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Research News

रासायनिक उद्योगों के लिए नया माइक्रो-रिएक्टर

New Micro-reactor for Chemical Industries

Continuous flow manufacturing in pharmaceutical companies and chemical-related industries

नई दिल्ली, 17 फरवरी 2020 : दवा कंपनियों और रसायन से जुड़े उद्योगों में कंटीन्यूअस फ्लो मैन्युफैक्चरिंग (सीएफएम) का चलन बढ़ रहा है। संसाधनों के कुशल उपयोग और निरंतर उत्पादन को सुनिश्चित करने के लिए इस पद्धति में किसी उत्पाद का निर्माण शुरू से अंत तक उत्पादन के एक ही क्रम में किया जाता है। इस प्रणाली में निरंतर उत्पादन के क्रम को बनाए रखने में माइक्रो-रिएक्टर या फ्लो-रिएक्टर की भूमिका अहम होती है।

पुणे स्थित राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (एनसीएल) के वैज्ञानिकों ने कांच लेपित धातु से माइक्रो-रिएक्टर बनाया है। इन कांच-लेपित सीएफएम रिएक्टरों को उत्पादन प्रक्रिया में एक स्थान मिलने की उम्मीद की जा रही है।

ये रिएक्टर रासायनिक रूप से क्षरण-रोधी हैं और धात्विक क्षरण के लिए जिम्मेदार रासायनिक क्रियाओं, उच्च तापमान एवं दबाव को सहन कर सकते हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि अपनी तरह के इस बेहद छोटे माइक्रो-रिएक्टर के निर्माण से रिएक्टरों की क्षमता में सुधार हुआ है और वे रासायनिक रूप से अधिक अनुकूल हुए हैं। आमतौर पर सीएफएम प्रणाली में धातु, पॉलिमर्स, कांच अथवा सिरेमिक से बने माइक्रो-रिएक्टर्स का उपयोग होता है।

एनसीएल, पुणे के वैज्ञानिकों डॉ. अमोल ए. कुलकर्णी और डॉ. विवेक वी. रानाडे द्वारा विकसित इन माइक्रो-रिएक्टर्स के डिजाइन को वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् द्वारा पेटेंट कराया गया है।

इस माइक्रो-रिएक्टर की तकनीक व्यावसायिक उत्पादन एवं विपणन के लिए जीएमएम-पीफॉडलर नामक कंपनी को हस्तांतरित की गई है। पुणे में सोमवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान एनसीएल के निदेशक प्रोफेसर अश्विनी नांगिया और जीएमएम-पीफॉडलर के सीईओ तारक पटेल ने इस संबंध में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

Market surveys conducted about micro-reactors

तारक पटेल ने कहा कि

“इस माइक्रो-रिएक्टर के बारे में किए गए बाजार सर्वेक्षणों की प्रतिक्रिया बेहतरीन रही है। वे मुख्य रूप से एग्रोकेमिकल्स और हैलोजेन युक्त अभिकारकों एवं उत्पादों से जुड़े अन्य रासायनिक क्षेत्रों में उत्पादन में मदद कर सकते हैं। रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रति किए गए परीक्षणों में इन रिएक्टर्स को प्रभावी पाया गया है।”

उमाशंकर मिश्र

(इंडिया साइंस वायर)

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