पक्षियों की मधुर आवाज का राज क्या है ?

What is the secret of the sweet voice of birds? सिरिंक्स क्या होते हैं ? | सिरिंक्स क्या है? » Sirinks Kya Hai | Syrinx परिभाषा और अर्थ | सिरिनक्स (पक्षी शरीर रचना) - Syrinx (bird anatomy) | एक सिरिंक्स क्या है?... Read More
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Nature प्रकृति

What is the secret of the sweet voice of birds?

सिरिंक्स क्या होते हैं ? | सिरिंक्स क्या है? » Sirinks Kya Hai | Syrinx परिभाषा और अर्थ | सिरिनक्स (पक्षी शरीर रचना) - Syrinx (bird anatomy) | एक सिरिंक्स क्या है?

कई पक्षियों की मधुर आवाज उनके सीने में छुपे एक रहस्यमयी अंग से आती है जिसे सिरिंक्स कहते हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि जैव विकास की प्रक्रिया में सिरिंक्स केवल एक बार विकसित हुआ है और यह विकास से सर्वथा नवीन रचना के निर्माण का दुर्लभ उदाहरण है क्योंकि अन्य किसी सम्बंधित जीव में ऐसी कोई रचना नहीं पाई जाती जिससे सिरिंक्स विकसित हो सके।

लैरिंक्स क्या होता है ? | Definition of larynx | Larynx (लैरिंक्स) Meaning In Hindi

सरीसृप, उभयचर और स्तनधारी सभी में ध्वनि के लिए लैरिंक्स होता है जो सांस नली के ऊपरी हिस्से में होता है। इसके ऊतकों की तहों (वोकल कॉर्ड) में कम्पन्न से मनुष्यों की आवाज़, शेर की दहाड़ या सुअरों के किंकियाने की आवाज़ पैदा होती है।

पक्षियों में भी लैरिंक्स होता है। लेकिन ध्वनि निकालने के लिए वे इस अंग का उपयोग नहीं करते। वे सिरिंक्स का उपयोग करते हैं। सिरिंक्स सांस नली में थोड़ा नीचे की ओर वहां स्थित होता है जहां सांस नली दो भागों में बंटकर अलग-अलग फेफड़ों की ओर जाती है।

टेक्सास विश्वविद्यालय की जीवाश्म विज्ञानी जूलिया क्लार्क और उनका समूह जानना चाहता था कि पक्षियों में यह विचित्र अंग कैसे विकसित हुआ। उन्होंने आधुनिक सरीसृपों और पक्षियो में सिरिंक्स और लैरिंक्स के विकास की तुलना की।

उन्होंने पाया कि ये दोनों अंग बहुत अलग हैं। वोकल कॉर्ड के काम करने के लिए लैरिंक्स उसकी उपास्थि से जुड़ी मांसपेशियों पर निर्भर होता है। लेकिन सिरिंक्स उन मांसपेशियों पर निर्भर करता है जो अन्य जानवरों में जीभ के पीछे से हाथों को जोड़ने वाली हड्डियों से जुड़ी रहती हैं। अब तक यह माना जाता था कि दोनों अंग की संरचना समान है। ये दोनों अंग अलग-अलग तरह से विकसित हुए हैं। लैरिंक्स मेसोडर्म और न्यूरल क्रेस्ट कोशिकाओं से बनता है, जबकि सिरिंक्स सिर्फ मेसोडर्म कोशिकाओं से बनता है।

क्लार्क और उनके साथियों का अनुमान है कि आधुनिक पक्षियों के पूर्वजों में लैरिंक्स मौजूद था। पक्षियों के आधुनिक रूप में आने के समय फेफड़ों के ठीक ऊपर श्वासनली की उपास्थि ने फैलकर सिरिंक्स का रूप ले लिया। हो सकता है कि इस प्रसार ने श्वासनली को अतिरिक्त सहारा दिया होगा। अंतत: इसमें मांसपेशियों के छल्ले विकसित हुए जिससे ध्वनि पैदा होती है। धीरे-धीरे ध्वनि उत्पादन का काम लैरिंक्स से हटकर सिरिंक्स के ज़िम्मे आ गया। सिरिंक्स विभिन्न तरह की ध्वनि निकालने के लिए अधिक उपयुक्त भी है।

सिरिंक्स की खासियत

सिरिंक्स की एक खासियत यह है कि यह दो भागों से बना है और पक्षी एक साथ दो तरह की ध्वनियां निकाल सकते हैं।

क्लार्क और उनके सहयोगियों ने अपने निष्कर्ष गत दिनों प्रोसीडिंग्स ऑफ दी नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित किए हैं।

सिरिंक्स विकास में एकदम नई संरचना है जिसमें पहले से मौजूद विशेषताओं या संरचनाओं से जुड़ी कोई स्पष्ट कड़ी नहीं हैं।

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन अन्य जीवों, जैसे कछुओं और मगरमच्छों की ध्वनि संरचना समझने में मददगार साबित हो सकता है।

(देशबन्धु)

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