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आतंक का संघी मॉड्यूल- असल मुजरिम कब आयेंगे, कानून की गिरफ्त में

जाहिद खान
समझौता एक्सप्रेस बम विस्फोट के सात साल बाद राष्ट्रीय जाँच एजेंसी यानी एनआइए की विशेष अदालत ने हाल ही में दक्षिणपंथी हिन्दूवादी कार्यकर्ता स्वामी असीमानंद और सह आरोपियों कमल चंद चैहान, राजिंदर चौधरी और लोकेश शर्मा के खिलाफ हत्या, राजद्रोह और अन्य आरोपों के लिये अभियोग तय कर दिया। अब इनके खिलाफ जल्द ही मुकदमे की सुनवाई होगी। चारों आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 (आपराधिक साजिश), धारा 302 (हत्या), धारा 307 (हत्या का प्रयास), धारा 324 (स्वेच्छा से चोट पहुँचाना), धारा 327 (संपत्ति हासिल करने के लिये स्वेच्छा से चोट पहुँचाने) और 124 ए (राजद्रोह) समेत अठाहरह अपराधों के लिये आरोप लगाये गये हैं। ये आरोपी रेलवे अधिनियम, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, सार्वजनिक संपत्ति क्षति निरोधक अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम के तहत भी आरोपों का सामना करेंगे। एनआइए ने इस मामले में साल 2011 को पहला और 9 अगस्त 2012 को दूसरा आरोप पत्र दाखिल किया था। एक तरह से देखा जाये, तो आरोपियों पर यह तीसरा आरोपपत्र है। एनआईए की चार्जशीट के मुताबिक राजेंद्र पहलवान, लोकेश शर्मा और कमल चौहान पर ट्रेन में बम लगाने का आरोप है, जबकि असीमानंद इस पूरे मामले का मास्टर माइण्ड है। विस्फोटकों के उपकरणों का निर्माण करने के लिये एक इंजीनियर संदीप डांगे और बिजली मिस्त्री रामजी कलसांगरा ने सहयोग किया था। आरोपपत्र दायर होने के बाद उम्मीद बंधी है कि जल्द ही यह देशद्रोही अपने किये की सजा पायेंगे।
       गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच दिल्ली से लाहौर चलने वाली समझौता एक्सप्रेस ट्रेन में 18 फरवरी 2007 को पानीपत के निकट दीवाना स्टेशन के पास भयानक बम विस्फोट हुआ था। जिसमें 68 लोग मारे गये, तो वहीं सैकड़ों घायल हुये। मरने वालों में ज्यादातर पाकिस्तानी थे। जैसा कि हर बम विस्फोट के तुरन्त बाद होता है, इस मामले में हमारी पुलिस और जाँच एजंसियों का पहला शक मुस्लिम चरमपंथी संगठनों के तरफ गया। देश में अलग-अलग राज्यों से कुछ मुस्लिम नौजवानों की गिरफ्तारी भी हुयी। लेकिन मामला नहीं सुलझा। जाँच एजेसियाँ अँधेरे में ही तीर मारती रहीं। रेलवे पुलिस और हरियाणा पुलिस के विशेष जाँच दल की प्रारम्भिक जाँच के बाद, गृह मंत्रालय के निर्देश पर यह मामला आखिरकार एनआइए को सौंप दिया गया। एनआईए इस मामले की उलझी हुयी गुत्थियाँ सुलझाने में ही लगा था कि मामले में उस वक्त अहम मोड़ आया, जब महाराष्ट्र एटीएस के पूर्व चीफ हेमंत करकरे ने मालेगांव बम विस्फोट मामले की तहकीकात की। करकरे की तहकीकात में जो सच्चाई सामने आई। उसने सभी के होश उड़ाकर रख दिये। देश में जिन बम विस्फोटों के लिये मुस्लिम नौजवानों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा था, वे दरअसल संघ परिवार से जुड़े संगठनों और उसके सरगर्म कार्यकर्ताओं ने किये थे।
पहले महाराष्ट्र एटीएस की जाँच और बाद में इन बम विस्फोट मामलों में गिरफ्तार स्वामी असीमानंद के न्यायाधीश के सामने कलमबंद इकबालिया बयान से यह बात पूरे देश में आईने की तरह साफ हो गयी कि मालेगांव, मक्का मस्जिद, मोडासा, अजमेर दरगाह शरीफ और समझौता एक्सप्रेस बम विस्फोट के असल कसूरवार संघ के सक्रिय कार्यकर्ता थे। महाराष्ट्र एटीएस ही नहीं बल्कि राजस्थान एटीएस ने भी अपनी जाँच मुकम्मल करने के बाद इस बात को माना कि बीते एक दशक में देश के अंदर जो बड़े बम विस्फोट हुये, उसमें एक ही समूह के अलग-अलग मॉड्यूल का हाथ है। इस समूह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके सक्रिय सदस्य बड़े पैमाने पर शामिल हैं। अदालत में पेश अपनी चार्जशीट में राजस्थान एटीएस ने खुलासा किया था कि संघ से जुड़ी कट्टर हिन्दूवादी तंजीमों के ओहदेदारों ने साल 2006 में 11 से 13 फरवरी के दरम्यान गुजरात के डांग इलाके में बैठक कर पहले धमाकों के लिये मुख्तलिफ जगहों को चिन्हित किया। यह तयशुदा जगह थीं अजमेर दरगाह शरीफ, दिल्ली जामा मस्जिद, हैदराबाद की मक्का मस्जिद, मालेगांव के मुस्लिम इलाके और हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस। साल 2007 से लेकर 2008 तक महज दो साल के छोटे से अरसे में इस समूह ने हैदराबाद की मक्का मस्जिद, अजमेर दरगाह शरीफ, मालेगांव, समझौता एक्सप्रेस और दीगर कई जगहों पर बम विस्फोट किये।
