आत्महत्या नहीं, व्यवस्था बदलने की लड़ाई ही विकल्प है

आत्महत्या नहीं, व्यवस्था बदलने की लड़ाई ही विकल्प है

Not suicide, the only option is to fight to change the system

विशद कुमार

2 मार्च दोपहर एक बजे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ भवन (Allahabad University Students’ Union Building) पर इंक़लाबी छात्र मोर्चा से जुड़े छात्रों ने कल कर्नलगंज में बेरोजगारी से तंग आकर आत्महत्या करने वाली छात्रा मनीषा (Student Manisha who commits suicide due to unemployment) और पिछले दिनों सलोरी, छोटा बघाड़ा, शिवकुटी आदि डेलीगेसियों में आत्महत्या करने वाले प्रतियोगी छात्र- छात्राओं को मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई और सभा की गई।

सभा में वक्ताओं ने कहा कि, “इलाहाबाद में पिछले 30 दिनों में बेरोजगारी से तंग आकर करीब 15 से ज्यादे प्रतियोगी छात्र- छात्राओं ने आत्महत्या की है। इन आत्महत्याओं के लिए स्पष्ट तौर पर सरकार की जनविरोधी आर्थिक नीतियां जिम्मेदार हैं। इसलिए छात्र- छत्राओं को अपनी जान देने की जगह इस व्यवस्था को बदलने की लड़ाई लड़ना चाहिए। वक्ताओं ने यह भी कहा कि रोजगार दर तेजी से गिर रहा है। भारत सरकार रेलवे, हवाई अड्डे, पेट्रोलियम, एलआईसी, बैंक सहित 23 बड़े सरकारी उपक्रमों को निजी हाथों में बेच रही है। जिसकी वजह से नई वैकेंसियां नहीं आ रही हैं। बढ़ती बेरोजगारी से छात्र- छात्राएं असुरक्षा बोध का शिकार हो रहे हैं। फलस्वरूप वो आत्महत्या का रास्ता चुन रहे हैं। जबकि उन्हें आत्महत्या करने की जगह इस व्यवस्था को बदलने की लड़ाई लड़नी चाहिए”

श्रद्धांजलि सभा में मुख्य तौर पर विवेक, सोनू, विनय, पंकज, देवेंद्र, रघुवीर, उमेश, नीतीश, रितेश विद्यार्थी आदि शामिल थे।

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