70 वर्षों में भारत ने जो बनाया, उसे बेच रहे हैं प्रधानमंत्री: राहुल गांधी

राहुल गांधी ने कहा कि मैंने क्लीयरली (Clearly) अपनी इस पर पॉजिशन रखी है कि चाहे वो डिमोनेटाइजेशन हो, चाहे वो जीएसटी, फ्लॉड जीएसटी हो, चाहे वो किसान के कानून हों, ये सब इनफॉर्मल सेक्टर, एग्रीकल्चर सेक्टर, स्मॉल एंड मीडियम बिजनेस पर आक्रमण है और इसका लक्ष्य मोनोपली क्रियेशन है।
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भाजपा विधायक को चुआ से मिला नोटिस तो बोले राहुल गांधी – ये तो भाजपा के सबसे ईमानदार नेता हैं

Highlights of Special Press Briefing: राहुल गांधी प्रेस वार्ता- 24-08-2021

Rahul Gandhi, P. Chidambaram, KC Venugopal and Randeep Singh Surjewala addressed the media at Congress HQ., 24, Akbar Road, New Delhi, yesterday.

रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा, एक बहुत ही अत्यंत गंभीर और महत्वपूर्ण विषय लेकर राहुल गांधी जी और हम सब आपके बीच में उपस्थित हैं। आज विशेष अनुरोध मेरा ये रहेगा कि हम वो विषय जिसे विशेष तौर से आपको और देश को संबोधित करने के लिए राहुल गांधी जी आए हैं। आज हम हमारे प्रश्न वहीं तक रिस्ट्रिक्टेड रखेंगे, ताकि विषय की गंभीरता देश के सामने पहुंच सके।  

 राहुल गांधी ने कहा कि नरेन्द्र मोदी जी का एक और बीजेपी का एक नारा था – 70 साल में कुछ नहीं हुआ और कल फाइनेंस मिनिस्टर ने जो भी 70 साल में इस देश की पूंजी बनी थी, उसको बेचने का डिसीजन (decision) ले लिया है, मतलब प्रधानमंत्री ने सब कुछ बेचने की तैयारी कर ली है। अब मैं ये हिंदुस्तान के युवाओं से कहना चाहता हूंआपके हाथ से रोजगार छिना, कोरोना में आपकी मदद नहीं की। आपके जो किसान माता-पिता हैं, उनके खिलाफ 3 स्पेशल कानून बनाए। आज मैं यहाँ ये पढ़ना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री अपने मित्रों को हिंदुस्तान का क्या-क्या बेच कर दे रहे हैं। और इसको पढ़ने से आपको पता लग जाएगा, मुझे कहने की भी जरुरत नहीं होगी कि कौन सा एसेट किसको जा रहा है और ये जो सलेक्शन किया गया है, ये किन लोगों के लिए किया गया है और किस प्रकार से उनको फ्री गिफ्ट दिया जा रहा है।

तो शुरुआत करता हूं मैं:-

रॉड्स - 1.6 लाख करोड़ रुपए का गिफ्ट 26 हजार 700 किलोमीटर नेशनल हाईवे। रेलवे, जो इस देश की रीढ़ की हड्डी है, जिसके बिना भाइयों और बहनों देश के गरीब लोग एक शहर से दूसरे शहर में नहीं जा सकते। आज जो लोग ट्रेन में बैठे हैं, आप सुनिए, डेढ़ लाख करोड़ रुपए रेलवे - 400 स्टेशन, 150 ट्रेनें, रेलवे ट्रेक और वुडशेड्स और जो हमारे रेलवे के इम्पलॉई हैं, आप भी बात समझ लीजिए - जब ये रेलवे से छिन कर किसी प्राइवेट एंटिटी को दिया जाएगा, तो आप समझ लीजिए आपके रोजगार का क्या होने वाला है। मुझे समझाने की जरुरत नहीं है।

