फॉसिल फ्यूल उद्योग में नेट-ज़ीरो प्रतिबद्धताएँ

Net-zero commitments in the fossil fuel industry

नई दिल्ली, 18 अगस्त 2020. बढ़ते निवेशक और खराब वित्तीय प्रदर्शन ने यूरोपीय तेल कंपनियों को अधिक महत्वाकांक्षी नेट ज़ीरो (यानी अपने कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने) लक्ष्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया है। नेट ज़ीरो योजनाओं की घोषणा छह सबसे बड़े यूरोपीय तेल प्रमुखों – शेल (Shell) , बीपी (BP), टोटल, Total, इक्विनोर (Equinor), एनी (Eni) और रेप्सोल (Repsol) द्वारा की गई है।

बीपी ने हाल ही में अपनी नई रणनीति की घोषणा की कि कैसे वह अगले दशक में 2050 तक नेट ज़ीरो के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने का इरादा रखता है।

बीपी 14-15 सितंबर को अपने कैपिटल मार्केट डेज़ पर अतिरिक्त विवरण प्रदान कर सकता है, और शेल ने हाल ही में घोषणा की कि यह 11 फरवरी 2021 को अपने रणनीति दिवस पर विवरण प्रदान करेगा।

नेट ज़ीरो उत्सर्जन (Net zero emissions) एक ऐसी स्थिति है जहां सभी कार्बन उत्सर्जन (carbon emission) वायुमंडल से कार्बन की एक समान मात्रा को हटाकर ऑफसेट होते हैं, ऐसे कि वे रद्द हो जाते हैं। महत्वपूर्ण रूप से, इसका मतलब ज़ीरो उत्सर्जन नहीं है – नेट ज़ीरो लक्ष्य प्रदूषकों को उत्सर्जन जारी रखने की अनुमति देते हैं, जब तक वे जितना जोड़ते हैं उतना ही कार्बन हटाते जाएं। फिर भी, एक प्रभावी नेट ज़ीरो लक्ष्य का मतलब ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (Greenhouse gas emissions) में कमी है, क्योंकि कार्बन निष्कर्षण की सीमित और अप्रमाणित क्षमता है।

एनी, सबसे महत्वाकांक्षी हो कर, 2050 तक अपने पूरे व्यवसाय में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 80% कटौती का लक्ष्य रखता है। बीपी चाहता है कि उसके संचालन और बिक्री उसी वर्ष (2050) तक कार्बन न्यूट्रल (यानी नेट ज़ीरो) हो जाए, जबकि शेल ने परिचालन और बिक्री में अपनी उत्सर्जन तीव्रता में 65% की कमी के लिए खुद को प्रतिबद्ध किया है। शेल अपने ग्राहकों को उनके संबंधित क्षेत्रों को डीकार्बनाइज़ करने में मदद भी करना चाहता है।

ये नए जारी किए गए लक्ष्य 2050 तक ‘नेट ज़ीरो’ हासिल करने के लिए तेल की बड़ी कंपनियों की ओर से बढ़ती महत्वाकांक्षा को दर्शाते हैं, लेकिन प्रतिज्ञाएं नेट ज़ीरो हासिल करने के लिए पर्याप्त रोडमैप प्रदान नहीं करती हैं, और यह पेरिस समझौते के साथ संरेखित नहीं है।

साइमन लुईस, ग्लोबल चेंज साइंस, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के प्रोफेसर कहते हैं :

“कुछ कंपनियां जीवाश्म कार्बन को वायुमंडल से बाहर रखने के अलावा किसी भी चीज़ के बारे में बात करने का हर अवसर लेती हैं। तेल कंपनियों और एयरलाइनों के लिए नवीनतम घरघराहट है कि वे अपने उत्सर्जन को शून्य के क़रीब तेज करने के लिए अपने व्यवसाय मॉडल में संरचनात्मक बदलावों में बड़ा निवेश में बड़ा निवेश करने के बजाय इसके स्थान पर वृक्षारोपण को बढ़ावा दे रही हैं। दुनिया को उनसे प्राप्त होने वाले कई लाभों के लिए अधिक वनों और आर्द्रभूमि की आवश्यकता है। उनमें से एक लाभ वातावरण से कार्बन निकालना है, जो जलवायु परिवर्तन से निपटने का एक अनिवार्य घटक (Mandatory component of tackling climate change) है, लेकिन यह जीवाश्म ईंधन के उत्पादन में बहुत आक्रामक कटौती का विकल्प नहीं है।”

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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