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200 से अधिक नागरिक हस्तियों की रंगभेदी इज़राइल के साथ संबंधों को समाप्त करने की मांग

भारत में पेगासस जासूसी मामला : 200 से अधिक नागरिक हस्तियों ने दमनकारी निगरानी और रंगभेदी इज़राइल के साथ संबंधों को समाप्त करने के आह्वान का समर्थन किया है

 200 से अधिक नागरिक हस्तियों ने दमनकारी निगरानी और रंगभेदी इज़राइल के साथ संबंधों को समाप्त करने के आह्वान का समर्थन किया

More than 200 concerned citizens endorse the call to end repressive surveillance & ties with apartheid Israel

नई दिल्ली, 23 जुलाई 2021. दो सौ से अधिक सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, सांस्कृतिक हस्तियों और संबद्ध नागरिकों ने भारत सरकार से पेगासस/एनएसओ की जांच के निष्कर्षों पर सफाई देने की मांग रखी है।

समर्थन करने वालों में सांस्कृतिक समुदाय के सदस्य जैसे नसीरुद्दीन शाह, रतना पाठक शाह, नयनतारा सहगल, मल्लिका साराभाई, टी एम कृष्णा, अशोक वाजपेयी, शशि देशपांडे, गीता हरिहरन, पुष्पमाला एन, आनंद पटवर्धन, विवान सुंदरम, सामिक बंद्योपाध्याय, के सच्चिदानंदन, हिरेन गोहेन और मीना कंडासामी; अकादमिक समुदाय के सदस्य जैसे निवेदिता मेनन, कुमकुम रॉय, ज्ञान प्रकाश, अपूर्वानंद, राजेंद्र चेन्नी, रोहिणी हेन्समैन और विजय प्रशाद; सामाजिक कार्यकर्ता हेनरी टिफागने, हर्ष मंदर और फादर फ्रेज़र मस्कारेन्हास; पत्रकार गीता सेशु और पैमेला फ़िलीपोस; और सैकड़ों अन्य भारतियों के साथ साथ मिस्र की उपन्यासकार अहदाफ़ सुईफ़ और फ़िलिस्तीनी लेखक और मानवाधिकार वकील राजा शेहादेह भी शामिल हैं  – जो दर्शाता है कि यह वास्तव में एक वैश्विक प्रश्न और उससे जुड़ा साझा संघर्ष है।

पेगासस द्वारा लक्षित परंजॉय गुहा ठाकुरता, अनिर्बान भट्टाचार्य और शालिनी गेरा ने भी इस बयान का समर्थन किया है।

इस्राएल का अपार्थेड शासन इस अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के मूल में है, जहां स्पाइवेयर उद्योग सैन्य-औद्योगिक परिसर के अभिन्न हिस्सा है और इन तकनीकों को फ़िलिस्तीनी लोगों की लक्षित और सामूहिक जासूसी के माध्यम से उत्पादित किया जाता है। इसलिए, फ़िलिस्तीनी  बीडीएस राष्ट्रीय समिति ने साइबर-निगरानी और दुनिया भर में एनएसओ समूह के कारोबार, जिससे मानव अधिकार का क्षरण हो रहा है, इन्हें समाप्त करने के लिए एक अभियान का आह्वान किया है।

पूरा बयान निम्नवत् है –

अपार्थेड के साथ साझदेारी : भारत में पेगासस जासूसी

भारतीय नागरिकों के स्मार्टफोन पर इस्राइली एनएसओ ग्रपु के पेगासस स्पाइवेयर के उपयोग के बारे में बड़े पैमाने पर हो रहे खुलासे में कई पत्रकार, विपक्षी नेता, यहां तक कि एक प्रमुख वायरोलॉजिस्ट का नाम भी सामने आया है। पेगासस स्पाइवेयर और एनएसओ ग्रपु खदु इस्राएल के अपार्थेड और कब्ज़े के मट्रिैट्रिक्स का हिस्सा हैं और हमारी सरकार के दमनकारी प्रति मानों और तरीकों का बस नवीनतम आयात है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल और पेरिस स्थित गैर-लाभकारी संस्था, फॉरबिडन स्टोरीज़, वास्तविक और संभावित लक्ष्यों के रूप में चुने गए फोन नंबरों की लीक हुई एक सूची पाने में सक्षम थी, जिसे उन्होंने पेगासस प्रोजेक्ट को दिया- जो कि मीडिया घरानों का समूह हैजो एनएसओ और उसके ग्राहकों की जांच में सम्मिलित है। भारत ऐसे 10 ग्राहकों में से एक है। एनएसओ ग्रपु इस्राइली राज्य के साथ मिलकर काम करता है, जो कंपनी के स्पाइवेयर की हर बिक्री को मंजूरी देता है, और कंपनी खदु अपने उत्पादों को केवल “सत्यापित सरकारों” को बेचने का दावा करती है।

