मिर्गी के दौरे की पूर्व-सूचना दे सकता है नया हेलमेटनुमा यंत्र

मिर्गी के दौरे की पूर्व-सूचना दे सकता है नया हेलमेटनुमा यंत्र

नई दिल्ली, 10 फरवरी: केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस विभाग के शोधकर्ताओं ने हेलमेट के आकार में एक ऐसा सेंसर युक्त यंत्र विकसित किया है, जो मिर्गी के दौरे (Epileptic seizures) पड़ने से पहले उसका पता लगा सकता है। मस्तिष्क के संकेतों को पढ़ने में सक्षम यह हेलमेट मिर्गी का दौरा पड़ने से पहले रोगी को अलर्ट कर देता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि समय रहते मिर्गी के दौरे का संकेत मिल जाए तो रोगी सतर्क हो सकते हैं, जिससे वे ड्राइविंग करते समय या फिर मशीनों पर काम करते हुए दुर्घटना से बच सकते हैं।

इस हेलमेट के डिजाइन के लिए शोधकर्ताओं को पेटेंट भी मिल गया है।

मिर्गी (Epilepsy) का संबंध मस्तिष्क विकार से है, जिसमें रोगी को बार-बार दौरे पड़ते हैं। इसके कारण मस्तिष्क की सामान्य कार्यप्रणाली बाधित होती है, और रोगियों के लिए रोजमर्रा के जीवन में मुश्किलों का सामान करना पड़ता।

मिर्गी का दौरा पड़ने से रोगी के लिए खुद को संभाल पाना मुश्किल होता है, जिसके कारण रोगी के दुर्घटनाग्रस्त या चोटिल होने का खतरा होता है। मशीन पर कार्य करते हुए, तैरते या फिर गाड़ी चलाते हुए ऐसे मरीजों को खतरा सबसे अधिक होता है।

दुनिया भर में पाँच करोड़ से अधिक लोग मिर्गी से पीड़ित, जिनमें दो करोड़ भारत में

इंडियन एपिलेप्सी एसोसिएशन के अनुसार दुनियाभर में पाँच करोड़ से अधिक लोग मिर्गी से पीड़ित हैं। वहीं, भारत में मिर्गी रोगियों की संख्या लगभग दो करोड़ है।

इस अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने मिर्गी से संबंधित इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राफी (ईईजी- Epilepsy-related electroencephalography,EEG in the Epilepsies) संकेतों के विश्लेषण के लिए एक प्रभावी एल्गोरिदम विकसित किया है।

ईईजी या विद्युतमस्तिष्कलेखन; मस्तिष्क के क्रियाकलापों को रिकॉर्ड करने की एक विद्युतकार्यिकीय विधि है। ईईजी संकेतों के माध्यम से स्वचालित रूप से मिर्गी की पहचान और समय रहते उसकी भविष्यवाणी के लिए केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस विभाग के शोधकर्ता वर्ष 2016 से अध्ययन कर रहे हैं।

प्रमुख शोधकर्ता, डॉ. राजेश आर. ने बताया कि

“अगर किसी ने यह हेलमेट पहन रखा हो तो मिर्गी का दौरा पड़ने से कम से कम 10 मिनट पहले यह अलर्ट कर देता है। हालांकि, 10 मिनट पहले दौरे का अलर्ट इतना सटीक नहीं होता। जबकि, तीन मिनट पहले मिलने वाला अलर्ट अधिक सटीक होता है, क्योंकि उस दौरान मस्तिक संकेत अधिक सघन होते हैं।” उन्होंने बताया कि मस्तिष्क के संकेतों का पता लगाने के लिए आमतौर पर उपयोग होने वाली ईईजी मशीन पोर्टेबल नहीं है। इसलिए, रोगियों को परीक्षण के लिए अस्पताल जाना पड़ता है।

मिर्गी के लिए विभिन्न चिकित्सीय उपचार उपलब्ध हैं। हालांकि, मिर्गी के 30 प्रतिशत मामले ऐसे होते हैं, जिनका नियंत्रण या उपचार कठिन होता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह हेलमेट एक चेतावनी प्रणाली की तरह काम करता है, जो मिर्गी के दौरे की घटनाओं, उनकी अवधि, और गंभीरता की निगरानी करके रोगी को सचेत करती है। इसके उपयोग से रोगियों को बचाव और सावधानी बरतने का समय मिल सकता है।

इस अध्ययन में, ‘ब्रेन सिग्नल कैप्चरिंग सेफ्टी हेलमेट’ मॉडल विकसित किया गया है, जो मस्तिष्क के संकेतों को पढ़कर मिर्गी के दौरे की आशंका का पता लगा लेता है। हेलमेट द्वारा रिकॉर्ड किए गए सिग्नल मोबाइल फोन पर भेज दिए जाते हैं। डॉ. राजेश आर. और उनकी टीम की कोशिश ईईजी मशीन में उपयोग होने वाले सभी सेंसरों को इस हल्के वज़न के हेलमेट में शामिल करने की है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि इस हेलमेट का डिजाइन गाड़ी चलाते हुए ड्राइवर्स को अलर्ट करने के लिए अलार्म सिस्टम विकसित करने में भी हो सकता है। उनका कहना है कि इस मॉडल के एल्गोरिदम में बदलाव करके इसका उपयोग ड्राइवरों की नींद की झपकी का पता लगाने में भी हो सकता है।

केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस विभाग के प्रमुख डॉ. राजेश आर. के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में इसी विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ तस्लीमा टी.एम. और शोध छात्र फ़ाज़िल ओ.के. शामिल हैं।

यह अध्ययन शोध पत्रिका न्यूरोसाइंस लेटर्स में प्रकाशित किया गया है।

(इंडिया साइंस वायर)

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