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हॉलीवुड में महिला शक्ति की नयी प्रतीक : जेन कम्पियन

New symbol of female power in Hollywood: Jane Campion

‘ऑस्कर अवॉर्ड’ फिल्मों का नोबेल पुरस्कार सरीखा सबसे प्रतिष्ठित अवॉर्ड है, जिसका हर साल सिनेमाप्रेमी बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं. इस बार इसका आयोजन 27 मार्च को लॉस एंजिल्स में डॉल्बी थियेटर में होने जा रहा है. इस समारोह में 1 मार्च से 31 दिसंबर तक रिलीज हुई फिल्मों के दस श्रेणियों में लोगों को सम्मानित किया जायेगा. दस श्रेणियों में नामांकन के लिए प्रतिस्पर्धा करने के लिए फिल्मों के शॉर्ट लिस्ट की घोषणा 21 दिसंबर को की गयी थी, जबकि विभिन्न श्रेणियों में पांच बेस्ट फिल्मों के नामांकन की घोषणा 8 फ़रवरी को हुई थी, जिसमें विदेशी फिल्मों की श्रेणी में जय भीम का नाम न देखकर भारत में मातम छा गया था. 94वें ऑस्कर अकादमी पुरस्कार समारोह की मेजबानी (94th Oscar Academy Awards Ceremony) रेजिना हॉल, एमी शूमर और वंदा साइक्स करेंगी. इनमें रेजिना हॉल और वांडा साइक्स अश्वेत हास्य अभिनेत्री और लेखिका हैं, जबकि श्वेतांगी एमी शूमर एक कॉमेडी ऐक्ट्रेस हैं.

ऑस्कर के दावेदारों में कौन सी फिल्में हैं? | Which movies are in the Oscar contenders?

बहरहाल इस बार के ऑस्कर दावेदारों में स्टीवन स्पीलबर्ग जैसे महान डायरेक्टर, डेंजिल वाशिंग्टन और विल स्मिथ जैसे महान अभिनेता तथा निकोल किडमैन और पेनिलोप क्रूज जैसी चर्चित तारिकाएँ भी हैं. किन्तु दुनिया की निगाहें जिस पर टिकी हुई हैं, वह कोई और नहीं ‘पॉवर ऑफ़ द डॉग’ की निर्देशिका जेन कम्पियन हैं, जो इसके पहले लेखन के लिए ऑस्कर ट्राफी चूम चुकी हैं. वैसे तो हर ऑस्कर में कोई न कोई नॉमिनेट होने के बाद चर्चा का खास विषय बन जाता है, किन्तु जिस तरह जेन कैम्पियन इस बार ‘द पॉवर ऑफ़ द डॉग’ को लेकर चर्चा में हैं, वैसा बार-बार नहीं होता.

फिल्म द पॉवर ऑफ़ द डॉग की कहानी (Story of the movie The Power of the Dog)

जेन कैम्पियन की ‘द पॉवर ऑफ़ द डॉग’ एक मनोवैज्ञानिक ड्रामा मूवी है. फिल्म की शुरुआत 1925 में मोंटाना शहर से होती है, जिसमें हमें वहां काफी जानवर दिखाई देते हैं : जिसे काफी लोग संभाल रहे होते हैं. वहीं पर उनका मालिक फील नजर आता है. जो काफी अकडू होता है. जैसे-जैसे फिल्म की कहानी आगे बढ़ती है यह और भी मजेदार होती जाती है. ये फिल्म दर्शकों को अंत तक बांधे रखती है.

यह थॉमस सैवेज के 1967 में प्रकाशित उपन्यास ‘द पॉवर ऑफ़ द डॉग’ (The Power of the Dog) का रूपांतरण है. जेन कैम्पियन (Jane Campion) द्वारा लिखी और निर्देशित यह फिल्म 2021 में रिलीज़ हुई थी, जिसका प्रीमियर 78 वें वेनिस इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ था, जहां उन्हें सर्वश्रेष्ठ निर्देशन के लिए सिल्वर लायन से सम्मानित किया गया था. कैम्पियन को लेकर इस बार जो खास क्रेज पैदा हुआ है उसका खास कारण ऑस्कर का सेमी फाइनल माने जाने वाले गोल्डन ग्लोब अवार्ड्स में इसकी सफलता है, जिसमें यह फिल्म ‘बेलफ़ास्ट’ के साथ सभी श्रेणियों में नामित हुई थी एवं जिसमें इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और सर्वश्रेष्ठ चित्र से पुरस्कृत किया गया था.

