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आइये, मलाईदारों के कापोरेट मीडिया के मुकाबले हम सब मिलकर वैकल्पिक मीडिया का तूफान खड़ा कर दें

आइये, मलाईदारों के कापोरेट मीडिया के मुकाबले हम सब मिलकर वैकल्पिक मीडिया का तूफान खड़ा कर दें
साथियों,सबसे पहले आपको बधाई कि हम लोग वैकल्पिक मीडिया की मुहिम को उसके मुकाम तक पहुंचाने की दिशा में बहुत तेज गति से आगे बढ़ने लगे हैं।
अकेले हस्तक्षेप की गूगल प्लस के पेज के जरिए इस महीने पहुंच ग्यारह लाख पार है, जबकि फेसबुक पेज के जरिए एक लाख तैंतीस हजार इस हफ्ते पहुंच। हमारे साथियों के तमाम ब्लागों की पाठक संख्या आप अलग से जोड़ सकते हैं। आप हमारे हाथ से अपने हाथ मिलायें तो जनपक्षधर मीडिया खड़ा करने में हम यकीनन कामयाब होंगे।
अब हम इस महादेश के पूरे भूगोल को सभी ज्वलंत मुद्दों पर अस्मिताओं और सीमाओं के आर पार इंसानियत के हक हकूक और कायनात की सेहत के मद्देनजर अंध राष्ट्रवाद के आर पार संबोधित करने की हालत में हैं।
इसी के साथ समकालीन तीसरी दुनिया के पाठक मंचों का जिला जिला विस्तार होने लगा है।
गौरतलब है कि आनंदस्वरूप वर्मा हमारे सिपहेसालार हैं, जो सत्तर के दशक से समकालीन तीसरी दुनिया निकाल रहे हैं और वैकल्पिक मीडिया आंदोलन भी उन्हीं का शुरू किया है।
नेपाल से बहुत बेइज्जत होकर लौटी कारपोरेट मीडिया की बजरंगी फौज को इस दिशा में चौबीसों घंटे झूठ का कारोबार के पीपली लाइव आईपीएल पुत्र बीजक सनी लिओन मैनफोर्स तंत्र मंत्र यंत्र के वातानुकूलित तिलिस्म में भारतीय नागरिक बेनकाब नहीं कर सके, क्योंकि मुक्त बाजार में हम अपने नैसर्गिक क्रिया कलाप के लिए भी जापानी तेल,राकेट कैप्सूल,स्वर्ण केशर और सनी कंडोम सबक पर निर्भर हैं और हमारी राष्ट्रीयता ने आजादी की वह कीमत अभी चुकायी नहीं है,जिससे हमें स्वतंत्र संप्रभू नागरिक का आत्मसम्मान का बोध हो।
इसके विपरीत बांग्लादेश में लाखों की कुर्बानी का सिलसिला अभी थमा नहीं है और दशकों की कुर्बानियों के बाद राजतंत्र के हिंदू साम्राज्यवाद की गुलामी से आजाद नेपाल के संप्रभू और स्वतंत्र नागरिकों ने भारतीय कारपोरेट केसरिया बजरंगी मीडिया के नकाब उतार दिये हैं।
नेपाल ने हिंदू संघ परिवार के हिंदू साम्राज्य में शामिल होने से इंकार कर दिया है। जबकि वहां आपातकाल राष्ट्रपति से पूछे बिना लगाया गया। वहां भारतीय सेना राष्ट्रपति से इजाजत लिये बिना बुलायी गयी।
कठपुतली सरकार की इन हरकतों के खिलाफ भूकंप की त्रासदी झेल रहे नेपाल की जनता का गुस्सा ऐसा उबला कि वह नेपाल का राजकाज में रोजमर्रे की दखलंदाजी और नेपाल में मैत्री आपरेशन के जरिये संघ परिवार के हिंदुत्व कारोबार और बजरंगी कारपोरेट मीडिया के खिलाफ उठ खड़ी हो गयी।
इसका सिलसिलेवार ब्यौरा हम हस्तक्षेप और हमारे दूसरे ब्लागों पर लगातार देते रहे हैं। दे रहे हैं। कृपया देखते रहें हस्तक्षेप। हमारे ब्लाग। कृपया पढ़ते रहें समकालीन तीसरी दुनिया और समयांतर और वे तमाम पत्र पत्रिकाएं जो देशभर में हमारे साथी निकाल रहे हैं और हम भरसक जिन्हें जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। करते रहेंगे।
