हैं लेकिन वे असरदार नहीं रहे। ये दोस्त रूही (जाह्नवी कपूर) का अपहरण कर लेते हैं और उसे सीधे शादी के मण्डप पर ले जाए उससे पहले कुछ ऐसा होता है कि वे उसे जंगल में ले जाते  हैं। रात में पता चलता है कि रूही पर किसी आत्मा का साया है।

इधर रूही को भंवरा दिल दे बैठता है और जिस अफजा का साया रूही पर है उस अफजा को कतन्नी अपना दिल हार बैठता है।

कहानी पढ़ने, सुनने में ठीक लगती है, लेकिन जब इसे स्क्रिप्ट, डायरेक्शन और एक्टिंग में ढाला जाता है तो यह सारा मिक्सर कर देती है। चुड़ैल से प्यार? रूही को जंगल ले जाना? आदि जैसे प्रश्न भी दिमाग में उठते हैं।

फ़िल्म अंधविश्वास का समर्थन न करते-करते अंततः उसी के पक्ष में जा खड़ी होती है

फ़िल्म के कुछ दृश्यों का सीक्वेंस भी सही नहीं लगता। कभी भी कोई सा भी सीन आ टपकता है। कुछ एक सीन बेवजह लंबे खींच दिए गए हैं। इंटरवल के बाद और क्लाइमेक्स पर ध्यान देने की जरूरत थी। अंततः फ़िल्म अंधविश्वास का समर्थन न करते करते उसी के पक्ष में जा खड़ी होती है।

फिल्म में सचिन-जिगर का संगीत मसालों का काम करता है। किश्तों में गाना जरूर एक रोमांटिक सा फील लेकर आता है फ़िल्म में। मृगदीप सिंह लांबा और गौतम मेहरा की लिखी कहानी अच्छी है लेकिन निर्देशक हार्दिक मेहता फिल्म को संभाल नहीं पाते। और वहीं वे मात खाते हैं, वरुण शर्मा भी अपनी फुकरे वाली इमेज से बाहर नहीं आ पा रहे या शायद उनका अभिनय ही ऐसा है। अगर ऐसा है तो उन्हें कुछ वर्कशॉप करनी चाहिए। राजकुमार राव बेहतरीन एक्टर हैं लेकिन यहाँ वे भी निराश करते हैं।

जाह्नवी कपूर ने क्यों इस फ़िल्म में काम किया यह तो वही जानती हैं लेकिन इसके बाद उनके एक्टिंग करियर पर कुछ नेगेटिव असर पड़ सकता है। 

इस फ़िल्म में न तो ज्यादा डराने वाले सीन हैं और न ही ज्यादा हंसाने वाले, लेकिन एक अर्सा सा हो गया फ़िल्म देखने वाले लोगों को या थियेटर के शौकीन लोगों को तो यह फ़िल्म देख सकते हैं इतना भी निराश नहीं करती।

