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Shaheen Bagh

शाहीन बाग, मुसलमान और तकनीकी रैनेसां : यह एकदम नए मुसलमान के जन्म की घोषणा है

शाहीन बागमुसलमान और तकनीकी रैनेसां

Muslims’ association with computer technology and cyber culture

शाहीन बाग जनांदोलन (Shaheen bagh movement) के आरंभ होने के बाद बड़ी संख्या में इस आंदोलन का मीडिया कवरेज (Media coverage of Shaheen Bagh movement) सामने आया है। इस कवरेज में स्व-प्रचार की भावना से निर्मित सामग्री और विभिन्न वेबसाइट पर व्यापक सामग्री सामने आई है। यह ‘‘यू ट्यूब क्रांति’’ है। इसने एकदम नए क्षेत्र की ओर ध्यान खींचा है, नया क्षेत्र है मुसलमानों का कम्प्यूटर तकनीक और साइबर कल्चर के साथ संबंध।

Today’s Indian Muslim is a computer and cyber lover

आज का भारतीय मुसलमान कम्प्यूटर और साइबरप्रेमी है। यह एकदम नए मिजाज और संस्कार वाला मुसलमान है। यह मदरसे, नमाज वाली पुरानी इमेज से भिन्न नए किस्म के कम्युनिकेशन और पूंजीवादी विकास से लैस मुसलमान है। हमें कायदे से इस मुसलमान के द्वारा संप्रेषित संदेश को गंभीरता से पढ़ना चाहिए। इस मुसलमान को पढ़ेंगे तो उसके बारे में पुरानी धारणाएं टूटेंगी, यह भी पता चलेगा कि वह धर्म से कितने दूर हैं और कितना पास है। इससे मानवीय संबंधों के बारे में नई धारणा बनेगी और हिन्दू-मुसलमान संबंधों के फ्रेमवर्क में रखकर देखने का नजरिया भी बदलेगा। इससे मुसलमान की समुदाय के रूप में समझ भी बदलेगी।

Interrelationship between Muslims and Technology

मुसलमान और तकनीक के अंतर्संबंध पर विचार करते समय उसके आस्थावान रूप में आए बदलावों को भी बेहतर ढ़ंग से समझ पाएंगे। कहने का आशय यह कि ‘‘मुसलिम ही मीडियम’’ और ‘‘इस्लाम ही मीडियम’’ है। इन धारणाओँ की रोशनी में नए सिरे से मुसलमान की नई इमेज का मूल्यांकन करें।

सामान्य तौर पर किसी भी मुसलमान से बातें करो और उससे जीवन लक्ष्यों के बारे में पूछो तो आमतौर पर धार्मिक पदबंधों का इस्तेमाल करते हुए अपनी भावनाएं और विचार व्यक्त करता है। लेकिन वह तो उसके कम्युनिकेशन की भाषा का अंग है, वह उसके भाषिक संसार का खजाना है और वह उसके विचारों के मेनीपुलेशन का जरिया भी है।

इस भाषिक संसार का सबसे बड़ा अंतर्विरोध है वह भाषा, जो वाचिकयुग की देन है और मध्यकाल में पैदा हुई थी। वही उसका संदर्भ है। लेकिन आज का मुसलमान जब पुरानी भाषा में नए भावबोध और नई भंगिमाओं को अभिव्यक्त करता है तो उसके इर्दगिर्द टीवी, इंटरनेट आदि का परिवेश है। यह परिवेश पुरानी भाषा के मर्म को सीधे तब्दील करता है। सतह पर वह पुरानी भाषा बोलते हुए इस्लाम की ओर लौटता नजर आता है लेकिन व्यवहार में वह आगे जा रहा होता है। यही वजह है कि बुर्के में रहते हुए, नमाज पढ़ते हुए वह जाने-अनजाने कब इंकलाब के दायरे, लोकतांत्रिक परिवेश और लोकतांत्रिक हकों की जंग के दायरे में शिफ्ट कर गया हमने ध्यान ही नहीं दिया। यह रूपान्तरण पैदा करने में कम्युनिकेशन की तकनीक और पूंजीवाद के विकास की केन्द्रीय भूमिका है।

