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अब्दुल या विक्टर को क्यों नहीं भारत रत्न ?

सुनील कुमार

डॉ. सीएनआर राव (चिंमामणि नागेश रामचंद्र राव) व सचिन तेंदुलकर भारत रत्न देकर सम्मानित किया गया है। डॉ. सीएनआर राव इंदिरा गांधी से लेकर राजीव गांधी, एचडी देवगौड़ा, इन्द्रकुमार गुजराल और डॉ. मनमोहन सिंह के वैज्ञानिक सलाहाकर परिषद के अध्यक्ष रहे हैं। कुछ समाचार पत्रों में राव को मंगल अभियान का जनक भी कहा जाता रहा है।

सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट का ‘भगवान’ मानते हुये भारत रत्न दिया गया है। कहा जाता है कि सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट को महान बनाया है और देश को खास पहचान दिलायी है। सचिन कभी भारत के लिये नहीं खेले। वह जिस टीम में थे वह क्रिकेट टीम बीसीसीआई के अधीन होती है और बीसीसीआई एक स्वायत सेवी संस्था है। बीसीसीआई, तमिलनाडु सोसाइटीज रजिस्ट्रशन एक्ट के तहत रजिस्टर्ड है इस पर सरकार के कोई भी नियम कानून लागू नहीं होते हैं। भारतीय क्रिकेट टीम, 2013 तक जो टी शर्ट पहनती थी वह सहारा इंडिया कम्पनी का है जो कि देश के ‘सर्वोच्च न्यायलय’ के बार-बार कहने के बाद भी निवेशकों के 24 हजार करोड़ रु. अभी तक नहीं लौटा रही है। इसी तरह सचिन हमेशा ही कम्पनियों के मुनाफे के लिये विज्ञापन करते रहे हैं। कभी भी उन्होंने इस पर विचार नहीं किया कि जो वे विज्ञापन कर रहे हैं वे उनके फैन के लिये लाभकारी है या हानिकारक। पेप्सी जैसे हानिकार पेय का प्रचार करते हुये सचिन कहते हैं कि ‘दिल मांगे मोर’।

सीएनआर राव का मंगल अभियान हो या सचिन को क्रिकेट यह भारत के आम आदमी को कहाँ पहुँचायेगा? क्या इससे सच में आम आदमी और भारत को कुछ फायदा हुआ है? जिसके लिये इनको भारत रत्न दिया जा रहा है? या यह एक वर्ग की सेवा का परिणाम है?

केरल के छोटे से गाँव के रहने वाले गणित के अध्यापक अब्दुल मलिक 20 साल से कादालुंदी नदी को रबड़ टायर के सहारे तैर कर पढ़ाने के लिये जाते हैं और आज तक कभी वे स्कूल में देर से नहीं पहुँचे। उनका मानना है कि शिक्षक बनने से एक अच्छे नागरिक बनाने में मदद मिलती है। उनके गाँव से स्कूल की दूरी सात कि.मी. है। सड़क मार्ग से स्कूल जाने पर 3 बस बदलनी पड़ती थी और उनको 2 घंटे लग जाते थे। कभी कभी बस के इंतजार में वे देर से स्कूल पहुँचते थे। अब्दुल को एक अध्यापक ने प्रेरित किया नदी तैर कर स्कूल आने के लिये इससे उनकी स्कूल की दूरी मात्र एक कि.मी. ही होती है। मलिक कहते हैं कि ‘‘नदी के किनारे पहुँचने के बाद मैं अपने कपड़े उतार, तौलिया लपेट कर छाता, लंच और कुछ किताबों को बैग में रख कर नदी मैं तैरने के लिये उतर जाते हैं। तैरने के दौरान अपने समान से भरा बैग को सर पर रखते हैं और दूसरे छोर पर पहँचने के बाद अपने कपड़े को पहन कर स्कूल में जाते हैं।’’ यह पूछने पर कि क्या उनको कभी तैर कर स्कूल जाने में दिक्कत नहीं होती है? इस पर मलिक कहते हैं ‘‘कादालुंदी नदी लगभग 70 मीटर चौड़ी है। तैरते हुये पेड़, कीड़े-मकोड़े, नारियल, कूड़ा भी होते हैं लेकिन मैं इन सबसे नहीं डरता। ये चीजें मुझे मेरे लक्ष्य से भटका नहीं सकती। बरसात के मौसम में वे पानी में 20 फुट नीचे तैरते हैं क्योंकि ऊपर पानी गंदा होता है। गर्मियों में तैर कर जाने के बाद तरोताजा महसूस करते हैं।’’ उनके गाँव के सभी लोगों को पता है कि वे 9.30 बजे वो नदी मैं तैरते हुये मिल जायेंगे।

सचिन विज्ञापन कम्पनियों में जहाँ पैसा लेकर वे देश के बच्चों को पेप्सी पीना सिखाना चाहते हैं वहीं यह अध्यापक बच्चों को अच्छा नागरिक बनना चाहता है। पैसे लेकर विज्ञापन करने वाले को भारत का सर्वोच्च सम्मान देकर सम्मानित किया गया है वहीं बच्चों को अच्छे नागरिक बनाने का सपना देखने वालों के लिये एक पुल तक नहीं बनाती सरकार।

श्रीलंका में गिरफ्तार लगभग 400 मछुआरे व नौकाओं की रिहाई के लिये अनशन कर रहे वेलमुरूगन विक्टर (42) की अनशन स्थल पर ही मौत हो गई। इन मछुआरों को गुनाह यह था कि वे पेट पालने के लिये समुद्र में मछली पकड़ा करते थे। समुद्र में सीमा का ज्ञान न होने के कारण उनको पकड़ लिया जाता है। इसी तरह वेलमुरूगन के नाव को भी श्रीलंका की नौसेना ने अक्टूबर माह में जब्त कर लिया था तब से वह जबर्दस्त मानसिक दबाव में थे। वेलमुरूगन ने अपने परिवार और मछुआरों के परिवार को न्याय दिलाने के लिये अनशन का सहारा लिया जिससे कि विदेशों में बंद अपने नागरिकों को छुड़ाया जा सके। वेलमुरूगन ने अपनी लड़ाई लड़ते हुये अनशन स्थल पर ही मौत को गले लगाया।

डॉ. सीएनआर राव की रसायन शास्त्र या मंगल ग्रह में उपलब्धि एक विशेष वर्ग के लिये हैं। वहीं वेलमुरूगन का आन्दोलन आम आदमी और भारत की जनता के स्वाभिमान की लड़ाई थी।

अब्दुल व वेलुरूगन देश के भविष्य को अच्छे नागरिक बनाने के लिये काम कर रहे हैं वहीं वेलमुरूगन ने भारत के स्वाभिमान के लिये अपनी जान की आहुति दी। तो क्या इनको भारत रत्न नहीं मिलना चाहिए? डॉ. सीएनआर राव व सचिन के योगदान से क्या भारत के आम जनता को लाभ पहुँचा है? क्या भारत रत्न उसी को मिलता है जो एक खास वर्ग के लिये काम करते हैं?

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सुनील कुमार, लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार व राजनैतिक सामाजिक कार्यकर्ता हैं।

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