इसके पहले भी 2019 के अतं में व्हाट्सएप द्वारा कार्यकर्यर्ताओं और वकीलों के खिलाफ़ पेगासस के उपयोग के बारे मेंएक खुलासा सामने आया था, जिनमें से कई भीमा कोरेगांव मामले से जुड़े थे। यह दिन के उजाले जैसे स्पष्ट है कि सरकार दमन या जासूसी के द्वारा किसी भी आवाज़ को दबानेके लिए तैयार है जो उसकी आलोचना करते हैं, और सच्चाई को सामने ला रहे हैं।

इस्राएल और एनएसओ समूह के साथ अपने सहयोग के माध्यम से सरकार ऐसी तकनीकों का उपयोग करती है जो फ़िलिस्तीनी लोगों के खिलाफ़ प्रयोग किये जाते हुए विकसित की गयी हैं। इस प्रकार इन तकनीकों को प्रखर बनाया जाता है, और फिर दुनिया भर के ग्राहकों को बेचा जाता है जो दमन के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं।

सऊदी अरब से लेकर मैक्सिको को तक, हंगरी से लेकर भारत तक — शासकों द्वारा विरोध की आवाज़ों को निशाना बनाने के लिए इनका इस्तेमाल किया गया है, जिसके चलते पत्रकार जमाल खशोगी और सेसिलियो पिनेडा बिर्टो मारे भी जा चुके हैं।

इसलिए, हम भारत सरकार से इस मामले की जांच के निष्कर्षों को सामने रखने की मांग तो करते ही हैं, पर साथ में हमें एक व्यापक वैश्विक गठबधंन की दिशा में भी काम करना चाहिए जो इस तरह की जासूसी और सरकारों की साँठ – गाँठ को चुनौती दे सके जिसके चलते ऐसी मानव अधि कारों का उल्लघंन करने की तकनीकें उन तक पहुँचती हैं– जैसा कि हम इस्राएल के साथ देखतेहैं।

एनएमओ को उसकी तकनीक द्वारा लक्षित लोगों की मौत और दमन के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए

लेकिन यह केवल इस मामले का सिरा भर है।

जासूसी की तकनीकें आयात एक सरकारी नीति का परिणाम है जो इस्राएल को एक मॉडल के रूप में देखता। नागरिकता संशोधन अधिनियम जो इसाइली वापसी के कानून का प्रतिनिधन है, जम्मू और कश्मीर में अनुष् 370 को निरस्त करना और वहाली की बस्तियों के लिए दरवाजे खोलना इसकी शुरुआत रहे विरोध के घोटाले से पता चलता है कि सत्ता में बैठे लोगों की इच्छा का विरोध करने वाले किसी व्यक्ति के खिलाफ यापन के तरीकों का इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है। आंतरिक रूप से, लोक्त और समानत के लिए हमारे संघर्ष फिलिस्तीनी मुक्ति आंदोलन के साथ-साथ दुनिया भर में मानवाधिकारों के उल्लंघन विरोध करने वाले लोगों से जुड़े हुए हैं।

हम मांग करते हैं और इनके लिए निरंतर संघर्ष की ओर अग्रसर है कि

जनता के पैसे का इस्तेमाल कर एनएसओ और ऐसी अन्य कंपनियों से साइबर सर्वलन्स टेक्नोलॉजी की खरीद खत्म हो

भारतीय नागरिकों के खिलाफ जासूसी और दमन को समाप्त हो –

अपार्थेड इस्राएल के साथ सैन्य और सुरक्षा संबंध समाप्त हो.

पाठकों से अपील

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हमारे बारे में उपाध्याय अमलेन्दु

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