गोल्डन ग्लोब्स में इस फिल्म ने लोगों की जो प्रत्याशा बढ़ाया, उसका प्रतिबिम्बन 94वें अकादमी पुरस्कारों के नामांकन में हुआ. इस फिल्म को ऑस्कर 2022 में एक दर्जन नामांकन मिला है, जिसमें सर्वश्रेष्ठ चित्र, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, सर्वश्रेष्ठ रूपांतरित पटकथा, बेनेडिक्ट कंबरबैच के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, कर्स्टन डंस्ट के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री और कोडी स्मिट-मैकफी और जेसी पेलेमन्स दोनों के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता शामिल हैं.

द पॉवर ऑफ़ द डॉग के लिए बेस्ट डायरेक्टर कटेगरी में नामांकित होकर जेन कैम्पियन ने इतिहास रच दिया है. वह 94 वर्षों के अकादमी पुरस्कारों के इतिहास में पहली महिला हैं, जिन्हें दो बार सर्वश्रेष्ठ निदेशक की श्रेणी में नामांकन मिला है. वह पहली महिला हैं, जिनकी फिल्म को विभिन्न श्रेणियों में दस से ज्यादा नामांकन मिला है. यह कितनी महत्वपूर्व घटना है इसका जायजा ऑस्कर के इतिहास का सिंहावलोकन करके ही लिया जा सकता है.

स्मरण रहे ऑस्कर के 94 वर्षों के इतिहास महिलाओं को बेस्ट डायरेक्शन में अब तक आठ नामांकन मिले हैं, जिनमें दो तो जेन कैम्पियन को ही मिले हैं.इससे पहले 28 वर्ष पूर्व 1993 में उन्हें पियानों के लिए नामांकित किया गया. इसके पहले पिछले साल 2021 दो महिलाओं : क्लो झाओ को ‘नोमैडलैंड’ और एमराल्ड फेनेल को ‘प्रोमिसिंग यंग वुमन’ के लिए यह गौरव प्राप्त हुआ था. इनके अतिरिक्त लीना वर्टमुलर (सेवन ब्यूटीज़), कैथरीन बिगेलो(द हार्ट लॉकर), सोफिया कोपोला (लॉस्ट इन ट्रांसलेशन) और ग्रेटा गेरविग (लेडी बर्ड) वे महिलाएं हैं, जिन्हें सर्वश्रेष्ठ निर्देशन के लिए नामांकन मिल चुका है. ऐसे में जैसिंडा आरडर्न जैसी महिला प्रधानमंत्री तथा ग्लैडियेटर फेम रसेल क्रो जैसा अभिनेता देने वाले न्यूजीलैंड की मूलनिवासी जेन कैम्पियन के सामने विरल इतिहास रचने का एक सुनहला अवसर सामने है.

वैसे तो जेन डायरेक्शन के लिए दो-दो नॉमिनेशन पा कर एक इतिहास रच ही डाली हैं, पर, यदि वह आगामी 27 मार्च को डॉल्बी थियेटर में बेस्ट डायरेक्टर का पुरस्कार जीतने में सफल हो जाती हैं, वह निःसंदेह हॉलीवुड के इतिहास की ग्रेटेस्ट महिला डायरेक्टर कहलाने का गौरव प्राप्त कर लेंगी. कारण अब तक सिर्फ दो ही महिलाएं- कैथरीन बिगेलो ‘द हार्ट लॉकर’(2010) और क्लो झाओ ‘नोमैडलैंड ‘(2021)- ही बेस्ट डायरेक्टर का ऑस्कर जीतने में सफल हुई हैं. वैसे जिस तरह जेन की ‘द पॉवर ऑफ़ द डॉग’ ऑस्कर का सेमी फाइनल माने जाने वाले गोल्डन ग्लोब्स अवार्ड में बेस्ट डायरेक्टर का ख़िताब जीता है; जिस तरह तमाम क्रिटिक्स इस फिल्म की प्रशंसा में पंचमुख हुए हैं और सर्वोपरि जिस तरह हॉलीवुड ऑस्कर पुरस्कार में डाइवर्सिटी लाने के प्रति अतिरिक्त रूप से प्रयत्नशील है उससे जेन कैम्पियन के लिए इतिहास रचने की सम्भावना औरों से बेहतर है.

