Home » समाचार » तकनीक व विज्ञान » न्यूक्लिक एसिड स्टेनिंग डाई प्रौद्योगिकी उत्पादन के लिए हस्तांतरित
Science news

न्यूक्लिक एसिड स्टेनिंग डाई प्रौद्योगिकी उत्पादन के लिए हस्तांतरित

Nucleic Acid Staining Dye Technology Transferred to Production

नई दिल्ली, 12 मई: आणविक निदान (मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक- molecular diagnostics) और जीवन विज्ञान अनुसंधान में न्यूक्लिक एसिड स्टेनिंग डाई के विविध उपयोग (Various Uses of Nucleic Acid Staining Dye) होते हैं।

भारतीय वैज्ञानिकों ने विकसित किया है न्यूक्लिक एसिड स्टेनिंग डाई का किफायती विकल्प

डाई ग्रीनआर नामक इस न्यूक्लिक एसिड स्टेनिंग डाई वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की लखनऊ स्थित प्रयोगशाला केन्द्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीडीआरआई) द्वारा विकसित की गई है।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर ग्रीनआर की प्रौद्योगिकी व्यावसायिक उत्पादन के लिए उत्तर प्रदेश में पंजीकृत स्टार्ट-अप कंपनी, जीनटूप्रोटीन प्राइवेट लिमिटेड (जीपीपीएल) को हस्तांतरित की गई है।  

डाई ग्रीनआर को सीडीआरआई के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ अतुल गोयल ने संस्थान के एक औद्योगिक भागीदार बायोटेक डेस्क प्राइवेट लिमिटेड (बीडीपीएल), हैदराबाद के संयुक्त सहयोग से विकसित किया है।

डॉ गोयल ने बताया कि ग्रीनआर व्यावसायिक रूप से उपलब्ध डीएनए/आरएनए डाइज़ (रंजकों), जो वर्तमान में विदेशों से आयात किए जाते हैं, के लिए एक किफायती विकल्प है। यह जीनोमिक डीएनए, पीसीआर उत्पादों, प्लास्मिड और आरएनए सहित सभी न्यूक्लिक एसिड के साथ अच्छी तरह बंध सकता है, तथा नीली रोशनी या पराबैंगनी रोशनी के संपर्क में आने पर चमकने लगता है।

शोधकर्ताओं ने रीयल टाइम पीसीआर और डीएनए बाइंडिंग में इसके जैविक अनुप्रयोगों का अध्ययन किया है। डॉ गोयल ने बताया कि ग्रीनआर डाई के आणविक निदान (मोलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स) और जीवन विज्ञान अनुसंधान में विविध अनुप्रयोग हैं।

ग्रीनआर के रासायनिक संश्लेषण को डॉ गोयल की टीम में शामिल शोधकर्ताओं द्वारा मानकीकृत किया गया है, जिनमें शाज़िया परवीन और कुंदन सिंह रावत शामिल हैं।

जीपीपीएल की निदेशक डॉ श्रद्धा गोयनका की योजना ‘गो ग्रीनआर’ अभियान शुरू करने की है, जिसमें वह पूरे भारत के वैज्ञानिकों से उत्परिवर्तन कारक (म्यूटाजेनिक) एथिडियम ब्रोमाइड के उपयोग को ग्रीनआर डाई से बदलने का आग्रह करती है। उनका कहना है कि पारंपरिक डाई का यह विकल्प उपयोग में सुरक्षित है, और इसका निपटान आसानी से हो सकता है।

वह बताती हैं कि कंपनी ने अकादमिक और उद्योग क्षेत्र में शोधकर्ताओं के बीच इस उत्पाद का नमूना लेना शुरू कर दिया है।

डॉ गोयनका ने बताया कि इस उत्पाद को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।

सीएसआईआर-सीडीआरआई के निदेशक डॉ श्रीनिवास रेड्डी ने बताया कि पिछले पाँच वर्षों में सबसे लोकप्रिय डीएनए डाई – सायबर (एसवाईबीआर) ग्रीन ने इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी दर्ज करायी है।

डॉ रेड्डी ने कहा है कि स्वदेशी डाई ग्रीनआर के विकास से भारतीय शोधकर्ताओं को विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा बनाए गए महँगे आयातित रंजकों का विकल्प मिलेगा, जो देश को ‘आत्मनिर्भर भारत’ का लक्ष्य प्राप्त करने के करीब ले जाएगा।

(इंडिया साइंस वायर)

Topics: Csir-Cdri, Nucleic Acid Staining Dye, GreenR, National Technology Day, Biotechnology, Dna, Rna, Pcr

हमें गूगल न्यूज पर फॉलो करें. ट्विटर पर फॉलो करें. वाट्सएप पर संदेश पाएं. हस्तक्षेप की आर्थिक मदद करें

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

हमारे बारे में उपाध्याय अमलेन्दु

Check Also

Women's Health

गर्भावस्था में क्या खाएं, न्यूट्रिशनिस्ट से जानिए

Know from nutritionist what to eat during pregnancy गर्भवती महिलाओं को खानपान का विशेष ध्यान …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.