सारे देश को बम विस्फोटों से दहलाने की खौफनाक साजिश 31 अक्टूबर 2005 को जयपुर के सी-स्कीम स्थित गुजराती समाज के गेस्ट हाऊस में रची गयी। गेस्ट हाऊस में अभिनव भारत संगठन के स्वामी असीमानंद, जय वंदे मातरम् संगठन की मुखिया साध्वी प्रज्ञा सिंह, संघ प्रचारक सुनील जोशी, देवेन्द्र गुप्ता और संघ के दीगर सरगर्म कारकुन संदीप डांगे, रामचंद कलसांगरा उर्फ रामजी, शिवम धाकड़, लोकेश शर्मा, समंदर कमल चैहान आदि शामिल हुये। एटीएस ने जो सबसे सनसनीखेज खुलासा किया, वो यह था कि इस बैठक को संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने भी संबोधित किया। इस पदाधिकारी ने अपने संबोधन में इन लोगों को सलाह दी कि वह अपना काम धार्मिक संगठनों से मिलकर करें, जिससे उन पर किसी भी तरह का शक न जाये। बहरहाल एनआईए समझौता एक्सप्रेस मामले में अभी तलक नाबा कुमार सरकार उर्फ स्वामी असीमानंद, लोकेश शर्मा, राजिंदर चैधरी और कमल चैहान की गिरफ्तारी कर चुका है। चौहान, समझौता एक्सप्रेस बम विस्फोट कांड में अहम साजिशकर्ता सुनील जोशी, संदीप डांगे और रामचंद्र कलसांगरा के साथ था। मालूम हो कि इन बम विस्फोटों के बाद सुनीज जोशी की देवास में हत्या हो चुकी है और संदीप डांगे व रामचंद्र कलसांगरा फरार हैं।
एनआईए की तफ्तीश में जो बातें सामने निकलकर आई थीं, उसके मुताबिक इंदौर जिले से तकरीबन 35 किलोमीटर दूर देवालपुर इलाके के मूरखेड़ा गांव का कमल चैहान संघ का सक्रिय कार्यकर्ता है, जो नियमित रूप से संघ की शाखा में जाता था। समझौता एक्सप्रेस में बम रखने से पहले उसने बकायदा हरियाणा स्थित फरीदाबाद के एक शूटिंग पॉईंट और मध्यप्रदेश के देवास में हथियारों और विस्फोटकों का सघन प्रशिक्षण लिया था। यह महज इत्तेफाक नहीं है कि बम विस्फोटों के मुख्य आरोपी सुनील जोशी, लोकेश शर्मा, संदीप डांगे, रामचंद्र कलसांगरा और कमल चौहान यानी सभी का ताल्लुक पश्चिमी मध्यप्रदेश से है। मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार के कार्यकाल में मालवा अंचल आतंकवाद की नर्सरी के रूप में उभरा है। बीते कुछ सालों में मालवा अंचल के अंदर ऐसे कई मामले उजागर हुये हैं, जिससे अहसास होता है कि यहाँ जैसे संघ परिवार को खुली छूट है। वरना, यह कैसे मुमकिन है कि यहाँ के कुछ लोग आतंकी घटनाओं से जुड़े रहें और सरकार को इसकी कोई खबर न हो।
समझौता एक्सप्रेस और दीगर बम विस्फोटों के बहुत से आरोपी हालांकि, अब जाँच एजेंसियों की गिरफ्त में आ चुके हैं। फिर भी इन मामलों की जाँच कर रही एनआईए को अब भी कई महत्वपूर्ण आरोपियों की तलाश है। इतने सनसनीखेज खुलासों के बाद भी एनआईए का मानना है कि अभी वह इस साजिश के सिर्फ एक हिस्से की तह में जा पाई है, जबकि असली साजिशकर्ता अब भी उसकी पकड़ से बाहर हैं। बम विस्फोट मामलों में गिरफ्तार हिंदुत्ववादी दहशतगर्दों ने देश को अस्थिर करने की साजिश में बार-बार संघ और उसके एक अहम ओहदेदार का नाम लिया है। एक अंगे्रजी अखबार के स्टिंग ऑपरेशन में भी यह बात सामने निकलकर आई थी कि आरएसएस सुप्रीमो मोहन भागवत के इस नजदीकी सहयोगी को पहले से ही इन सभी बम विस्फोटों की जानकारी थी। यही नहीं, इन बम विस्फोटों को अंजाम देने वाले समूह में उसका खास शार्गिद सुनील जोशी भी शामिल था। राजस्थान एटीएस के हाथ लगी सुनील जोशी की दो डायरियों में पहले पन्ने पर उसके नाम के ठीक नीचे इमरजेंसी फोन शीर्षक से संघ के इस ओहदेदार का नाम, जयपुर का पता और उनके तीन मोबाईल नंबर लिखे हुये थे। स्टिंग ऑपरेशन के अलावा इसी तरह की मिलती-जुलती जानकारियाँ सीबीआई की जाँच से सम्बंधित दस्तावेजों में भी निकली थीं। इन साफ-साफ खुलासों के बाद भी जाँच एजेंसियों के हाथ अभी तलक इस शख्स की गर्दन तक नहीं पहुँच पाये हैं। यानी बम विस्फोटों के असल मुजरिम आज भी जाँच एजेंसियों और कानून की गिरफ्त से बाहर हैं। समझौता एक्सप्रेस विस्फोट में मारे गये लोगों के परिवारों को इंसाफ तभी मिलेगा, जब इस मामले के असल आरोपी और साजिशकर्ता जेल की सलाखों के पीछे होंगे।
 

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जाहिद खान, लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।

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