मुसलमान पैदा हुआ मुसलमान के घर, लेकिन उसका समूचा संसार और मूल्यबोध प्रभावित है पूंजीवादी विकास की प्रक्रियाओं, आधुनिक शिक्षा, नई कम्युनिकेशन तकनीक, नई परिवहन तकनीक, नई फैशन और नए ड्रेस कोड से। अब नए मुसलमान को परंपरागत धार्मिक शिक्षा के साथ मीडिया के जरिए भी धार्मिक शिक्षा मिल रही है।

Jagadishwar Chaturvedi जगदीश्वर चतुर्वेदी। लेखक कोलकाता विश्वविद्यालय के अवकाशप्राप्त प्रोफेसर व जवाहर लाल नेहरूविश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष हैं। वे हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।
Jagadishwar Chaturvedi जगदीश्वर चतुर्वेदी। लेखक कोलकाता विश्वविद्यालय के अवकाशप्राप्त प्रोफेसर व जवाहर लाल नेहरूविश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष हैं। वे हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

दूसरी ओर मीडिया और कुछ राजनीतिक संगठनों की ओर से मुसलमानों के बारे में भय और आतंकी इमेज का जमकर प्रसारण हुआ है। इस इमेज प्रक्षेपण के जरिए समाज में मुसलमानों और इस्लाम के बारे में गलत धारणा और समझ बनी है। पुलिस, सेना, अर्द्ध सैन्यबलों में मुसलमानों को आतंकी के रूप में देखने की धारणा का विकास हुआ है। यह भी कह सकते हैं कि मीडिया और राजनीति में एक तबका ऐसा है जो अहर्निश मुसलमानों के खिलाफ सांस्कृतिक-राजनीतिक युद्ध चलाए हुए है। इस क्रम में मुसलमानों को राष्ट्र और समाज की सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में प्रचारित किया गया है। इस तरह की मुसलिम इमेज निर्माण में टीवी, अखबार, इंटरनेट, यू ट्यूब, विकी इस्लाम आदि का जमकर दुरूपयोग किया गया है। इस सबके प्रत्युत्तर में मिस्र में ‘‘फेसबुक क्रांति’ (“Facebook revolution” in Egypt) हुई और ईरान में ‘‘ट्विटर क्रांति’’ (“Twitter Revolution” in Iran) हुई। इन दोनों ही तकनीकी क्रांतियों ने मुसलमानों और इस्लाम के बारे में निर्मित पुराने स्टीरियोटाइप को तोड़ा है। ठीक इसी पैटर्न पर भारत में सीएए-एनआरसी के खिलाफ चल रहे शाहीन बाग आंदोलन (The ongoing Shaheen Bagh movement against the CAA-NRC in India) ने ‘‘यू-ट्यूब क्रांति’’ के जरिए भारत में मुसलमान और इस्लाम के बारे में बनाए गए स्टीरियोटाईप (stereotype of Muslims and Islam in India) को धराशाही किया है। मोदी सरकार और आरएसएस के द्वारा पैदा किए गए घृणा के माहौल को ‘‘यू ट्यूब क्रांति’’ ने तोड़ा है। साथ ही इस आंदोलन ने मुस्लिम औरतों में इंकलाब (Inquilab among Muslim women) की शुरूआत की है। इसे ‘‘स्त्री क्रांति’’ भी कह सकते हैं।

इस ‘‘स्त्री क्रांति’’ ने सोशल मीडिया और यू ट्यूब की महत्ता और सार्थकता को रेखांकित किया है। इस प्रक्रिया में मुसलिम औरतों का एकदम नया रूप मीडिया, जनांदोलन और यू ट्यूब में सामने आया है। यह लोकतांत्रिक स्त्री है। यह एक तरह से मुसलिम समाज का आंतरिक और बाह्य रूपान्तरण है। यह एक तरह से मुसलिम समाज के अस्तित्व रक्षा का प्रकल्प तो है, साथ ही यह एकदम नए मुसलमान के जन्म की घोषणा है।

जगदीश्वर चतुर्वेदी

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