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अंबानी अडानी एस्सार को मुबारक कि डाउ कैमिकल्स का बजट लीक और नंगा सरेबाजार कारपोरेट राज!

अमेरिकी हुकूमत और अली बाबा चालीस लाख चोरों के राज में हमने लोकतंत्र के हजार टुकड़े कर दिये हैं ( बजट लीक )

महामहिम से निवेदन कि सत्र से पहले बेमतलब बजट सत्र का कर दें सत्रावसान (बजट लीक)। …और हो सके तो बसरा से बुलवा लें मियां मुस्तफा को, हज्जार टुकड़ों में कटी-फटी जम्हूरियत की लाश सिलकर दफीना का चाकचौबंद बंदोबस्त कर दें वे कि अलीबाबा और चालीस लाख चोरों के राज में हम दो बूंद आंसू बहा सकें कामरेड पानसरे को श्रद्धांजलि के साथ!
इतनी शर्मिंदगी है जश्न बैरीटोनमध्ये कि हम मुंह छुपा नहीं सकते कहीं।
इतना खून है चेहरे पर दिलो दिमाग से बह निकलते खून सैलाब कि सातों समुंदर का पानी कम होगा पाक साफ बच निकलने के लिए।
महामहिम माफ करना कि खून के कुछ छींटे इधर उधर होकर आपकी पोशाक में गिर ना जाये कहीं कि हम जानते हैं कि बारंबार पोशाक आवृत्ति का आपको कोई अभ्यास नहीं है और चार करोड़ से ज्यादा रकम पर नीलाम होने लायक आपकी नामावली फिलहाल कोई नहीं है। इसीलिए प्रथम नागरिक बाहैसियत बेहतर हो कि हमारी शर्मिदंगी और हमारे खून की लाज रखें और इस फरेबी तिलिस्म को दफनाने खातिर बसरा से मियां मुस्तफा को फौरन बुलवा लें।
कॉमरेड गोविंद पानसरे को लाल सलाम !
निशाना बनाए जाने के पंद्रह दिन पहले ही कॉमरेड गोविंद पानसरे को धमकियां मिली थीं कि वह नाथूराम गोडसे के खिलाफ़ बोलना बंद करें, नहीं तो…
http://www.hastakshep.com/oldhindi-news/nation/2015/02/21/%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%87
एक बेबस नागरिक की श्रद्धाजंलि आपको कि असमय कयामत के खिलाफ बोलकर आपने आखिरी वक्त लोकतंत्र की सेहत के लिए मौत का जाम पीने से परहेज न किया।
भीमताल में मोरारजी सरकार के पतन पर ब्रिटिश राज के कर्नल की विधवा ने जो कहा था एमए इंग्लिश के छात्र नौजवान पलाश से कि भारत के हज्जारों साल से गुलामी के अभ्यस्त लोग नागरिक नहीं हो सकते और लोकतंत्र क्या है, हरगिज नहीं समझ सकते, उनके लिए हुकूमत विदेशी जरूर चाहिए।
उनने कहा कि गुलामों के लिए कोई लोकतंत्र नहीं होता और तुम लोग तो हज्जारों साल से गुलाम हो। आजादी हजम नहीं कर सकते इंडिया वाले।
वही हकीकत लेकिन अब कयामत है।
अमेरिकी हुकूमत और अली बाबा चालीस लाख चोरों के राज में हमने लोकतंत्र के हजार टुकड़े कर दिये हैं।
महामहिम, सूंघ लीजिये हवाओं की कितनी सड़ांध है।
हमारे मोहल्ले में प्रोमोटर के बन रहे बहुमंजिली इमारत की पानी टंकी में मरे हुए कुत्ते की लाश सड़ती रही हफ्ते भर।
सांसें घुट रही थीं।
दरवाजे और खिड़कियां बंद।
रास्ते पर आवाजाही बंद।
दबी जुबान से भी कोई कुत्ते की मौत का जिक्र न कर रहा था कि कहीं वह हमारा घर भी बेघर कर न दे।
इंतजार करते रहे कि संडांध से वे खुद कब परेशां हो और कुत्ते की लाश वहां से हटा दें।
जब लिख रहा हूं, पड़ोस में हंगामा बरपा है।
एक स्त्री का रोज उत्पीड़न चालू है।
इस मोहल्ले के रोजमर्रे का पार्श्व संगीत है यह।
कितनी बार बीच में टपके, कोई असर लेकिन होता नहीं है।
रोज नये और नायाब तरीके उस स्त्री को पागल साबित कर घर से बाहर निकालने के। यह म्हारा समाज है। सभी स्त्रियां सती रूपकंवर हैं।
नारी की पूजा सर्वत्र वैदिकी रीति मुताबिक।
सर्वत्र दुर्गोत्सव।
सर्वत्र कालीपूजा।
सर्वत्र देवी जागरण मध्ये स्त्री उत्पीड़न।
सारे लोग खामोश हैं।
लाश भी निकलेगी खूनखराबे के बाद तो कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाही के लिए आगे बढ़ेगा नहीं। कानून और व्यवस्था का तकाजा यही है।
इसी मंजर में जीना मरना है।
यही हमारा धर्म है।
यही महारा मोक्ष है।
यही हमारा वजूद है।
