भारतीय समाज में आधुनिकता और पारंपरिकता के बीच द्वंद्व : क्या है समाधान ?

भारतीय समाज में आधुनिकता और पारंपरिकता के बीच द्वंद्व के कारण, हिंदुस्तान में बच्चियों को बरगलाने में करीबी रिश्तेदारों की भूमिका, हमारे समाज में सुधार कैसे है, हमारी सोच में सुधार कैसे हो
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Swami Atmo Vishwas स्वामी आत्म विश्वास (महेश चंद्र पुरोहित)

 The conflict between modernity and traditionalism in Indian society: What is the solution?

हमारा भारतीय समाज एक ऐसे द्वंद्व के वातावरण में जी रहा है जिससे आधुनिकता और पारंपरिकता के बीच में द्वंद्व मचा हुआ है। न तो हम पूर्ण आधुनिक हो पा रहे हैं और न ही हम अपनी परंपराओं को छोड़ पा रहे हैं परंपराओं को हमें नहीं छोड़ना है परंतु परंपराओं में जो बुराइयां समाहित हो गई हैं, जिससे न तो हम अपनी पूर्ण रूप से परंपराओं को निभा पा रहे हैं और न ही हम आधुनिक हो पा रहे हैं, उनको छोड़ना होगा।

फिल्म इंडस्ट्री को दोष क्यों... Why blame the film industry

हम किसी फिल्म इंडस्ट्री को भी दोष नहीं दे सकते हैं क्योंकि  वह भी हमारे समाज का आईना है हमारे समाज में जो परंपराएं जो रीति नीति जो रिवाज जो विचारधारा पनप रही है उसी का प्रति रूपम, उसी का प्रदर्शन मात्र वह करते हैंक्योंकि जो बिकता है वही सिकता है और जो सिकता है वही बिकता है।

हम मीडिया के आधुनिक संसाधनों को दोष भी नहीं दे सकते हैं, क्योंकि वह हमारे समाज के आईने को ही प्रदर्शित करते हैं हम उन्हें देखना चाहते हैं इसलिए वह हमें दिखाना चाहते हैं। हम यह नहीं कह सकते कि उन्होंने हमारी संस्कृति को नष्ट किया है, दूसरे शब्दों में हम यह कह सकते हैं कि हम ने ही हमारी संस्कृति को नष्ट किया है।

Let us accept only the reality from our stereotypes

हम हमारी रूढ़ियों में से केवल यथार्थ को ही स्वीकार करें और अन्य ढकोसला बाजी को दूर फेंक दें तो हमारे समाज में सुधार हो सकता है। हमारी सोच में सुधार हो सकता है।

Getting married early is not a solution

हम अभी इस संघर्ष में हैं कि हम आधुनिकता की दौड़ और पारंपरिकता की दौड़ के बीच में लटक रहे हैं। इसके लिए पूर्ण शिक्षा दीक्षा की आवश्यकता होती है और हमारा भारत एक गर्म देश है इसलिए यहां पर सेक्सुअल परिपक्वता अन्य ठंडे देशों की तुलना में शीघ्र होती है। शीघ्र विवाह कर देना कोई समाधान नहीं है क्योंकि समझ की परिपक्वता ही नहीं आती है समझ ही नहीं आती है। गाड़ी ट्रेक से उतरने से पहले स्त्री पुरुष के आकर्षण को समझना होगा। शिक्षित होना होगा। हमारी रूढ़ियां और अंधविश्वास इसमें रोड़ा अटकाते हैं।

लोग बच्चों को फोन देने से रोकना भी नहीं चाहते हैं और इंटरनेट पर जो सामग्री उपलब्ध है उससे बचना भी चाहते हैं। यही तो द्वंद्व है, और इसका असली समाधान है उन चीजों से वाकिफ हो जाना जो चीजें आकर्षण पैदा करती हैं। उसको समझना होता है उसका भला बुरा समझ लेना आवश्यक है।

Role of close relatives in luring girls in India

बरसों पहले एम्स के निदेशक ने यह कहा था कि हिंदुस्तान में बच्चियों को बरगलाने में करीबी रिश्तेदारों की भूमिका अधिक होती है। उन्होंने यह बात रिसर्च के आधार पर कही थी। बहुत से केस उठाकर देखेंगे तो उनमें रिश्तेदारों की भूमिका आपको अधिक मिलेगी। प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष। इसका कारण यही है कि समझ नहीं होती और शिक्षा का अभाव होता है यदि हम आधुनिकता के संसाधनों का प्रयोग करते हैं तो हमें आधुनिक शिक्षा को भी पूर्ण रूप से ग्रहण करना होगा हमारी परम्परा भी अपनानी होगी और परंपराओं में जो कुरीतियां समाहित हो गई है उनको निकालना होगा। इसके लिए घर के सभी बड़े सदस्यों को भी इसी विचारधारा से जीना होगा ताकि उस माहौल में परवरिश हो। जिस दिन बच्चे बच्चियां अपना भला-बुरा स्वयं समझने के लायक हो जाएंगे उस दिन यह घटनाएं भी रुक जाएगी।

स्वामी आत्म विश्वास (महेश चंद्र पुरोहित)

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