कांग्रेस की नई संकटमोचक बनकर उभरी हैं प्रियंका

पिछले दिनों के कई घटनाक्रम पर नज़र डालें तो साफ नज़र आ रहा है कि प्रियंका गांधी ने राजस्थान, पंजाब और छत्तीसगढ़ में पार्टी की अंदरूनी राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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Priyanka Gandhi has emerged as the new troubleshooter of Congress

नई दिल्ली, 28 अगस्त 2021. कांग्रेस महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी वाड्रा पार्टी के अंदर नई संकटमोचक की भूमिका में नज़र आ रही हैं। पिछले दिनों के कई घटनाक्रम पर नज़र डालें तो साफ नज़र आ रहा है कि प्रियंका ने राजस्थान, पंजाब और छत्तीसगढ़ में पार्टी की अंदरूनी राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रियंका गांधी वाड्रा शुक्रवार को भूपेश बघेल से मुलाकात के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ से राहुल गांधी के आवास 12 तुगलक रोड गईं थीं। तीन घंटे की बैठक के बाद, छत्तीसगढ़ में यथास्थिति बनी हुई थी और राज्य में नेतृत्व परिवर्तन पर कोई बात नहीं हो रही है।

प्रियंका को 10 जनपथ से बाहर निकलते हुए और राहुल गांधी के आवास में जाने और वहां से आने के दौरान देखा गया। संभवत: किसी मध्यमार्ग का रास्ता तैयार किया गया है, लेकिन किसी भी फॉर्मूले की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी रोटेशनल मुख्यमंत्री पद पर कोई जवाब नहीं दिया।

यूपी ने बचाई बघेल की गद्दी

राजनीतिक गलियारों में कहा जा रहा है कि प्रियंका गांधी के हस्तक्षेप और भूपेश बघेल की उत्तर प्रदेश में भागीदारी ने उनकी गद्दी बचा ली। बघेल के श्रीमती गांधी के साथ अच्छे संबंध हैं क्योंकि भूपेश बघेल की टीम द्वारा राज्य के लगभग 50 लोगों को कैडर को प्रशिक्षित करने के लिए यूपी में रखा जा रहा है और हाल ही में रायपुर में यूपी के लगभग 100 कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया था।

बघेल ने यूपी में सभी संसाधनों को लगाया है, इससे पहले वह असम विधानसभा चुनाव के प्रचार प्रभारी थे।

यह पहली बार नहीं है जब प्रियंका गांधी ने महत्वपूर्ण निर्णय लेने की प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया है, उन्होंने नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में नियुक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इससे पहले जब सचिन पायलट ने जुलाई 2020 में विद्रोह का नेतृत्व किया तो यह प्रियंका गांधी थीं जिन्होंने पिछले साल राजस्थान में पायलट को शांत किया और सरकार को बचाया, हालांकि, वह ज्योतिरादित्य सिंधिया के विद्रोह को रोकने में असमर्थ थीं, जिसके कारण मध्य प्रदेश में सरकार गिर गई। जबकि उनके साथ काम करने वाले जितिन प्रसाद भी चले गए और भाजपा में शामिल हो गए।

सिंधिया जहां केंद्रीय मंत्री हैं, वहीं जितिन प्रसाद को जल्द ही इनाम मिलने की उम्मीद है।

शुक्रवार को भूपेश बघेल ने राहुल गांधी के साथ तीन घंटे की बैठक की, जिसके बाद बघेल ने कहा कि उन्होंने गांधी को राज्य का दौरा करने के लिए आमंत्रित किया है।

उन्होंने कहा, "मैंने उन्हें हर चीज से अवगत कराया है और राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा की है.. राहुल गांधी से छत्तीसगढ़ आने का अनुरोध किया है।"

बैठक के बाद बघेल अपने समर्थन में डेरा डाले हुए विधायकों से मिलने पार्टी मुख्यालय अकबर रोड गए थे।

इतना ही नहीं सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि असम चुनाव में सुष्मिता देव को किनारे करने का फैसला भी प्रियंका की सलाह पर लिया गया क्योंकि यह संकेत मिल गए थे कि अगर सुष्मिता को तरजीह दी गई तो कांग्रेस को असम में तो नुकसान होगा ही और बाद में सुष्मिता पाला भी बदल लेंगी।

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