मॉब लिंचिंग के खिलाफ़ सिर्फ़ कांग्रेस बोलती है, अखिलेश-माया रहते हैं चुप- शाहनवाज़ आलम

अखलाक हत्या कांड पर अखिलेश यादव का मुस्लिम विरोधी चेहरा ख़ुद आज़म खान कर चुके हैं बेनक़ाब. स्पीक अप माइनॉरिटी #11 में बोले अल्पसंख्यक कांग्रेस नेता
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पीड़ा स्थल को पर्यटन स्थल समझ रही है सपा, अखिलेश ने मुसलमानों के जले पर नमक छिड़का : शाहनवाज आलम


अखिलेश जी पूर्ण बहुमत की सरकार के बावजूद मॉब लिंचिंग के खिलाफ़ क़ानून बनाने का प्रस्ताव तक नहीं लाए

राजस्थान की गहलोत सरकार ने 2019 में ही मॉब लिंचिंग के खिलाफ़ क़ानून बनाने के लिए प्रस्ताव पास कर राष्ट्रपति को भेज दिया था

अखलाक हत्या कांड पर अखिलेश यादव का मुस्लिम विरोधी चेहरा ख़ुद आज़म खान कर चुके हैं बेनक़ाब

स्पीक अप माइनॉरिटी #11 में बोले अल्पसंख्यक कांग्रेस नेता

लखनऊ 29 अगस्त 2021। देश में बढ़ती मॉब लिंचिंग की घटनाओं में संघ और भाजपा के लोग शामिल हैं। ये एक तरह से भाजपा की चुनावी अभियान की शुरुआत है। यह दुखद है कि सपा और बसपा इन मुद्दों पर खामोश रहती हैं। सिर्फ़ कांग्रेस ही आवाज़ उठाती है।

अल्पसंख्यक कांग्रेस द्वारा हर रविवार को फेसबुक लाइव के ज़रिये होने वाले स्पीक अप के ग्यारहवीं कड़ी में अल्पसंख्यक कांग्रेस नेताओं ने ये बातें कहीं।

अल्पसंख्यक कांग्रेस के प्रदेश चेयरमैन शाहनवाज़ आलम ने जारी बयान में कहा कि आज अल्पसंख्यक कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अपने उद्बोधन में बताया कि कैसे दादरी के अखलाक कांड पर तत्कालीन मुख्यमन्त्री अखिलेश यादव ने उनके हत्यारों के खिलाफ़ कमज़ोर मुकदमा दर्ज करवाया और लचर विवेचना करवाई। ताकि हत्यारे छूट जाएं। स्थिति यहाँ तक पहुँच गयी थी कि तत्कालीन कैबिनेट मंत्री आज़म खान को भी अखिलेश यादव सरकार पर भरोसा नहीं था और वो इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में उठाने की बात सार्वजनिक तौर पर करने लगे थे। जो अखिलेश यादव सरकार की घोर मुस्लिम विरोधी मानसिकता को दर्शाता करता है।

शाहनवाज़ आलम ने कहा कि स्पीक अप में यह भी बताया गया कि अखिलेश यादव ने पूर्ण बहुमत वाली सरकार चलाने के बावजूद मॉब लिंचिंग के खिलाफ़ विधान सभा में कोई कानून बनाने तक कि कोशिश नहीं की। जबकि कांग्रेस की राजस्थान सरकार ने 2019 में ही विधानसभा से इसके खिलाफ़ क़ानून बनाने के लिए प्रस्ताव पास कर राष्ट्रपति को भेज दिया था।

उन्होंने यह भी कहा कि जहाँ भी ऐसी घटनाएं होती हैं सिर्फ़ कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता ही इसके खिलाफ़ सड़क पर उतरते हैं, अखिलेश और मायावती चुप रहते हैं।

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