किसान पहुंचे संसद तो जस्टिस काटजू बोले, वे वहां क्या करेंगे? 'इंकलाब जिंदाबाद' या 'भारत माता की जय' के नारे लगाएंगें?

दिल्ली की सीमाओं पर जारी किसान आंदोलन के दौरान 200 किसानों के संसद भवन पहुंचने की ख़बरें हैं। इस खबर पर सर्वोच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने व्यंग्य किया है
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काटजू कहिन : देश का नेता कैसा हो ? अजित पवार जैसा हो, देश के लिए सिरदर्द बन गए हैं महाराष्ट्रीयन राजनेता
 नई दिल्ली, 22 जुलाई 2021. दिल्ली की सीमाओं पर जारी किसान आंदोलन के दौरान 200 किसानों के संसद भवन पहुंचने की ख़बरें हैं। इस खबर पर सर्वोच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू (Justice Markandey Katju, retired Supreme Court judge) ने व्यंग्य किया है।

जस्टिस काटजू ने अपने सत्यापित फेसबुक पेज पर अंग्रेज़ी में छोटी सी पोस्ट लिखी।

उन्होंने लिखा -

"तो 200 किसान जंतर-मंतर पहुंच चुके हैं।

लेकिन वे वहां क्या करेंगे? 'इंकलाब जिंदाबाद' या 'भारत माता की जय' के नारे लगाएंगें?

मेरा सुझाव है कि उन्हें गांधीजी की तरह 'आमरण अनशन' करना चाहिए। जिससे भारत को आजादी मिली।

या फिर उन्हें वही करना चाहिए जो इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वकीलों ने किया था जब मैं वहां वकील था, उच्च न्यायालय की पश्चिमी यूपी पीठ की स्थापना का विरोध करने के लिए।

वकीलों ने उच्च न्यायालय परिसर में एक 'अग्निकुंड' खोदा, उसमें लकड़ी के लट्ठे डाल दिए, आग लगा दी और उसमें कूदने की धमकी दी (बेशक उनमें से कोई भी नहीं कूदा, लेकिन चाल काम कर गई, और बेंच नहीं बनाई गई) ."

(So 200 farmers have reached Jantar Mantar.

But what will they do there ? Shout ‘Inquilab Zindabad’ or ‘Bharat Mata ki Jai’ ?

I suggest they should go on ‘aamaran anshan’, like Gandhiji. That gave India independence.
Or selse they should do what the Allahabad High Court lawyers did when I was a lawyer there, for opposing setting up a Western UP bench of the High Court. 
The lawyers dug an ’agnikund’ in the High Court premises, put logs of wood in it, set it ablaze, and threatened to jump into it ( of course none of them jumped, but the trick worked, and the bench was not created ).)

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