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…अब दिल्ली की बारी है !

जुगनू शारदेय
कुछ भी हो भ्रामक जनता पार्टी कमाल का राजनीतिक दल है । यह एक बहुत बड़े परिवार का अंग है । इस परिवार के सामने नेहरु – गांधी परिवार की कांग्रेस पार्टी भी बौनी लगती है । मसलन किसी ने सुना क्या कि बिहार विधान सभा के चुनाव में कांग्रेस का चार सीटों पर सिमट जाना राष्ट्र कुमार की हार है क्योंकि राष्ट्र कुमार जीत हार से परे हैं । वैसे भी चार सीटों का जीतना बड़ा भारी प्रतीकात्मक है । प्रतीक का क्रम आप जाकी जैसी भावना के तहत तय कर सकते हैं कि पहली सीट 125 साल पुरानी कांग्रेस की है , दूसरी राष्ट्रमाता सोनिया गांधी के त्याग की है , तीसरी राष्ट्रकुमार राहुल गांधी के उत्साह की है और चौथी उस उम्मीदवार की है जो जीता । कांग्रेस पार्टी नहीं मानती कि बिहार की हार का मतलब दिल्ली पतन भी हो सकता है । लेकिन भ्रामक जनता पार्टी मानती है कि बिहार की जीत का मतलब दिल्ली विजय भी है ।

हमने यह देखा है कि सौ बार का असत्य हजारवीं बार सत्य हो जाता है । मसलन आप राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की शाखा  , हालांकि अभी भी यह लगती है तो अपनी उम्र पार कर चुके स्वंयसेवकों के बीच बौद्धिक प्रवाहित होती है । मान लीजिए कि ऐसी किसी शाखा में प्रश्न पूछा जाता है कि बिहार विधान सभा के चुनाव में किसकी विजय हुई है ? तो जीभ के बल पर अपनी नकली दांतों को जमाते हुए बुजुर्ग स्वंयसेवक ने उत्तर दिया  , ‘ हमारी !  ‘ देश के विदेश बिहार की राजधानी पटना में होर्डिंग – बैनर पटे हुए हैं इस सूचना से कि ‘ बिहार की जीत हमारी है …अब दिल्ली की बारी है । बेचारे निर्वहन कुमार – यह कहते कहते कि जीत बिहार की जनता की है , वह विनम्रता के कर्पूरी ठाकुर हो चुके हैं । पत्रकार से ले कर राजनीतिक समीक्षक लिखते लिखते सत्यमूर्ति हो चुके हैं कि जीत नीतीश कुमार की है । लेकिन भ्रामक जनता पार्टी  का दावा है कि बिहार की जीत हमारी है …अब दिल्ली की बारी है । हम कौन होते हैं कि इस चुनौती दें ।

आप किसी भी बात पर भ्रामक जनता पार्टी को चुनौती नहीं दे सकते । देश की एकता के लिए वह श्रीनगर के लाल चौक में भारतीय तिरंगा फहराने का दावा कर सकते हैं । यह आपकी गलतफहमी है कि वह लाल चौक तक नहीं पहुंच पाए । ऐसे मामले में भ्रामक जनता पार्टी मन चंगा तो कठौती में गंगा हो सकती है । यह भी कह सकती है कि संत रविदास का पूरा समर्थन भ्रामक जनता पार्टी के साथ था । या संत रविदास भी संघ परिवार के सदस्य थे । वही पुराना सत्य कि सौ बार का असत्य हजारवीं बार सत्य हो जाता है । बहुत सारे मुद्दों पर हम आज भी किसी विदेशी के आकलन के गुलाम हैं । अगर वह विदेशी विश्व बैंक का अध्यक्ष होता है तो उसकी बात कैसे काटी जा सकती है । अभी हाल में विश्व बैंक के अध्यक्ष राबर्ट बी जोल्लिक ने देश के विदेश बिहार का दौरा किया । जाहिर है देश में भी घुमे – आखिर यह जो देखना था कि कर्ज की वसुली होगी या नहीं । इसी सिलसिले में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी से भी मिले । उस मुलाकात में बकौल इंडियन एक्सप्रेस की कुमी कपूर उन्होने कहा कि अपने दौरे के दौरान उन्होने दो भावी प्रधानमंत्रियों से मुलाकात की । एक भावी प्रधानमंत्री तो राष्ट्रकुमार राहुल गांधी निकले और दूसरे हो गए भावी प्रधान मंत्री बिहार के मुख्य मंत्री निर्वहन कुमार ।
अब यह सारा जग जानता है कि दोनों भावी प्रधानमंत्री की कतार में खड़े हैं ।  यहां जग का मतलब सारा इंडिया ही नहीं संपूर्ण भारत भी है । और संपूर्ण भारत पर तो भ्रामक जनता पार्टी का ही अधिकार है । किसी भी दिन वह साबित कर देंगे कि निर्वहन कुमार भी संघ परिवार के सदस्य हैं । आखिर उन्हीं के बल पर तो दावा है कि बिहार की जीत हमारी है …अब दिल्ली की बारी है ।

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