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क्या होता है इलेक्ट्रोस्मॉग? क्या इलेक्ट्रोस्मॉग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है?

कैसे बना इलेक्ट्रोस्मॉग शब्द?  इलेक्ट्रोस्मॉग हमारे पर्यावरण में हवा की तरह अदृश्य रूप में फैला हुआ है और हमें यह महसूस भी नहीं होता है।

What is electrosmog? Is electrosmog injurious to health?

हमारे घर में और उसके आस-पास बिजली यानि विद्युत ऊर्जा से चलने वाले तमाम तरह के उपकरण होते हैं, जैसे कि पंखा, फ्रिज, विद्युत बल्ब, वाशिंग मशीन, दाढ़ी बनाने की मशीन या बाल सुखाने वाले हेयर ड्रायर आदि। जब भी इनका इस्तेमाल किया जाता है, ये शक्तिशाली विद्युत चुंबकीय क्षेत्र (powerful electromagnetic field) पैदा करते हैं। इसी तरह घर से बाहर ऊंचे ऊंचे खंबों वाली ओवरहेड ट्रांसमिशन लाइन यानि बिजली की लाइन, बिजली से चलाने वाली रेल गाडियाँ आदि भी अपने आसपास शक्तिशाली विद्युत चुंबकीय क्षेत्र पैदा करती हैं। इस तरह के सभी विद्युत उपकरणों से काफी शक्तिशाली विद्युत चुंबकीय क्षेत्र पैदा होता है, जो कि हमारे शरीर के लिए बहुत ही नुकसानदेय होता है। हमारे आस-पास के वातावरण में जो विद्युत चुंबकीय क्षेत्र होते हैं, उन्हें इलेक्ट्रोस्मॉग या विद्युत चुंबकीय धुंध कहा जाता है। यह सामान्य स्मॉग की तरह हर जगह फैला होता है, पर दिखायी नहीं पड़ता है।

कैसे बना इलेक्ट्रोस्मॉग शब्द? How was the term electro smog coined?

दरअसल, स्मॉग शब्द अंग्रेजी के स्मॉक और फॉग शब्दों के मेल से बना है। वैसे विद्युत चुंबकीयकी क्षेत्र के साथ उसका सीधा मेल तो नहीं बैठता, पर अब यह शब्द काफी प्रचलित हो गया है।

इलेक्ट्रोस्मॉग हमारे पर्यावरण में हवा की तरह अदृश्य रूप में फैला हुआ है और हमें यह महसूस भी नहीं होता है।

इलेक्ट्रोस्मॉग से हम हर क्षण और हर जगह घिरे रहते हैं, इसलिए इससे बचना भी संभव नहीं है। उदाहरण के लिए यदि आप किसी रेलवे स्टेशन पर खड़े हैं, तो बिजली से चलने वाली गाड़ियों के आने-जाने पर, वहाँ से गुजर रही बिजली की उच्च वोल्टता वाली लाइनों से तथा वहाँ पर लगे लाउडस्पीकर पर हो रही घोषणाओं आदि से निरंतर विद्युत चुम्बकीय विकिरण निकलते रहते हैं।

दरअसल, बिजली से चलने वाली हर चीज – चाहे वह मोबाइल फोन हो, रेडियो हो, वायरलैस ट्रांसमिटर, टेलीविजन हो, टेलीफोन हो, विद्युत बल्ब हो या कोई अन्य विद्युत उपकरण हो, इन सभी से कुछ-न-कुछ विद्युत चुंबकीय क्षेत्र अवश्य पैदा होता है।

खाना गरम करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले माइक्रोवेव ओवन, हमारे आसपास अनेकों इमारतों की छतों पर लगे तमाम मोबाइल फोन ट्रांसमीटरों तथा हमारे हाथों में लगे मोबाइल फोन से भी उच्च आवृति वाली विद्युत चुंबकीय तरंगें पैदा होती हैं।

यदि आप ट्रेन में सफर कर रहे हैं तो जान लीजिये कि आप 15000 वोल्ट और 1400 एम्पियर बिजली-प्रवाह वाले ओवरहेड केबल की विद्युत धुंध में बैठे हैं।

यदि हम ऊंचे-ऊंचे खंबों वाली ट्रांसमिशन लाइनों की बात करें तो 50 हर्ट्ज आवृति और चार लाख वोल्ट की एसी करंट वाले ये केबल रेलवे के ओवरहेड केबल से भी अधिक शक्तिशाली विद्युत चुंबकीय क्षेत्र पैदा करते हैं। यही बिजली ट्रांसफॉर्मरों से होकर 230 वोल्ट और 50 हर्ट्ज आवृति वाली विद्युत ऊर्जा के रूप में हमारे घरों में पहुँचती है और घरों में भी उसी तरह का इलेक्ट्रोस्मॉग पैदा करती है।

इनके अलावा कंप्यूटर आदि के लिए वायरलेस लोकल एरिया नेटवर्क, हवाई अड्डों के राडार यंत्र और यातायात पुलिस के राडार कैमरे भी घरेलू माइक्रोवेव जैसे विद्युत चुंबकीय क्षेत्र पैदा करती हैं। यही नहीं, सूर्य का प्रकाश भी विद्युत चुंबकीय तरंगों का ही एक रूप है, इससे भी इलेक्ट्रोस्मॉग पैदा होता है।

क्या इलेक्ट्रो स्मॉग सेहत के लिए हानिकारक होता है? Is electro smog injurious to health?

 सवाल यह है कि क्या इलेक्ट्रोस्मॉग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है? इस संबंध में अभी कोई सटीक जवाव नहीं दिया जा सकता है। हाँ, इस विषय पर दुनियाभर में शोध चल रहे हैं और यह बहस का विषय बना हुआ है। हालांकि, विद्युत चुम्बकीय विकिरणों के प्रभाव से तबीयत नरम रहने, सिरदर्द और नींद न आने से लेकर कैंसर तक की शिकायतों की बात कही जा रही है। लेकिन अभी तक इनके कारण हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर कोई दुष्प्रभाव प्रमाणित नहीं हो सका है। फिर भी इलेक्ट्रोस्मॉग के दीर्घकालिक प्रभावों के बारे में अभी पर्याप्त जानकारी नहीं है।

डॉ. ओउम प्रकाश शर्मा

(देशबन्धु)

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