महाराजा द्वारा 1927 में बनाए गए जम्मू-कश्मीर ‘स्थायी निवासी कानून‘ को संसद बदल नहीं सकती-भीम सिंह

Parliament cannot change the Jammu and Kashmir 'Permanent Resident Act' made by the Maharaja in 1927 - Bhim Singh
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Parliament cannot change the Jammu and Kashmir 'Permanent Resident Act' made by the Maharaja in 1927 - Bhim Singh

नई दिल्ली, 11 सितंबर 2021 जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के अध्यक्ष, सर्वोच्च न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं एक जानेमाने संवैधानिक वकील प्रो. भीम सिंह ने कहा कि 1927 की अधिसूचना को 1932 में महाराजा हरि सिंह द्वारा संशोधित किया गया था। इस 1927 के कानून को ‘स्टेट सब्जेक्ट‘ कहा गया, जिसे 1949 में भारत की संविधान सभा द्वारा स्वीकार किया गया था और संविधान में अस्थायी प्रावधान बना रहा। प्रो. भीम सिंह ने भारत की संसद को जम्मू-कश्मीर के शासकों द्वारा बनाए गए कानून को खत्म करने के लिए चुनौती दी है।

संविधान व मौलिक अधिकारों पर जिसे जम्मू-कश्मीर में वैध कानूनों के रूप में पेश किया गया था तथा संसद 19271932 की अधिसूचनाओं को नहीं बदल सकती। यह जम्मू-कश्मीर के महाराजा का यहां के निवासियों को एक महान धर्मनिरपेक्ष संदेश था। महाराजा हरिसिंह द्वारा हस्ताक्षरित अधिसूचना ने भारतीय संविधान के अध्याय-3 में निहित जम्मू-कश्मीर में रहने वाले भारतीय नागरिकों को पूर्ण मौलिक अधिकार प्रदान किए। यह जम्मू-कश्मीर के शासकों की एक महान धर्मनिरपेक्ष नीति को दर्शाता है, जो भारत में संविधान निर्माताओं से भी अछूता नहीं रहा।

 1947 में कश्मीरी मुस्लिम समुदाय ने पाकिस्तान के द्वि-राष्ट्र सिद्धांत को खारिज करके भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्षता को जीवित रखते हुए एक महान व शानदार भूमिका निभाई है, जो समाजवादी, लोकतांत्रिक व धर्मनिरपेक्ष संविधान का संदेश है। वही यह संदेश है जिसे महाराजा हरिसिंह की 19271932 की अधिसूचनाओं को संविधान बनाते समय भारतीय संविधान में अपनाया गया है।

प्रो. भीम सिंह ने आज संसद में बैठे कानून निर्माताओं को भारत के संविधान की भावनाओं को बहाल करने के लिए संवैधानिक लड़ाई में शामिल होने का आह्वान किया।

प्रो. भीम सिंह ने कहा कि संसद के कानून निर्माताओं ने वास्तव में जम्मू-कश्मीर के शासकों द्वारा बनाए गए कानूनों को नहीं बदलने का फैसला किया। उन्होंने आज संसद सदस्यों से अपील की कि वे 5 अगस्त, 2019 को संविधान सभा द्वारा स्वीकृत कानूनों को बदलकर बनाए गए कानून पर पुनर्विचार करें। यदि विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठ प्रमुख नेताओं ने महाराजा की 1932 की अधिसूचना को बने रहने देने का निर्णय लिया था, तो 5 अगस्त, 2019 में संसद ने अपना विचार बदलने का क्या कारण है, जिसकी संसद को कोई संवैधानिक शक्ति नहीं थी।

प्रो. भीम सिंह ने सभी राजनीतिक दलों के संसद सदस्यों को इस स्थिति का अध्ययन और संसद में 5 अगस्त, 2019 को स्वीकृत आदेश पर पुनर्विचार करने की अपील की।

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