बेपनाह खौफ का वह मंजर मेरा देश है।
बेइंतहा खामोशी है।
लोग बोलते बहुत हैं।
लोग कहते कुछ भी नहीं।
यही हमारा लोकतंत्र है।
शांतिपूर्ण मतदान है।
प्रचंड जनादेश है।
सर्वत्र खिला कमल कमल है।
बाकी फिर वही बिल्डर, माफिया कारपोरेट राज है।
हज्जारों टुकड़े में कटे फटे लोकतंत्र में हज्जारों लाखों टुकड़ों में बंटी अस्मिता अंध आवाम को मालूम है कि जम्हूरियत का इंतकाल हो गया है।
फट्टू हमारे हमवतन सेल्फी मुग्ध कालजयी आत्मरति निष्णात हमारे विद्वत जनों के चेहरे पर कोई खून का छींटा नहीं है और न कहीं है कत्ल का सूराग और न कही है कातिल का नामोनिशान। लापता है, बेपता है जिगर हमारा। दिलोदिमाग भी गायब है।
हवाओं में सड़ांध हैं महामहिम मुगलिया गार्डन के वसंत बहार में सड़ांध हैं। रायसीना तक सड़ांध है।
देश के लोगों में खौफ इतना बाबुलंद है कि किसी को हिम्मत नहीं है कि आवाज भी करें कि  इस संसद की सफाई सबसे पहले जरूरी है और सिरे से इस राज्यतंत्र को बदलने की सख्त जरूरत है।
कि महामहिम हज्जारों टुकड़ों में बंट गया यह देश जिसके आप प्रथम नागरिक हैं और हज्जारों टुकड़ों में बंटी लोकतंत्र की लाश अलीबाबा के खजाने की तलाश में मारे गये कासिम की है, जिसकी नींव पर बाबुलंद अलीबाबा का किस्सा ए गुल गुलिस्तान मुक्तबाजार है।
अंबानी अडानी एस्सार को मुबारक कि डाउ कैमिकल्स का बजट लीक और नंगा सरेबाजार कारपोरेट राज!
अब भी आंखों में उंगली करके बताना होगा कि अरुण जेटली की घोषणा कि सारे फैसले बजट के जरिये लागू नहीं होते, का आशय क्या है?
अब भी आंखों में उंगली डालकर साबित करना होगा कि राजकाज दरअसल माफिया बिल्डर प्रोमोटर कारपोरेट राज है? हिंदुत्व नहीं है कतई केसरिया?
अब भी आंखों में उंगली डालकर साबित करना होगा कि बगुला भगत विशेषज्ञ समुदाय, कौंसिल, आयोग इत्यादि में बैठे लोग सार्वजनिक क्षेत्रे के लोग नहीं, निजी कंपनियों के कारिंदे हैं?
अब भी साबित करना होगा कि बजट दरअसल डाउ कैमिकल्स और मनसैंटो के साथ साथ अलीबाबा और चालीस हज्जार चोरों का है?
अब भी आंखों में उंगली डालकर साबित करना होगा कि सुनामी और जनादेश, लगातार चुनाव प्रचार और दिग्विजयी अश्वमेध घोड़ों की टापों में बंधी खून की नदियां बहाती तलवारों की धार पर किसकी किसकी गरदनें हैं?
अब भी आंखों में उंगली डालकर साबित करना होगा कि नब्वे फीसद अज्ञात सूत्रों से हासिल राजनीति के मिलियनर बिलियनर सिपाहसालारों के बेपर्दा स्विसखातों पर ईमानदारी का परचम लहराते फानूस बहवा बेहया क्यों हैं?
अब भी आंखों में उंगली डालकर साबित करना होगा कि मंत्रालयों और सचिवालयों पर राज किसका है?
अब भी आंखों में उंगली डालकर साबित करना होगा कि बजट जैसा कुछ होता नहीं है और लोकलुभावन वायदों के अलावा जनता के हाथ लगता कुछ नहीं है पिछले तेइस साल से जो सिलसिला है वह बेमिसाल फर्जीवाड़ा है जम्हूरियत के नाम पर जम्हूरियत का निरंतर हो रहा कत्ल है?
इतने इतने घोटालों के पर्दाफाश का क्या हुआ हुजूर, बताइये।
इतने-इतने रक्षा सौदों के बाद फिर भी हमारे रणबांकुरे जवान सरहदों पर नहीं, सलवा जुड़ुम और आफसा के तंत्र-मंत्र के तहत जल जंगल जमीन से बेदखली के आपरेशन में शहादत देते हैं।
मध्यभारत के चप्पे चप्पे में देख लीजिये, झारखंड के कोने कोने में देख लीजिये, हिमालय में सर्वत्र देख लीजिये कि पूर्वोत्तर में तनिको झांक लीजिये कि सैनिक और अर्धसैनिक बल प्राकृतिक संसाधनों की लूटखसोट में लगी विदेशी देशी पूंजी के हितों के लिए कैसे लामबंद हैं। अब भी क्या साफ नहीं हुआ कि डाउ कैमिकल्स और एंडरसन के बचाव करने वाले लोगों का राजकाज अगर हिंदुत्व है,अगर धर्म है और राष्ट्रवाद है तो इन जुमलों में बह रही कयामत का भी अंदाजा लगाइये।
पलाश विश्वास

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