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कमजोर न पड़ने दें कोरोना टीके का सुरक्षा कवच

Negligence in vaccination can overshadow infection prevention efforts.

भारत में कोरोना वैक्सीन की दूसरी खुराक (Second Dose of Corona Vaccine) गत 13 फरवरी को शुरू हो गया और उसी के साथ भारत सबसे तेजी से 77.66 लाख वैक्सीन लगाने वाला देश बन गया। सरकारी दावों के मुताबिक अभी तक एक करोड़ से अधिक लोगों का टीकाकरण हो चुका है।

Covid-19 Vaccination Live Updates

भारत टीकाकरण (Covid Vaccination in India) के 21 दिनों में ही 50 लाख लोगों को वैक्सीन देने वाल दुनिया का पहला देश और 26 दिनों में 70 लाख लोगों को वैक्सीन देने वाला दुनिया का सबसे तेज देश बना गया था। हालांकि इस तथ्य की अनदेखी किया जाना भी सही नहीं कि इस दौरान फ्रंटलाइन वर्कर्स का अपेक्षा के अनुरूप टीकाकरण नहीं हो पाया है और टीकाकरण 2.0 (Corona Vaccination 2.0,) शुरू होने के बाद वैक्सीन की दूसरी डोज लेने वालों में भी उत्साह की कमी देखी जा रही है। इसके कारणों की पड़ताल करते हुए टीकाकरण के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ाना जाना बेहद जरूरी है क्योंकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि यदि टीकाकरण की दूसरी खुराक छूट गई तो टीके का सुरक्षा कवच कमजोर हो जाएगा और टीकाकरण में ऐसी लापरवाही संक्रमण की रोकथाम के प्रयासों पर भारी पड़ सकती है।

कोरोना वैक्सीनेशन में फर्जीवाड़ा | Corruption in corona vaccination

एक ओर जहां टीकाकरण अभियान को रफ्तार देने की जरूरत महसूस की जा रही है, वहीं बिहार तथा मध्यप्रदेश से जिस प्रकार के फर्जीवाड़े के मामले सामने आए हैं, ऐसे में दुनिया भर में सराहे जा रहे इस अभियान को पलीता न लगे, इसके लिए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने और भविष्य में कोरोना टीकाकरण में पूरी पारदर्शिता बरते जाने की सख्त दरकार है।

उल्लेखनीय है कि जहां मध्य प्रदेश में कोरोना वैक्सीन लगवाने वाले करीब 1.37 लाख लोगों का एक ही मोबाइल नंबर रजिस्टर होने से वहां टीकाकरण अभियान के नाम पर हो रहे फर्जीवाड़े की पोल खुली, कुछ वैसा ही मामला बिहार के कुछ अस्पतालों में भी देखने को मिला। वहां भी टीकाकरण का लक्ष्य (Vaccination target) पूरा करने के लिए बोगस मोबाइल नंबरों के साथ हजारों ऐसे लोगों का विवरण दर्ज कर दिया गया, जिन्होंने न कभी कोरोना जांच कराई और न ही वैक्सीन ली।

The number of corona patients still worldwide

दुनिया भर में अभी तक कोरोना मरीजों की संख्या करीब 11 करोड़ हो चुकी है, जिनमें से 24 लाख से अधिक मौत के मुंह में समा चुके हैं। भारत में भी अब तक एक करोड़ से ज्यादा व्यक्ति संक्रमण के शिकार हो चुके हैं। हालांकि हमारे यहां रिकवरी दर अन्य देशों के मुकाबले काफी बेहतर रही है और पिछले कुछ समय में देशभर में कोरोना संक्रमितों की संख्या में तेजी से गिरावट भी दर्ज की गई है लेकिन अब जिस प्रकार कोरोना के मामले महाराष्ट्र, केरल, पंजाब, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ इत्यादि राज्यों में धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं, ऐसे में टीकाकरण अभियान को अपेक्षित रफ्तार दिया जाना बेहद जरूरी है।

कब शुरू हुआ कोरोना टीकाकरण अभियान

16 जनवरी को शुरू हुए टीकाकरण अभियान के बाद 30 दिनों के अंदर 83 लाख से अधिक लोगों को ‘कोरोना सुरक्षा कवच’ मिला लेकिन यह अपेक्षित लक्ष्य से काफी कम है। सरकार का लक्ष्य तीन करोड़ स्वास्थ्यकर्मियों सहित कुल 30 करोड़ लोगों के टीकाकरण का जुलाई-अगस्त तक का लक्ष्य है और विशेषज्ञों का मानना है कि तय लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकार को 10 गुना तेज गति से टीकाकरण अभियान चलाना होगा और इसके लिए इस कार्य में निजी क्षेत्र को भी शामिल करना होगा।

टीकाकरण 2.0 के बाद 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के टीकाकरण की तैयारी की जा रही है, यह अभियान मार्च माह में शुरू होगा। टीकाकरण के प्रति लोगों में उत्साह की कमी के चलते अलग-अलग जगहों से वैक्सीन की खुराकें बर्बाद होने की खबरें भी सामने आ रही हैं।

Awareness about vaccine

वैक्सीन को लेकर जागरुकता में कमी के चलते लोगों के टीका केन्द्रों पर नहीं पहुंचने के कारण कोरोना वैक्सीन बेकार हो रही है। दरअसल कोविशील्ड की एक शीशी में कुल 10 जबकि कोवैक्सीन की एक शीशी में 20 खुराकें होती हैं और वैक्सीन लगाने के लिए शीशी को खोलने के चार घंटे के अंदर सभी खुराक खत्म करनी होती हैं लेकिन कुछ स्थानों पर लोगों के टीका लगवाने के लिए कम संख्या में पहुंचने और टीका लगवाने वालों की अपेक्षित संख्या नहीं होने के कारण वैक्सीन की खुराकें बर्बाद हो जाती हैं।

