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जानिए वसीयत का अर्थ क्या है?

वसीयत का अर्थ हिंदी में जानिए | Know the meaning of will in Hindi | वसीयत शब्द का क्या अर्थ है?

किसी व्यक्ति द्वारा अपनी संपत्ति के बंटवारे में (अपनी मृत्यु के बाद) अपनी इच्छा की लिखित व वैधानिक घोषणा करना वसीयत कहलाता है। मुसलमानों के अलावा हर समुदाय के लिए भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925 (The Indian Succession Act, 1925) में वसीयत का कानून है। मुसलमान अपने निजी कानून से नियंत्रित होते हैं। वसीयत का पंजीकरण (registration of will) के बारे में आपको सब कुछ जानना चाहिए। जनहित में इस लेख में कुछ जानकारियां दी गई हैं, जो किसी भी हालत में कानूनी सलाह नहीं हैं। यह समाचार सिर्फ सामान्य ज्ञान के नजरिए से जनहित में एक प्रस्तुति भर है।

1- हिंदुओं और मुसलमानों को छोड़कर अन्य समुदायों के लोगों को विवाह के बाद नई वसीयत करनी पड़ती है, क्योंकि विवाह के बाद पुरानी वसीयत निष्प्रभावी हो जाती है।

2- अगर व्यक्ति विवाह के बाद नई वसीयत नहीं करता है, तो संपत्ति उत्तराधिकार कानून के अनुसार बांटी जाती है।

3- नई वसीयत करते समय उल्लेख करना होता है कि पुरानी वसीयत रद्द की जा रही है।

वसीयत कितने प्रकार की होती है? How many types of wills are there?

4- अगर संपत्ति साझा नामों में हो, तो भी व्यक्ति अपने हिस्से के बारे में वसीयत कर सकता है।

5- वसीयत करने वाले व्यक्ति को दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने चाहिए अथवा अपना अंगूठा लगाना चाहिए।

6- दो गवाहों द्वारा वसीयत सत्यापित की जानी चाहिए।

7- वसीयत के अनुसार जिन्हें लाभ मिलना है, वे तथा उनके पति/पत्नियां, वसीयत के गवाह नहीं होने चाहिए।

8- अगर वे ऐसी वसीयत पर गवाही देते हैं, तो वसीयत के अनुसार मिलने वाले लाभ या संपत्ति उन्हें नहीं मिलेंगे, लेकिन वसीयत अमान्य नहीं होगी।

9- वसीयत को पंजीकृत अवश्य करा लेना चाहिए ताकि इसकी सत्यता पर विवाद ना हो, इसके खोने की आशंका ना रहे अथवा इसके तथ्यों में कोई फेरबदल ना कर सके।

मुसलमान वसीयत कैसे करें | How to make a muslim will?

10- मुसलमान जुबानी वसीयत कर सकता है। अगर उसके वारिस सहमत नहीं हों तो वह अपनी एक तिहाई से ज्यादा संपत्ति (अंतिम संस्कार के खर्च तथा कर्जों के भुगतान के बाद बची संपत्ति का एक तिहाई) का वसीयत के जरिए निपटारा नहीं कर सकता।

11- मुसलमान की वसीयत अगर लिखी हुई है तो उसे प्रमाणित करने की जरुरत नहीं है। वह हस्ताक्षर के बिना भी वैध है।लेकिन अगर उसके वसीयतकर्ता के बारे में साबित कर दिया जाय।

12- किसी अभियान या युद्ध के दौरान सैनिक या वायुसैनिक खास वसीयतकर सकता है। इसे विशेषाधिकार वसीयत भी कहते हैं।

13- खास वसीयत का अधिकार हिंदुओं को नहीं प्राप्त है।

14- खास वसीयत लिखित या कुछ सीमाओं तक मौखिक हो सकती है।

15- खास वसीयत अगर किसी अन्य व्यक्ति ने लिखा है तो सैनिक के हस्ताक्षर होने चाहिए। लेकिन अगर उसके निर्देश पर लिखा गया है तो हस्ताक्षर की जरुरत नहीं होती है।

16- कोई सैनिक दो गवाहों की उपस्थिति में मौखिक वसीयत कर सकता है। लेकिन खास वसीयत का अधिकार ना रहने पर वसीयत एक महीने के बाद खत्म हो जाती है।

वसीयत कौन कर सकता है? | Who can make a will?

17- नाबालिग या पागल व्यक्ति को छोड़कर कोई भी व्यक्ति वसीयत कर सकता है।

18- अगर वसीयतकर्ता ने इसे लागू करने वाले का नाम नहीं दिया है या लागू करने वाला अपनी भूमिका को तैयार नहीं है तो वसीयतकर्ता के उत्तराधिकारी अदालत में आवेदन कर सकते हैं कि उन्हीं में से किसी को वसीयत लागू करने वाला नियुक्त कर दिया  जाय।

19- अगर न्यायालय द्वारा नियुक्त व्यक्ति अपना कार्य नहीं करता है, तो उत्तराधिकारी न्यायालय से वसीयत लागू करवाने का प्रशासन पत्र हासिल कर सकते हैं।

20- वसीयत लागू करने वाले को अदालत से वसीयत पर प्रोबेट (न्यायालय द्वारा जारी की गयी वसीयत की प्रामाणिक कापी)  अर्थात प्रमाणपत्र हासिल करना चाहिए।

21- किसी विवाद की स्थिति में संपत्ति पर अपने कानूनी अधिकार के दावे के लिए, लाभ पाने के इच्छुक वारिस के पास प्रोबेट या प्रशासन पत्र होना जरूरी है।

22- वसीयतकर्ता जब भी अपनी संपत्ति को बांटना चाहे वह वसीयत में परिवर्तन कर सकता है या उसे पलट सकता है।

23- अगर वसीयतदार, वसीयतकर्ता से पहले मर जाता है तो वसीयत खत्म हो जाती है और संपत्ति वसीयतकर्ता के उत्तराधिकारियों को मिलती है।

24- अगर दुर्घटना में वसीयतकर्ता और वसीयत पाने वाले की एक साथ मौत हो जाती है, तो वसीयत समाप्त हो जाती है।

25- अगर दो वसीयत पाने वालों में से एक की मौत हो जाती है तो जिंदा व्यक्ति पूरी संपत्ति मिल जाती है।

वसीयतनामा जमा करने की सुविधा | वसीयतनामा कहां जमा कराएं

1-भारतीय पंजीकरण अधिनियम 1908 के अंतर्गत रजिस्ट्रर के नाम वसीयतनामा जमा किया जाता है।

2- वसीयतनामा रजिस्टर कराना या जमा करना अनिवार्य नहीं है।

3- वसीयतनामा जमा कराने के लिए रजिस्ट्रार उसका कवर नहीं खोलता है। सब औपचारिकताओं के बाद उसे जमा कर लेता है।

4- जबकि पंजीकरण में जो व्यक्ति दस्तावेज प्रस्तुत करता है, सब रजिस्ट्रार उसकी कॉपी कर, उसी व्यक्ति को वापस लौटा देता है।

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