इसमें कोई शक नहीं कि समृद्धि के लिए शांति को ध्यान में रखते हुए पिछली सदी के 70 के दशक में अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन बी जॉनसन ने अमेरिका को सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के लिए शक्ति के समस्त स्रोतों में नस्लीय और लैंगिक विविधता लागू करने का जो उद्योग लिया, उससे कालांतर में हॉलीवुड भी अछूता न रह सका. हॉलीवुड में रेसियल और जेंडर डाइवर्सिटी को बढ़ावा देने के फलस्वरूप अश्वेतों में ढेरों लोगों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला जिसका असर 2002 के अकादमी पुरस्कारों में दिखा. तब अफ्रीकन मूल के डेंजिल वाशिंग्टन और हैले बेरी को एक साथ बेस्ट एक्टर और बेस्ट एक्ट्रेस का पुरस्कार ग्रहण करते देखा गया. उसी तरह उस वर्ष महान नीग्रों एक्टर सिडनी पोयटीयर भी लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित होकर सुखद विस्मय घटित कर दिए. उसके बाद तो नयी सदी में हर वर्ष ब्लैक्स लोगों को ऑस्कर पाते देखा गया.

निश्चय ही बीच में डोनाल्ड ट्रंप की अश्वेत विरोधी नीतियों से ऑस्कर कुछ ज्यादे सफ़ेद हुआ, लेकिन अब फिर से गाड़ी पटरी पर आती दिख रही है. बहरहाल अमेरिकी सरकारों के दबाव में हॉलीवुड में रेसियल के साथ जेंडर डाइवर्सिटी को बढ़ावा देने का जो काम शुरू हुआ, उसके फलस्वरूप कैथरीन बिगेलो, क्लो झाओ, जेन कैम्पियन के साथ रेजिना किंग, अवा डूवार्न, कैथी यानो,पैटी जेन्किन्स, निकी केरोस, मारिएल हेलर, लुलु वांग, सोफ़िया कपोला, ग्रेटा गेरविग, कासी लेमंस इत्यादि जैसी दर्जन से अधिक ऐसी महिला फिल्म निर्देशकों को उदय हो चुका है, जो पुरुषों से न सिर्फ कदमताल करते हुए आगे बढ़ रही हैं, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी कमाल दिखा रही हैं. अपनी उपस्थिति से दुनिया को विस्मित करने वाली इन महिलाओं में लगभग 40 प्रतिशत चाइनीज, अफ्रीकन एवं लातिन अमेरिकी मूल की अश्वेत महिलाएं हैं. जिस तरह ऑस्कर 2021 और 2022 में महिला निर्देशकों ने अपनी बलिष्ठ उपस्थित दर्ज कराया है, उससे लगता है कि महिला डायरेक्टर्स का नाम अब हर वर्ष पांच बेस्ट के नामांकन में दिखेगा. वैसे अन्यान्य क्षेत्रों की भांति हॉलीवुड में भी जेंडर इक्वलिटी(लैंगिक समानता) अर्जित करने में समय लगेगा, पर, जिस तरह हॉलीवुड रेसियल के साथ जेंडर डाइवर्सिटी के प्रति गंभीर है, वह लैंगिक समानता के मोर्चे पर जरुर मिसाल कायम करेगा, इसके प्रति आशावादी हुआ जा सकता है.              

जैसा कि पूर्व पंक्तियों में मैंने लिखा है कि हॉलीवुड में डाइवर्सिटी लागू होने के फलस्वरूप हर वर्ष ऑस्कर विजेताओं में अश्वेत दिखने लगे हैं. इस बार भी रेसियल डाइवर्सिटी का प्रतिबिम्बन ऑस्कर में होने की सम्भावना उजागर हो गयी है. डायरेक्शन के क्षेत्र में तो बड़ा कमाल हो सकता है.