 उसके बाद स्पेशल गिफ्ट - पावर ट्रांसमिशन, 42,300 सर्किट किलोमीटर ऑफ ट्रांसमिशन  नेटवर्क। पावर जनरेशन 6,000 मेगावॉट, हाइड्रो सोलर विंड एसेट from NHPC, NTPC and NLC. नेशनल गैस पाइप लाइन, 8,000 किलोमीटर गेल की पाइप लाइन। किसको जा रहा है, आप जानते हो। पेट्रोलियम पाइप लाइन, 4,000 किलोमीटर- इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन एंड एचसीएल की पाइप लाइन। टेलीकॉम, 2.86 लाख किलोमीटर ऑफ भारत नेट फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क। बीएसएनएल एंड एमटीएनएल के टावर। वेयर हाउसिंग, किसान भाई, आप इसको अच्छी तरह सुनिए- वेयर हाउसिंग, 29,000 करोड़ रुपए की वेयर हाउसिंग- 210 लाख मैट्रिक टन फूड ग्रेन स्टोरेज। भाइयों और बहनों, आपको मालूम होगा कि ये 210 लाख मैट्रिक टन स्टोरेज किसको जा रही है। कहने की जरुरत नहीं है। माइनिंग, 160 कोल माइन्स। 761 मिनरल ब्लॉक। एयरपोर्ट, 21,000 करोड़- 25 एयरपोर्ट। किसको जा रहा है, आपको मालूम। पोर्ट 13,000 करोड़- 9 पोर्ट के 31 प्रोजेक्ट, किसको जा रहा है, आपको मालूम। स्टेडियम, 11,000 करोड़- दो नेशनल स्टेडियम।

अब देखिए, ये जो एसेट हैं, इनको बनाने में 70 साल लगे हैं और इनको बनाने में हिंदुस्तान की जनता ने लाखों-करोड़ रुपए अपना पैसा डाला है। ये पूरा का पूरा 3-4 लोगों के हवाले किया जा रहा है। आपसे कहा जा रहा है भाइयों और बहनों, क्या नाम दिया इसका - नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन। ये जो आपका भविष्य है, इसको बेचा जा रहा है, इन तीन-चार उद्योगपतियों को गिफ्ट दी जा रही है। ये रियलिटी है।

प्राइवेटाइजेशन के खिलाफ नहीं हैं राहुल गांधी

श्री गांधी ने कहा -

हम प्राइवेटाइजेशन के खिलाफ नहीं हैं। हमारा प्राइवेटाइजेशन का लॉजिक था। लॉजिक मैं आपको बता देता हूंसबसे पहले जो स्ट्रैटेजिक इंडस्ट्री हैं, उनको प्राइवेटाइज नहीं किया जाता था। इसमें से रेलवे स्ट्रैटेजिक इंडस्ट्री हम मानते थे। स्ट्रैटेजिक, क्योंकि ये हिंदुस्तान की रीढ़ की हड्डी है। स्ट्रैटेजिक, क्योंकि ये लाखों-करोड़ों लोगों को ट्रांसपोर्ट देती है। स्ट्रैटेजिक, क्योंकि इसमें बहुत सारे लोगों को इम्पलॉयमेंट (employment) मिलता है। इसलिए स्ट्रैटेजिक है।

 दूसरी बात, जो इंडस्ट्री करोनोक्ली लॉसमेकिंग होती थी, उनको हम प्राइवेटाइज करते थे। जिन कंपनियों के पास मिनिमम मार्केट शेयर होता था, उनको हम प्राइवेटाइज करते थे और उस सेक्टर में हम प्राइवेटाइज करते थे, जहाँ पर प्राइवेट सेक्टर की मोनोपली के रिस्क हों, मतलब अगर सरकारी कंपनी मोनोपली को रोक सकें, तो हम उसको प्राइवेटाइज नहीं कर सकते थे। अब यहाँ पर ये सारे के सारे प्राइवेटाइजेशन मोनोपली बनाने के लिए किए जा रहे हैं। सारे के सारे, मैंने आपको नाम दिए हैंपॉवर, टेलीकॉम, वेयर हाउसिंग, माइनिंग, एयरपोर्ट, पोर्ट, ये सब मोनोपली बनाने के लिए किया जा रहा है। आप जानते हो, पोर्ट किसके हाथ में है, एयरपोर्ट किसको जा रहे हैं।

हम कहते हैं प्राइवेटाइज कीजिए, मगर देश को नुकसान मत पहुंचाइए। देश को नुकसान कैसे होगा और जो देश के युवा हैं, आप इसको अच्छी तरह सुनिएजैसे ही ये मोनोपली बनती जाएंगी, वैसे ही उतनी ही रेट से आपको रोजगार मिलना बंद हो जाएगा। आप स्कूल में हों, कॉलेज में हों, इस देश में जो छोटे बिजनेस होते हैं, मिडिल साइज बिजनेस होते हैं, जो आपको रोजगार देंगे कल, वो सब बंद हो जाएंगे, खत्म हो जाएंगे। तीन-चार बिजनेस रहेंगे, इनको इम्पलॉयमेंट देने की कोई जरुरत नहीं रहेगी और आपको रोजगार नहीं मिलेगा।

