प्रवासी मजदूरों की कोई सूची नहीं और न ही कोई ठोस कार्यक्रम- रिहाई मंच

No list of migrant laborers nor any concrete program – Rihai Manch

आज़मगढ़ 30 अप्रैल 2020। केंद्र सरकार ने विभिन्न राज्यों और महानगरों में फंसे हुए प्रवासी मजदूरों को संबंधित राज्यों तक जाने की अनुमति दे दी है। लेकिन अब तक मजदूरों के पंजीकरण की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है और न ही सरकार के पास उनकी कोई सूची है। सरकार अब तक प्रवासी मजदूरों और उनके परिवार को राशन उपलब्ध करवाने का दावा करती रही है लेकिन सच्चाई यह है कि सरकार के पास अब तक ऐसे मजदूरों का कोई डाटा मौजूद नहीं है।

रिहाई मंच संयोजक मसीहुद्दीन संजरी ने कहा कि अगर सरकार इस कार्यक्रम को लेकर गंभीर है तो सबसे पहले उसे फंसे हुए प्रवासी मजदूरों का जिलावार पंजीकरण शुरू करना चाहिए। ऐसे मजदूरों की सही संख्या की जानकारी के बाद ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि बस द्वारा मजदूरों को घर भेजने की योजना कितनी व्यावहारिक है।

गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान से यूपी, बिहार, बंगाल तक बस द्वारा सोशल डिस्टानसिंग का ध्यान रखते हुए लाखों मजदूरों को भेजने में कितना समय लगेगा, इस पर विचार करने की जरूरत है। सरकार ने जल्दबाजी में यह निर्णय ले तो लिया लेकिन जिस तरह से वह लाखों प्रवासी मजदूरों को भेजने की बात कर रही है, वह व्यवहारिक नहीं है। इस प्रक्रिया में कई महीने लग जाएंगे।

रिहाई मंच नेता तारिक शफीक ने कहा कि सरकार ने इस पर कोई होम वर्क नहीं किया है। एक और महत्वपूर्ण मामला उनके सुरक्षित घर पहुँचने का है ताकि वे खुद भी संक्रमित न रहें और उनकी वजह से परिवार और आसपास के लोग भी सुरक्षित रहें। लक्षणविहीन संक्रमितों का मामला सामने आने के बाद प्रवासी मजदूरों का बिना कोरोना टेस्ट किए उनके घर भेजना बहुत जोखिम भरा है। इसलिए घर भेजे जाने वाले सभी प्रवासी मजदूरों का कोरोना टेस्ट होना अनिवार्य होना चाहिए।

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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