इस श्रेणी में पिछले चार वर्षों में सभी चार ऑस्कर अश्वेतों ने जीता है. क्लो झाओ को ‘नोमैडलैंड’(2021), ‘पैरासाइट’ के लिए बोंग जून हो (2020), ‘रोमा’ के लिए अल्फोंसो क्वारोन (2019), और ‘द शेप ऑफ वॉटर’ (2018) के लिए गिलर्मो डेल टोरो को बेस्ट डायरेक्टर का अवार्ड मिला है. और इस वर्ष रयूसुके हमागुची ने ‘ड्राइव माई कार’ के लिए नामांकित होकर बेस्ट डायरेक्टर की ट्राफी अश्वेतों के हाथों लगातार पांचवी पर पहुचने की सम्भावना जगा दिया है. बेस्ट एक्टर की श्रेणी में तो विल स्मिथ और डेंजिल वाशिंग्टन नामांकित होकर डाइवर्सिटी समर्थकों को खुश कर दिया है. चूँकि डेंजिल वाशिंग्टन एक बार यह ट्राफी हाथ में ले चुके हैं, इसलिए अधिकांश डाइवर्सिटी फिल्म प्रेमी इस बार विल स्मिथ को जीतते हुए देखना चाहते हैं.

मामला निरशाजनक है तो बेस्ट एक्ट्रेस के क्षेत्र में. 20 साल पहले ‘मॉन्स्टर्स बॉल’ के लिए हैले बेरी के ऑस्कर जीतने के बाद से इस कैटेगरी में जीत एक सपना बना हुआ है. इस बार भी बेस्ट ऐक्ट्रेस की श्रेणी भी किसी अश्वेत एक्ट्रेस को नामांकन नहीं मिला है. सहायक अभिनेता और अभिनेत्री की श्रेणी में बराबर ही प्रायः संतोषजनक स्थिति रही है, जो इस बार भी है. इस वर्ष बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस की श्रेणी में एरियाना डेबोस (‘वेस्ट साइड स्टोरी’) और आंजन्यू एलिस (‘किंग रिचर्ड’) से काफी उम्मीदें हैं. इसी तरह कोरी हॉकिन्स (द ट्रेजेडी ऑफ मैकबेथ) और डेविड अल्वारेज़ (वेस्ट साइड स्टोरी) और जेफरी राइट (द फ्रेंच डिस्पैच) ने सर्वश्रेष्ठ सहनायक की श्रेणी में उम्मीद जगाया है.

बहरहाल जय भीम को ऑस्कर में नामांकन ने मिलने से जो आघात लगा, उसकी कुछ-कुछ भरपाई ‘राइटिंग विद फायर’ ने कर दी है. भारत की ओर से डॉक्यूमेंट्री फिल्मों की श्रेणी में पहली बार ऑस्कर की दौड़ में 5 बेस्ट में नॉमिनेट होने वाली ‘राइटिंग विद फायर’ का विषय वस्तु भी जय भीम की भांति ही दलित विषयक है, इसलिए यह बहुजनों को जय भीम से मिली मायूसी से उबारने में काफी सहायक हुई है. 

थॉमस और सुष्मित घोष द्वारा निर्देशित राइटिंग विद फायर ने अंतर्राष्ट्रीय प्लेटफार्म पर दो दर्जन के अवार्ड जीतकर ऑस्कर में भारी संभावना जगा दी है. इस डॉक्युमेंट्री में मुख्य रिपोर्टर मीरा के नेतृत्व वाले दलित महिलाओं के महत्वाकांक्षी समूह की कहानी को दिखाया गया है, जो प्रासंगिक बने रहने के लिए प्रिंट से डिजिटल माध्यम में स्विच करती हैं. ऐसे में उम्मीद करनी चाहिए कि अमेरिका में 27 मार्च को प्रसारित होने वाला ऑस्कर समारोह जब भारत में 28 मार्च की सुबह टीवी पर प्रसारित होगा: उसे देखने में कम से कम भारत के आंबेडकरवादी जरूर रूचि लेंगे!

एच.एल. दुसाध

(लेखक बहुजन डाइवर्सिटी मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.)    

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