#GoHomeIndianMedia अभिय़ान चालू होते न होते कठपुतली सरकार को भारत समेत तमाम विदेशी तत्वों को नेपाल से बाहर निकालने के लिए बचाव और राहत अभियान बंद करके विदेशियों को देश छोड़ने का आदेश जारी करना पड़ा।
बड़ा बेआबरु होकर नेपाली कूचे से निकला भारतीय बजरंगी ब्रिगेड।
अब मजीठिया का फंडा भी बेनकाब हो गया है। अरविंद केजरीवाल उत्पीड़ित अत्याचारित मीडिया कर्मियों का क्या भला करेंगे, जैसे वे दिल्ली के किसानों और स्त्रियों का भला कर रहे हैं, इससे साफ जाहिर है।
मिलियल बिलियनर कारपोरेट गुलाम राजनेता जो अपने लाइलाज बवासीर का इसलाज करवाने देशी विदेशी पूंजी की दलाली के तहत समूची कायनात को रेडियोएकेटिव कयामत में बदलने लगे हैं, उसकी जरखरीद गुलाम कारपोरेट मीडिया के खिलाफ जनपक्षधरता और जनसरोकार की कसम खाकर जो मीडिया में दाखिल होकर उत्पीड़ित उपेक्षित हैं, उन्हें अब कारपोरेट केसरिया सारस्वत वर्ण वर्चस्वी मीडियातंत्र के खिलाफ अपने आत्मसम्मान के लिए खड़ा ही होना चाहिए।
हम 1980 से मीडिया में हैं और हिंदी के मीडियाकर्म हमें खूब जानते हैं। हमने जनता के हक हकूक के पक्ष में लिखना जो छात्र जीवन से शुरु किया सत्तर के दशक से वह सिलसिला अभी भी जारी है। हमने कभी आकाओं की परवाह नहीं की।
प्रभाष जोशी, श्याम आचार्य, शंभूनाथ शुक्ल से लेकर ओम थानवी तक ने हमारे साथ जो सलूक किया, मीडिया के लोग बहुत बेहतर जानते हैं।
फिर भी मेरी पेशेवर पत्रकारिता में एक दिन का व्यवधान भी नहीं आया। जो लोग स्तंभन करते हैं संपादकीय पन्नों में आप जानते हैं, हमारे पाठक उनसे बहुत ज्यादा है और हमारी आवाज देश विदेश हर कहीं गूंजती हैं।
तो अपने आत्मसम्मान के लिए, अपने वजूद के लिए आप हमारे साथ खड़े हों, तो गुलामी के तंत्र से आपको कोई खतरा नहीं है और जिस मिशन के लिए आपने मीडिया पर दांव लगाया, वह मिशन कारपोरेट मीडिया के जरिये नहीं, बल्कि वैकल्पिक मीडिया के मंचों से पूरा हो सकता है।
हम अपने मीडियाकर्मी उन नब्वे फीसद साथियों के इंतजार में हैं ,जो दस फीसद की मौज मस्ती के कारण रोजमर्रे की जिंदगी में बाहैसियत मीडियाकर्मी अपनी इज्जत गवां चुके हैं मलाईदार तबके की जनविरोधी हरकतों की वजह से।
आइये, मलाईदारों के कापोरेट मीडिया के मुकाबले हम सब मिलकर वैकल्पिक मीडिया का तूफान खड़ा कर दें।
सोशल मीडिया ने मोबाइल के जरिये देश दुनिया जोड़ने का बेहतरीन मौका पैदा किया है। संघ परिवार इसी मीडिया का इस्तेमाल बखूब कर रहा है। आप का जादू भी इसी से कायम है। चीनी सोशल मीडिया में भी भोंपू कारपोरेट केसरिया बजने लगा है।
आपको बहुत कुछ करना नहीं है। आपनी सेल्फी और फोटो अलबम आप जितना चाहें शेयर करें। चैट पर भी रोक नही है। लैकिन यह बजरंगी कारपोरेट मीडिया राष्ट्रद्रोही राजनीति के इशारों पर जो झूठ और धोखे का हवा महल ताने हैं प्रिंट और चैनलों में, उसे आप जनपक्षधर वैकल्पिक मीडिया में छपी जनपक्षधर सूचनाओं को भी शेयर करें और अपने हाथ मोबाइल को राष्ट्रीय झंडे में तब्दील कर दें तो हम उस झूठ के कारपोरेट केसरिया कारोबार को तहस नहस कर सकते हैं और पूरी 120 करोड़ आबादी को सच बताने में देर सवेर कामयाब हो जायेंगे।
पलाश विश्वास

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