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अब हमें भयभीत करके वोट बैंक नही बनाया जा सकता- रशादी

अगर अब भी होश में नही आई केंद्र सरकार तो होगा मनमोहन सिंह के घर का भी घेराव-रा.ओ.कौं.  
संविधान की धारा 341 से धार्मिक प्रतिबन्ध हटाने की मांग को लेकर जंतर- मंतर पर  राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के अनिश्चित कालीन धरने का नौवां दिन
नई दिल्ली। राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलान आमिर रशादी मदनी ने कहा है कि संविधान समिति ने भारत को एक सम्प्रभु, समाजवादी तथा धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र बनाया था। संविधान निर्माताओं ने देश के अछूतों, दलितों एवं कमजोर वर्ग के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए अंग्रेज सरकार के ज़रिये बनाये गये क़ानून के भांति उन्हें अनुसूचित जाति में सम्मिलित करके उनकी जन संख्या के अनुपात में विधान मण्डलों, सरकारी सेवाओं और शैक्षिक संस्थाओं में उनका समुचित प्रतिनिधित सुनिश्चित करने के लिए संविधान को धारा 341 के तहत आरक्षण की व्यवस्था की थी तथा अनुसूचित जाति की सूची में सभी धर्मों के मानने वाले दलित समाज के लोग सम्मिलित थे जिसमें मोची, पासी, कंजर, सांसी, गोरकुन, जोगी, मांगता(फ़कीर), जोलहा(अंसारी), धोबी, नट, बंजारा, मदारी, पेरिया, हलालखोर, मेहतर, डोम, दफ़ाली, सैफी, भाँट, भटियारा, खटीक, कुजड़ा, गुंजर, मीरासी, धन्ना, वेहना, कुम्हार, गद्दी, शिल्पकार, छप्पर, वंद, झोझा, तुर्क, सिकिलगढ़, सिरकी बिन्द, पावरिया, गौरिया, मनिहार आदि शामिल थीं, जिनका एक बड़ा वर्ग मुसलमान था और आज भी है इन जातियों के लोग चाहे जिस धर्म से संबन्धित हों अनुसूचित जाति में सम्मिलित थे।
संविधान की धारा 341 से धार्मिक प्रतिबन्ध हटाने की मांग को लेकर जंतर- मंतर पर राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के अनिश्चित कालीन धरने के नौवें दिन जनसभा को संबोधित करते हुए मौलाना रशादी ने कहा कि संविधान लागू के बाद प्रधानमंत्री प० जवाहर लाल नेहरु ने संविधान  की अनुछेद 341 की धारा का सहारा लेकर 10 अगस्त 1950 को एक अध्यादेश पास कराया कि अनुसूचित जाति के लोगों में केवल उन्हीं को आरक्षण तथा अन्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा जो हिन्दू हों। अनुसूचित जाति के किसी ऐसे व्यक्ति को आरक्षण का लाभ नही मिलेगा जो गैर हिन्दू हैंसिख समुदाय के दलितों ने इस असंवैधानिक अन्याय पूर्ण एवं दमनकारी कानून विरुद्ध के अपने अधिकार कि लड़ाई लड़ी तब 1956 में इस अध्यादेश में संशोधन करके हिन्दू व सिख होना अनिवार्य करार दिया गया। पंडित जवाहर लाल नेहरु का गैर हिन्दू व गैर सिख दलित जाति के लोगों के हितों का घला घोंटने से ही संतुष्टि नहीं हुई, उन्होंने वर्ष 1958 में पुनः इस अध्यादेश संशोधन कराते हुए यह बढ़ोतरी भी कि जिन दलितों के पूर्वज कभी हिन्दू धर्म से निकल गये थे यदि वह पुनः हिन्दू धर्म स्वीकार करें तो उन्हें भी आरक्षण व अन्य सुविधाएँ मिलेंगी। 1990 में इस अध्यादेश में एक संशोधन करके इसमें बौद्ध दलितों को भी सम्मिलित कर दिया गया इस प्रकार मुस्लिम और ईसाई दलित आज भी अपने आरक्षण के संवैधानिक अधिकार से वंचित हैं जिसे असंवैधानिक तरीके से छीन लिया गया है।
मौलाना आमिर रशादी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के ज़रिये केंद्र सरकार से धर्म निरपेक्ष देश में धर्म के आधार  पर धारा 341 में लगे धार्मिक प्रतिबंध और अध्यादेश के ज़रिये लगाई गई शर्तों का औचित्य पूछा है लेकिन केंद्र सरकार न्यायलय को इसका कोई जवाब नही दे रही है। उन्होंने कहा कि धारा 341 में लगे धार्मिक प्रतिबंध को समाप्त किये जाने के मामले में समाजवादी पार्टी, आर.जे.डी, बी.एस.पी, एन.सी.पी, टी.डी.पी, आदि राजनैतिक पार्टियों का भी आचरण गम्भीर नही दिखा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के ज़रिये धारा 341 से धार्मिक प्रतिबन्ध हटाए जाने की मांग को लेकर देश व्यापी आंदोलन शुरू हो गया, जिसकी पहली कड़ी में कौंसिल के ज़रिये जंतर-मंतर पर अनिश्चित कालीन धरने दिया जा रहा है। हम इस असवैधानिक अन्यायपूर्ण एवं काले क़ानून को भारत के संविधान में दिए गये मौलिक अधिकारों का हनन और उसकी मंशा के विरुद्ध मानते हैं और भारत सरकार से इस काले कानून को तत्काल समाप्त करने की मांग करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार अपने स्वभाव और आदतों से बाज़ नही आती है तो हम आगामी लोक सभा चुनाव में उसकी ईंट से ईंट बजा देंगे। अब हमें भयभीत करके वोट बैंक नही बनाया जा सकता है उन्होंने ये भी कहा कि अगर केंद्र सरकार होश में नही आती है और इस मामले में अपनी चुप्पी नही तोड़ती है तो अब राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के कार्यकर्ता मनमोहन सिंह के घर का घेराव करेंगे
दलित शोसित समाज के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए संविधान की धारा 341 के माध्यम से प्रदत्त आरक्षण के अधिकार में 10 अगस्त 1950 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की सरकार के ज़रिये संविधान संशोधन अध्यादेश के माध्यम से लगाये गये धार्मिक प्रतिबन्ध को समाप्त करने की मांग को लेकर 17 फ़रवरी 2014 से दिल्ली में जंतर- मंतर पर राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के ज़रिये दिया जा रहा धरना आज नौवें दिन भी जारी रहा।
कौंसिल के मीडिया प्रभारी डा० निजामुद्दीन खान ने बताया कि धरने को महाराष्ट्र के प्रदेश अध्यक्ष नुरुद्दीन आफताब, नूर मोहम्मद खान, डा० निजामुद्दीन, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष एस एम नुरुल्लाह, आरज़ू, आदि ने भी सम्बोधित किया।

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