सत्य और संघर्ष से बनी व्यास की आत्मकथा

Non-fiction writing is now the mainstream of Indian literature

जयपुर में हुआ डॉ सत्यनारायण व्यास की आत्मकथा क्या कहूं आज विमोचन

जयपुर। कथेतर लेखन अब भारतीय साहित्य की मुख्य धारा है जिसमें हमारे युग की सच्चाई बोल रही है। कवि-लेखक डॉ सत्यनारायण व्यास की आत्मकथा ‘क्या कहूं आज’ केवल साधारण मनुष्य की सच्चाई और संघर्ष की दास्तान नहीं है बल्कि इसमें लंबे दौर के जीवन अनुभवों को देखा जा सकता है।

उक्त विचार वरिष्ठ आलोचक और साहित्यकार डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ने राजस्थान विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित विमोचन समारोह में व्यक्त किए।

डॉ अग्रवाल ने कहा कि महाविद्यालयी शिक्षक के खरे अनुभव भी इस आत्मकथा को विशिष्ट बनाते हैं।

समारोह में दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी अध्यापक और बनास जन के संपादक पल्लव ने आत्मकथा की कसौटियों की चर्चा करते हुए कहा कि हिंदी में कथेतर लेखन की व्यापकता से साहित्य में लोकतंत्र की वृद्धि हुई है। उन्होंने व्यास के जीवन संघर्ष की सच्चाई को होरी के स्वप्न से जोड़ा।

पल्लव ने कहा कि आत्म स्वीकार की उदात्तता और प्रांजल गद्य के सहकार से यह कृति पठनीय बन गई है।

राजस्थान विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में सहायक आचार्य जगदीश गिरी ने इस आत्मकथा के महत्त्वपूर्ण प्रसंगों को सुनाते हुए कहा कि इसमें निजी संवादों में आए राजस्थानी के अनेक वाक्यों को जस का तस पढ़ना डॉ व्यास की लेखनी का कौशल है। उन्होंने पुस्तक में आए बचपन, कोर्ट कचहरी और दैनंदिन कामकाज के संघर्ष के दृश्यों की भी सराहना की।

मुख्य अतिथि महाराजा कालेज के पूर्व प्राचार्य प्रो एस के मिश्र ने कहा कि रसायन शास्त्र के विद्यार्थी होने पर भी वे साहित्य की इस कृति को मिलते ही पढ़ गए। प्रो

मिश्र ने एक अध्यापक के रूप में डॉ व्यास की निष्ठा और प्रतिबद्धता को अनुकरणीय बताते हुए कहा कि इस बात पर भी शोध होना चाहिए कि कालेज में प्रवेश ले लेने के बाद भी कक्षाओं में विद्यार्थी क्यों नहीं आते।

समारोह में वरिष्ठ आलोचक मोहन श्रोत्रिय, सुपरिचित कवि नन्द भारद्वाज, विख्यात कवि चिंतक सदाशिव श्रोत्रिय, श्रीमती चंद्रकांता व्यास ने भी कृति के सम्बन्ध में अपने विचार व्यक्त किए। लेखकीय वक्तव्य में डॉ व्यास ने कहा कि स्वाभिमान और संघर्ष से पीछे न हटने की प्रवृत्ति के संस्कार उन्हें अपनी मां से मिले।

विभाग की अध्यक्ष डॉ श्रुति शर्मा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और डॉ व्यास का शाल ओढ़ाकर अभिनन्दन किया। संयोजन कर रही विभाग की डा तारावती मीणा ने कृति के मुख्य अंशों का वाचन किया।

समारोह में नगर के जाने माने लेखक डॉ हेतु भारद्वाज, हरीश करमचंदानी, शैलेन्द्र चौहान, राघवेन्द्र रावत, संदीप मील, राजस्थान लेखा सेवा के हरीश लड्ढा सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित थे। अंत में विभाग की तरफ से डॉ उर्वशी शर्मा ने आभार व्यक्त किया।

डॉ विशाल विक्रम सिंह

Donate to Hastakshep
नोट - हम किसी भी राजनीतिक दल या समूह से संबद्ध नहीं हैं। हमारा कोई कॉरपोरेट, राजनीतिक दल, एनजीओ, कोई जिंदाबाद-मुर्दाबाद ट्रस्ट या बौद्धिक समूह स्पाँसर नहीं है, लेकिन हम निष्पक्ष या तटस्थ नहीं हैं। हम जनता के पैरोकार हैं। हम अपनी विचारधारा पर किसी भी प्रकार के दबाव को स्वीकार नहीं करते हैं। इसलिए, यदि आप हमारी आर्थिक मदद करते हैं, तो हम उसके बदले में किसी भी तरह के दबाव को स्वीकार नहीं करेंगे। OR
उपाध्याय अमलेन्दु:

View Comments (0)

Related Post
Leave a Comment
Recent Posts
Donate to Hastakshep
नोट - हम किसी भी राजनीतिक दल या समूह से संबद्ध नहीं हैं। हमारा कोई कॉरपोरेट, राजनीतिक दल, एनजीओ, कोई जिंदाबाद-मुर्दाबाद ट्रस्ट या बौद्धिक समूह स्पाँसर नहीं है, लेकिन हम निष्पक्ष या तटस्थ नहीं हैं। हम जनता के पैरोकार हैं। हम अपनी विचारधारा पर किसी भी प्रकार के दबाव को स्वीकार नहीं करते हैं। इसलिए, यदि आप हमारी आर्थिक मदद करते हैं, तो हम उसके बदले में किसी भी तरह के दबाव को स्वीकार नहीं करेंगे। OR
Donations