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पंजाब में दलित मुख्यमंत्री बनाने के पीछे कांग्रेस का लक्ष्य यूपी और उत्तराखंड?

पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी को नया मुख्यमंत्री बनाए जाने पर टिप्पणी. पंजाब की राजनीति का यूपी व उत्तराखंड की राजनीति पर क्या असर होगा… आगे पढ़ें

Congress’s goal behind making Dalit Chief Minister in Punjab, UP and Uttarakhand?

पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी को नया मुख्यमंत्री बनाए जाने पर टिप्पणी.

पंजाब की राजनीति का यूपी व उत्तराखंड की राजनीति पर क्या असर होगा ?

भाजपा के पूर्व व भावी सहयोगी बहुजन समाज पार्टी ने पंजाब में अकाली दल के साथ गठबंधन करके कांग्रेस को चोट पहुंचाने और भाजपा का एजेंडा सेट करने की कोशिश की थी। इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश से उन्होंने कांग्रेस पर निशाने साधे थे, जिसका लक्ष्य यूपी नहीं बल्कि पंजाब था। लेकिन कांग्रेस ने पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाकर न केवल पंजाब में अकाली-बसपा गठबंधन और पर्दे के पीछे से भाजपा की रणनीति की हवा निकाल दी है। पंजाब में कांग्रेस के मास्टर स्ट्रोक का असर यूपी चुनाव में भी दिखाई पड़ेगा।

पंजाब में मुख्यमंत्री पद के लिए दलित नेता चरणजीत सिंह चन्नी (Dalit leader Charanjit Singh Channi) के नाम की आश्चर्यजनक घोषणा के बाद, कांग्रेस उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बड़े लक्ष्य की ओर भी देख रही है, जहां अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने वाले हैं।

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा के बाद चन्नी को बधाई देते हुए कहा,

श्री चरणजीत सिंह चन्नी जी को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई। हमें पंजाब के लोगों से किए गए वादों को पूरा करना जारी रखना चाहिए। उनका भरोसा सर्वोपरि है।”

अमरिंदर सिंह के कटु आलोचक समझे जाते हैं चरणजीत सिंह चन्नी

चन्नी, जो निवर्तमान मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के कटु आलोचक समझे जाते हैं, उन्हें राज्य में न केवल लगभग 32 प्रतिशत दलित मतदाताओं को लुभाने के लिए नियुक्त किया गया है, बल्कि पड़ोसी राज्य उत्तराखंड और यूपी में भी पंजाब के साथ अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने हैं।

पंजाब में एक दलित मुख्यमंत्री के बाद कांग्रेस की नजर अब उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश पर है, लेकिन देखना यह होगा कि क्या कांग्रेस को यूपी में दलित फार्मूले को ज्यादा भाव मिलेगा, क्योंकि राज्य में मायावती एक मजबूत ताकत हैं और गैर-जाटव दलित ज्यादातर भाजपा के साथ हैं। यह दलित वोट एक समय में कांग्रेस की ताकत हुआ करता था।

सूत्रों का कहना है कि सुखजिंदर सिंह रंधावा के नाम का प्रस्ताव अधिकांश विधायकों ने किया था, लेकिन राहुल गांधी ने चन्नी के पक्ष में फैसला किया, जो पिछली अकाली सरकार के दौरान थोड़े समय के लिए विपक्ष के नेता थे।

अन्य नामों के अलावा, कांग्रेस चाहती थी कि पूर्व केंद्रीय मंत्री अंबिका सोनी भी मुख्यमंत्री बनें, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। हालांकि, वह अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद पंजाब प्रकरण में मुख्य संकटमोचक के रूप में उभरीं।

चर्चा है कि अंबिका सोनी ने देर रात पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ कम से कम दो बार बैठक की और नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति में अपनी भूमिका निभाई।

अंबिका सोनी क्यों नहीं बन पाईं मुख्यमंत्री?

अंबिका सोनी को मुख्यमंत्री बनाने के लिए राज्य के नेताओं में आम सहमति बनानी थी, दूसरी बात कि मुख्यमंत्री का विधायक होना चाहिए था, और इसलिए रंधावा और चन्नी के नाम सामने आए, लेकिन दलित नेतृत्व पर विशेष ध्यान देने वाले राहुल गांधी ने चन्नी के पक्ष में फैसला किया।

अब पंजाब में दलित मुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस का मायावती और भाजपा पर दबाव बढ़ गया है। अगर कांग्रेस पंजाब के जरिए यूपी के दलितों को समझाने में कामयाब रही कि मायावती हमेशा भाजपा, सपा या कांग्रेस के समर्थन से ही सत्ता में आ सकती हैं, लेकिन कांग्रेस सत्ता में आने पर दलितों और वंचितों को सत्ता में भागेदारी दिला सकती है, तो यह भाजपा और बसपा के लिए बड़ा झटका होगा।

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