मैंने कोरोना के बारे में बोला था, आप लोगों ने मजाक उड़ाया। ठीक है, मैं फिर से बोल रहा हूं और हिंदुस्तान का युवा, आप अच्छी तरह सुन लीजिए- जैसे ही ये होगा, वैसे आपको रोजगार मिलने का चांस खत्म हो जाएगा। ये हिंदुस्तान की पूंजी बेची जा रही है, ये आपके भविष्य पर आक्रमण है। नरेन्द्र मोदी जी अपने दो-तीन उद्योगपति मित्रों के साथ हिंदुस्तान के युवा पर आक्रमण कर रहे हैं। इसको आप अच्छी तरह समझिए।

एक अन्य प्रश्न पर कि ऐसे समय जब अर्थव्यवस्था चरमरा गई है, मंदी है, जब पूरा मूल्य नहीं मिलेगा, उस समय भी ऐसी क्या मजबूरी है कि इस तरह का बड़ा फैसला किया जा रहा है? श्री गांधी ने कहा कि ये आप स्टेटमेंट रख रहे हैं या आप सवाल पूछ रहे हैं? मगर मैं इसको स्टेटमेंट के तौर पर एक्सेप्ट करता हूं। स्टेटमेंट ये है कि इसके दो लक्ष्य हैं। एक लक्ष्य है कि अपने जो दो, तीन, चार मित्र हैं, उनको मोनोपली कंट्रोल अलग-अलग इंडस्ट्री में देना। दूसरा लक्ष्य हैजो मिसमैनेजमेंट के कारण चाहे वो कोविड मिसमैनेजमेंट हो, नोटबंदी हो, जीएसटी हो, सरकार के पास पैसे की जबरदस्त कमी है। तो दो लक्ष्य हैंपर जैसे चिदंबरम जी ने कहा, जो इससे मिलेगा, वो प्रॉब्लम सॉल्व (Problem solve) नहीं करेगा। क्योंकि प्रॉब्लम बहुत ज्यादा बड़ी है। तो मैन लक्ष्य इसका मोनोपली क्रियेशन है।

एक अन्य प्रश्न पर कि सरकार ने ये कहा है कि जिन संपत्तियों को हम बेचेंगे, जनता उसकी खुद मालिक होगी, हम मालिक नहीं होंगे? राहुल गांधी ने कहा कि ये कैसे, ये लॉजिक क्या है? अगर आपने किसी को बेच दिया, तो जनता मालिक कैसे रहेगी? आपने मुझे अपना घर बेच दिया और आप मालिक रह गए? कैसे हो सकता है?

एक अन्य प्रश्न पर कि क्या ये जनता को बरगलाने की कोशिश है? श्री राहुल गांधी ने कहा और क्या। अगर जनता के हाथ करना था, तो बेचने की क्या जरुरत? जनता के हाथ में तो है। पब्लिक सेक्टर है, उनके हाथ में है और किसके हाथ में है?

एक अन्य प्रश्न पर कि इससे रिजर्वेशन खत्म हो जाएगा, नौकरियां चली जाएंगी, जॉब बड़ा मुद्दा है? संबंध में पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री गांधी ने कहा कि Are you paying us a compliment, no because it says, if we are not going live, it means, we are saying the truth.

तो मैं बताता हूं आपको, देखिए, इससे काफी नॉक ऑन इफ्केट्स आएंगे। इस पर रिजर्वेशन का इफेक्ट होगा। इस पर जोब लोसेस का इफेक्ट होगा। इस पर अलग-अलग रिपरकशन्स  (Repercussions) आएंगे। उनको हम डिटेल में स्टडी करेंगे और हमने चिदंबरम जी से अभी बात की है कि इनको कांग्रेस पार्टी डिटेल में स्टडी करे और फिर अपनी पॉजिशन उन पर आपके सामने रखे।

एक अन्य प्रश्न पर कि कांग्रेस पार्टी कैसे इस मुद्दे को लेकर देशभर में जाएगी?  राहुल गांधी ने कहा कि मैंने क्लीयरली (Clearly) अपनी इस पर पॉजिशन रखी है कि चाहे वो डिमोनेटाइजेशन हो, चाहे वो जीएसटी, फ्लॉड जीएसटी हो, चाहे वो किसान के कानून हों, ये सब इनफॉर्मल सेक्टर, एग्रीकल्चर सेक्टर, स्मॉल एंड मीडियम बिजनेस पर आक्रमण है और इसका लक्ष्य मोनोपली क्रियेशन है।

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