मैं नहीं मानता, मैं नहीं जानता।। मोदी जी, आपके होते हुए गुजरात जलता रहा था, क्या आप दिल्ली का दाग भी सहेजना चाहेंगे?

Narendra Modi in anger

Mr. Prime Minister! Democracy is strengthened by questions, tell this to your supporters.

आदरणीय प्रधानमंत्री जी

नमस्कार

दिल्ली के यमुना विहार इलाके से लोग घर छोड़कर जा रहे हैं। आपने भी घर छोड़ा था न प्रधानमंत्री जी। अलग कारण से ही सही। तो इस दर्द को थोड़ा बहुत तो समझते होंगे।

क्यों जा रहे हैं? कौन हैं ये लोग? इन्हें कपड़ों से पहचान लीजिए प्रधानमंत्री जी!

आप तो कमजोर नहीं हैं। इन्हें थोड़ा हौसला नहीं दे सकते क्या? कि इस तरह घर न छोड़ें, इनकी सुरक्षा के लिए आप प्रबंध करेंगे न! प्रधानमंत्री जी आपको तीन तलाक़ याद है, अपनी बहनों के लिए जो कानून बनाया था आपने, उन्हीं के भाई, बाप, शौहर, बच्चे हैं ये। वो बहनें भी बहुत परेशान हैं PM जी।

क्या इसी तरह सबका विकास करना था, इसी तरह सबका साथ होना था।

1947 को हमने नहीं देखा, बस किस्से सुने हैं। और ये भी सुना है कि शांति का एक पुजारी तुरंत सड़क पर था, दंगों के बीच। उस वक़्त के प्रधानमंत्री जिनका जिक्र आप अपने भाषणों में खूब करते हैं, वो भी खुद ड्राइव करके जीप से दंगाइयों के बीच पहुंच गए थे।

प्रधानमंत्री जी आपसे किसी को बैर न था न है, बस आपने ही हर सवाल करने वाले को अपना दुश्मन मान लिया है और अपने भक्तों के दिमागों में ये जहर भर दिया है कि सवालों से देश कमजोर होता है। ये सब आपने चुनाव जीतने के लिए किया था न। अब जीत गए। आगे भी जीतते रहिए, लेकिन इसके लिए देश को मत जलने दीजिये। गुजरात जला था तो आपको सर आंखों पे बैठाया था सबने फिर कभी गुजरात से सत्ता हिली नहीं आपकी। यकीन मानिए अब देश से भी नहीं हिलेगी। लेकिन देश हिल रहा है, ये बिखर न जाये कहीं।

प्रधानमंत्री जी सवालों से लोकतंत्र मजबूत होता है, ये अपने समर्थकों को बताइये न।

वे भी देश बचना चाहते हैं, बस ये नहीं समझ पा रहे कि लाठी, गोली और नफरत से देश बचता नहीं, बर्बाद हो रहा है।

प्रधानमंत्री जी, आपके होते हुए गुजरात जलता रहा था। उसका दाग अब तक नहीं धुला है। क्या आप दिल्ली का दाग भी सहेजना चाहेंगे?

सचिन श्रीवास्तव, भोपाल

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