भारत बहुत बड़ी आबादी वाला देश है और ऐसे में समझना मुश्किल नहीं है कि इतनी बड़ी आबादी के टीकाकरण का काम इतना सरल नहीं है। इसके लिए टीकाकरण अभियान की खामियों को दूर करते हुए लोगों को जागरूक करने की सख्त जरूरत है और इसमें देरी किया जाना खतरनाक होगा।

Corona Vaccine Side Effects Hindi News,

लोगों के मन में कोरोना वैक्सीन के साइड इफैक्ट्स (Corona Vaccine Side Effects) को लेकर जो भ्रम व्याप्त हैं, उन्हें दूर करने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाने की दरकार है।

कुछ दिनों पहले एम्स निदेशक डा. रणदीप गुलेरिया ने कहा था कि कोरोना वैक्सीन को लेकर गलत और आधारहीन सूचनाओं की बाढ़ ने लोगों के मन में टीके को लेकर अनिच्छा पैदा की है और इसका समाधान यही है कि लोगों के मन में उत्पन्न संदेह और भ्रम को दूर करने के लिए सरकार द्वारा समुचित कदम उठाए जाएं।

दरअसल कोरोना टीकों को लेकर सबसे बड़ा भ्रम लोगों के मन में इनके साइड इफैक्ट को लेकर है लेकिन कई प्रमुख स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि टीका लगने के आधे दिन तक टीके वाली जगह पर दर्द और हल्का बुखार रह सकता है, जो इस बात की निशानी है कि टीका काम कर रहा है। जब शरीर में दवा जाती है तो हमारा प्रतिरोधी तंत्र इसे अपनाने लगता है।

नीति आयोग के सदस्य डा. वीके पॉल ने कोरोना के दोनों टीकों को पूर्ण सुरक्षित बताते हुए कहा था कि टीकाकरण के शुरूआती तीन दिनों में लोगों में वैक्सीन के प्रतिकूल प्रभाव के केवल 0.18 प्रतिशत मामले सामने आए थे, जिनमें केवल 0.002 फीसदी ही गंभीर किस्म के थे। अब स्वास्थ्य मंत्रालय का भी कहना है कि वैक्सीन लगवाने के बाद केवल 0.005 फीसदी लोगों को ही अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ी।

अगर टीका लगने के बाद इसके सामान्य प्रभावों की बात की जाए तो इनमें थकान, सिरदर्द, बुखार, टीके के स्थान पर सूजन या लाली, दर्द, बीमार होने या शरीर में हरारत का अहसास, शरीर व घुटनों में दर्द, जुकाम इत्यादि सामान्य असर हैं। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के अनुसार ये सभी लक्षण कुछ ही समय बाद खत्म हो जाते हैं। कुछेक मामलों में टीका लगने के बाद साइड इफैक्ट भी सामने आ सकते हैं। इन साइड इफैक्ट्स में भूख कम हो जाना, पेट में तेज दर्द का अहसास, शरीर में खुजली, बहुत ज्यादा पसीना आना, बेहोशी जैसा महसूस होना, शरीर पर चकते पड़ना, सांस लेने में परेशानी शामिल हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के साइड इफैक्ट के कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं, जैसे टीके को लेकर तनाव या घबराहट, टीका लगाने के तरीके और रखरखाव में कमी या टीके की गुणवत्ता में किसी तरह की खामी।

कोरोना वैक्सीन को लेकर कुछ लोगों के मन में जो शंकाएं हैं, उनका समाधान करने का प्रयास करते हुए कुछ विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल स्पष्ट रूप से यह तो नहीं कहा जा सकता कि वैक्सीन से किस व्यक्ति में कितने दिन के लिए एंटीबॉडीज बनेंगी लेकिन इतना अवश्य है कि टीके की दोनों डोज लगने के बाद कम से कम 6 माह तक शरीर में एंटीबॉडी मौजूद रहेंगी और अगर इतने समय तक लोगों को कोरोना से सुरक्षा मिल गई तो कोरोना की चेन को आसानी से तोड़ा जा सकता है।

वैक्सीन लगवाने के बाद किन बातों का ध्यान रखना जरूरी

वैक्सीन लगवाने के बाद व्यक्ति को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना भी अनिवार्य है। कोरोना टीका लगवाने के बाद कम से कम दो महीने तक शराब का सेवन करने से बचें क्योंकि विशेषज्ञों का स्पष्ट तौर पर कहना है कि शराब पीने की लत वैक्सीन के प्रभाव को बेअसर कर सकती है। बहरहाल, कोरोना टीकाकरण अभियान के तहत पहले चरण में तीन करोड़ और दूसरे चरण में इसे 30 करोड़ के लक्ष्य तक ले जाना है और यह लक्ष्य तभी हसिल किया जा सकता है, जब लोगों के मन में टीकाकरण को लेकर उपजे भ्रम को सफलतापूर्वक दूर किया जाए।

योगेश कुमार गोयल

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं तथा 31 वर्षों से साहित्य एवं पत्रकारिता में सक्रिय हैं। गत वर्ष इनकी ‘प्रदूषण मुक्त सांसें’ तथा ‘जीव जंतुओं का अनोखा संसार’ पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं।)

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