निर्माता : दिनेश विजन, मृगदीप सिंह लाम्बा

निर्देशक : हार्दिक मेहता

संगीत : सचिन-जिगर

कलाकार : राजकुमार राव, जाह्नवी कपूर, वरुण शर्मा

अपनी रेटिंग : 2 स्टार

तेजस पूनियां

tejas punia
रचनाकार परिचय :-
प्रकाशन- जनकृति अंतरराष्ट्रीय बहुभाषी ई पत्रिका, अक्षरवार्ता अंतरराष्ट्रीय मासिक रिफर्ड प्रिंट पत्रिका, परिवर्तन: साहित्य एवं समाज की त्रैमासिक ई पत्रिका, हस्ताक्षर मासिक ई पत्रिका (नियमित लेखक) सहचर त्रैमासिक ई पत्रिका, कनाडा में प्रकाशित होने वाली प्रयास ई पत्रिका, पुरवाई पत्रिका इंग्लैंड से प्रकाशित होने वाली पत्रिका, हस्तक्षेप- सामाजिक, राजनीतिक, सूचना, चेतना व संवाद की मासिक पत्रिका, सबलोग पत्रिका (क्रिएटिव राइटर), आखर हिंदी डॉट कॉम, लोक मंच पत्रिका सर्वहारा ब्लॉग, ट्रू मीडिया न्यूज डॉट कॉम, स्टोरी मिरर डॉट कॉम सृजन समय- दृश्यकला एवं प्रदर्शनकारी कलाओं पर केन्द्रित बहुभाषी अंतरराष्ट्रीय द्वैमासिक ई- पत्रिका, मधुमती राजस्थान साहित्य अकादमी की पत्रिका, विश्वगाथा गुजरात की पत्रिका, परिकथा दिल्ली से प्रकाशित पत्रिका तथा कई अन्य प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं, ब्लॉग्स, वेबसाइट्स, पुस्तकों आदि में 200 से अधिक लेख-शोधालेख, समीक्षाएँ, फ़िल्म समीक्षाएं, कविताएँ, कहानियाँ, तथा लेख-आलेख प्रकाशित एवं कुछ अन्य प्रकाशनाधीन। कई राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में पत्र वाचन एवं उनका ISBN नम्बर सहित प्रकाशन।
कहानी संग्रह – “रोशनाई” अकेडमिक बुक्स ऑफ़ इंडिया दिल्ली से प्रकाशित।
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हमारे बारे में तेजस पूनियां

तेजस पूनियां लेखक फ़िल्म समीक्षक, आलोचक एवं कहानीकार हैं। तथा श्री गंगानगर राजस्थान में जन्में हैं। इनके अब तक 200 से अधिक लेख विभिन्न राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। तथा एक कहानी संग्रह 'रोशनाई' भी छपा है। प्रकाशन- मधुमती पत्रिका, कथाक्रम पत्रिका ,विश्वगाथा पत्रिका, परिकथा पत्रिका, पतहर पत्रिका, जनकृति अंतरराष्ट्रीय बहुभाषी ई पत्रिका, अक्षरवार्ता अंतरराष्ट्रीय मासिक रिफर्ड प्रिंट पत्रिका, हस्ताक्षर मासिक ई पत्रिका (नियमित लेखक), सबलोग पत्रिका (क्रिएटिव राइटर), परिवर्तन: साहित्य एवं समाज की त्रैमासिक ई-पत्रिका, सहचर त्रैमासिक पीयर रिव्यूड ई-पत्रिका, कनाडा में प्रकाशित होने वाली "प्रयास" ई-पत्रिका, पुरवाई पत्रिका इंग्लैंड से प्रकाशित होने वाली पत्रिका, हस्तक्षेप- सामाजिक, राजनीतिक, सूचना, चेतना व संवाद की मासिक पत्रिका, आखर हिंदी डॉट कॉम, लोक मंच, बॉलीवुड लोचा सिने-वेबसाइट, साहित्य सिनेमा सेतु, पिक्चर प्लस, सर्वहारा ब्लॉग, ट्रू मीडिया न्यूज डॉट कॉम, प्रतिलिपि डॉट कॉम, स्टोरी मिरर डॉट कॉम, सृजन समय- दृश्यकला एवं प्रदर्शनकारी कलाओं पर केन्द्रित बहुभाषी अंतरराष्ट्रीय द्वैमासिक ई- पत्रिका तथा कई अन्य प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं, ब्लॉग्स, वेबसाइट्स, पुस्तकों आदि में 300 से अधिक लेख-शोधालेख, समीक्षाएँ, फ़िल्म एवं पुस्तक समीक्षाएं, कविताएँ, कहानियाँ तथा लेख-आलेख प्रकाशित एवं कुछ अन्य प्रकाशनाधीन। कई राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में पत्र वाचन एवं उनका ISBN नम्बर सहित प्रकाशन। कहानी संग्रह - "रोशनाई" अकेडमिक बुक्स ऑफ़ इंडिया दिल्ली से प्रकाशित। सिनेमा आधारित संपादित पुस्तक शीघ्र प्रकाश्य -अमन प्रकाशन (कानपुर) अतिथि संपादक - सहचर त्रैमासिक पीयर रिव्यूड पत्रिका

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