सपा पर इतना हमलावर क्यों है कांग्रेस ?

 हालत यह है कि अखिलेश यादव को सार्वजनिक तौर पर कहना पड़ा कि कांग्रेस की लड़ाई हमसे है या भाजपा से? अखिलेश के इस सवाल पर भी कांग्रेस ने पलटवार किया और उनसे ही पूछ लिया कि राजनीति ट्विटर पर करनी है या सड़क पर ?
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Akhilesh Yadav Priyanka Gandhi अखिलेश यादव प्रियंका गांधी
लखनऊ, 02 सितंबर 2021. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक है। ऐसे में कभी साथ रहे यूपी के दो लड़कों की पार्टियां आमने सामने आ गई हैं। जी हां राहुल गांधी की कांग्रेस और अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी विधानसभा चुनाव से पहले आमने सामने आ गई हैं।

हालत यह है कि अखिलेश यादव को सार्वजनिक तौर पर कहना पड़ा कि कांग्रेस की लड़ाई हमसे है या भाजपा से? अखिलेश के इस सवाल पर भी कांग्रेस ने पलटवार किया और उनसे ही पूछ लिया कि राजनीति ट्विटर पर करनी है या सड़क पर ?

दरअसल समाजवादी पार्टी की असली ताकत सूबे का लगभग 18 प्रतिशत मुसलमान है, जो कभी कांग्रेस का कोर वोटर हुआ करता था। इसी वोट की वजह से कांग्रेस पर तुष्टिकरण के आरोप लगते रहे और यूपी में मुसलमान सपा में चला गया, जिसका नतीजा है कि यूपी में भाजपा भी मजबूत हो गई। अगर यह 18 प्रतिशत मुसलमान कांग्रेस में लौट जाता है तो यूपी में लड़ाई कांग्रेस और भाजपा के बीच हो जाएगी। इसीलिए कांग्रेस इस समय सपा पर ज्यादा हमलावर है।

अब अल्पसंख्यक कांग्रेस प्रदेश चेयरमैन शाहनवाज़ आलम ने कहा है कि जो अखिलेश यादव अपने संसदीय सीट आजमगढ़ में सीएए-एनआरसी विरोधी आंदोलन में पुलिस दमन की शिकार महिलाओं से मिलने तक नहीं गए उनके इस बयान पर कोई यकीन नहीं करेगा कि सपा सरकार में आने पर इन मुकदमों को वापस ले लेगी।

शाहनवाज़ आलम ने कहा कि प्रदेश का मुसलमान जान चुका है कि जो सपा अपने संस्थापक नेता आज़म खान के मुकदमों की पैरवी नहीं कर सकती वो आम मुसलमानों पर से मुकदमें हटाने की बात करके सिर्फ़ लोगों को गुमराह करना चाहती है।

शाहनवाज़ आलम ने कहा कि मुसलमान भूला नहीं है कि 2012 विधान सभा चुनाव के घोषणापत्र में भी सपा ने वादा किया था कि सरकार बनने पर बेगुनाह मुसलमानों पर से मुकदमे हटा लेगी। लेकिन मुख्यमंत्री बनते ही अखिलेश यादव अपने वादे से मुकर गए थे।

शाहनवाज़ आलम ने कहा कि मुसलमान जानता है कि जब सीएए- एनआरसी विरोधी आंदोलन में लोग मारे जा रहे थे तब सिर्फ़ प्रियंका गांधी ही सड़क पर उतरी थीं। यहाँ तक कि अखिलेश यादव अपने संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ भी पीड़ितों से मिलने नहीं गए। वहाँ पर भी प्रियंका गांधी ही गयीं।

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