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अखिलेश ने कसी है उप्र की नौकरशाही पर नकेल

योगेश यादव
उत्तर प्रदेश की नौकरशाही किसी भी राजनैतिक व्यक्ति से ज्यादा तिकड़मी मानी जाती है। इस प्रदेश के नौकरशाह अपनी तिकड़म के बल पर बड़े-बड़े नेताओं को फाँस चुके हैं। भूत में यहाँ के नौकरशाहों ने सरकार गिराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कई मठाधीश नौकरशाह भी इसी प्रदेश की मिट्टी की पैदाइश हैं।
2012 के विधान सभा चुनाव के बाद जब युवा अखिलेश यादव इस प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो उनके ऊपर लोगों की उम्मीदों के साथ अपने घोषणा पत्र में किये गये वादों को पूरा करने लिये आज़ादी के पहले से बने एक चक्की रूपी व्यवस्था जो आम जन को घुमा- घुमा कर पीसने लिये विख्यात थी, उसकी मदद की दरकार थी। समझदार और लिखने पढ़ने वाले लोगो ने इस आने वाली चुनौती और और डर से अवगत करा दिया। युवा अखिलेश जो अति शौम्य राजनेता के रूप में जाने जाते हैं और पहली बार मुख्यमंत्री बने थे, के काम करने के तरीकों को देखें। कुछ ने जल्दी प्रतिक्रिया दी और शुरूआती छह महीनों में ही फैसला सुना दिया कि अखिलेश यादव फेल हो गये हैं। वहीं कुछ लोगो ने उन्हें और समय देने की बात कही। और जब अखिलेश यादव ने अधिकारियों के साथ दोस्ताना मैच खेला तो लोगों ने इसकी खूब आलोचना की और इसे कमजोरी बताया। इन सब से बेपरहवाह अखिलेश यादव ने अपने घोषणा पत्र में किये गये वादों को पूरा करने का कार्य पूरी तैयारी के शुरुआत किया तो अपनी आदत और नाम के मुताबिक प्रदेश के मठाधीश नौकरशाहों ने अपना दिमाग चलना शुरू किया जिससे जन कल्याण की कई योजनायों के क्रियान्वयन में देरी भी हुई। कई लोग इधर से उधर किये गये। कुछ दूर हुए, कुछ पास आये, कुछ छुट्टी पर गये। एक बार एक अधिकारी ने उनसे गलत घोषणा भी करवा दी और भर्ती के कुछ मामलो में अभी तक अड़ंगा लगाये हुए है। अखिलेश ने उन्हें जवाबदेह बनाने की कोशिश शुरू की। एक बार वह सारे जिम्मेदार लोगों को मीडिया के सवालों का जवाब देने के लिये सामने भी लाये। पर अब अखिलेश यादव ने दो साल पूरा होने के बाद इस नौकरशाही से 12 लाख बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता जो हर महीने उनके बैंक के खातो में सीधे जाता है, 14 लाख छात्रो को लैपटॉप जो कि दुनिया की सबसे बड़ी लैपटॉप खरीद योजना है, को पूरी पारदर्सिता के साथ सीधे छात्रों के हाथों में पहुँचाया।
उत्तर प्रदेश में करीब 15000 करोड़ रूपये का बाहरी निवेश प्रस्तावित है, मेट्रो लखनऊ में आईटी सिटी, स्टेडियम जैसे बड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी के साथ उनके बनकर तैयार होंने तक की व्यवस्था करा दी है, बिजली के कई कारखाने, किसानो को कई सुविधाये दी, खाद की उचित व्यवस्था कराई, कई नई दूध डेरियां बन खुल रही हैं, सिंचाई के लिये नहरो और राजकीय ट्यूबवेल का पानी मुफ्त किया, लड़कियों के लिये कन्या विद्याधन और हमारी बेटी उसका कल जैसी योजनाओं से आगे बढ़ने में मदद के साथ 1090 हेल्पलाइन शुरू कर उनकी सुरक्षा की व्यवस्था की। चिकित्सा के क्षेत्र में इस सरकार ने बेहतरीन कार्य किये हैं। 108 और 102 एम्बुलेन्स सेवा इस प्रदेश के लिये वरदान साबित हो रही है। एमबीबीएस की 500 सीटें बढ़ाई जो देश में सबसे ज्यादा हैं। कई नए मेडिकल कालेज शुरू किये। अब इतनी सारी योजनाओं के सफलता पूर्वक लागू होने के बाद अगर तटस्थ होकर देखना है तो इस समय उत्तर प्रदेश में नौकरशाही पर नकेल होने और उसके छटपटाहट में होने की बात साफ़ तौर पर समझ में आ सकती है। अखिलेश की कोशिश के बदौलत उत्तर प्रदेश के माहौल में बदलाव हुआ है समाजवादी पार्टी को इन योजनाओं का फायदा इस लोकसभा चुनाव में होगा। आने वाले समय में जब अखिलेश सीधे तहसील और थानों का दौरा कर वहां की कार्यप्रणाली दुरुस्त करेंगे तब उत्तर प्रदेश में वह वाकई में बदलाव का समय होगा।

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योगेश यादव, यूँ तो कम्प्यूटर इंजीनियर हैं लेकिन सोशल मीडिया में आकर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता बन बैठे।

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