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आदमी को जानवर बनाने की प्रयोगशाला है नागपुरी मुख्यालय

संघ का महान राष्ट्र

वोट तुम्हारा सत्ता हमारी जलने के लिए तैयार रहो.
राष्ट्र और राष्ट्रवाद का ठेका राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पास है.
आज एक तरफ कल्पित रावण मर रहा था तो दूसरी तरफ 1925 दशहरे के दिन नया रावण जन्म ले रहा था. जन्म लेने के बाद जैसे वह युवा अवस्था में पहुंचा और फिर ताकतवर हुआ, तो उसके प्रचारक रहे मुख्यमंत्री ने कहा कि कार के नीचे कुत्ते का पिल्ला आ जाये तो उसमें ड्राईवर का क्या दोष. यह बात मुस्लिम समुदाय के सम्बन्ध में कही गयी थी। उनका धर्म और संघ के प्रचारक का धर्म अलग-अलग हो सकता था, लेकिन नागरिकता के हिसाब से दोनों भारतीय नागरिक थे. वहीँ, आज भारत के केन्द्रीय मंत्री वी.के सिंह ने हरियाणा में दलितों को जलाये जाने की घटना के सम्बन्ध में कहा कि कुत्ते को पत्थर मारता है तो केंद्र सरकार का उसमें क्या दोष है।
आज वही व्यक्ति देश का प्रधानमंत्री है, जो अल्पसंख्यकों को कुत्ते का पिल्ला समझता है और हिन्दू समाज में दलितों को कुत्ते का पिल्ला या कुत्ता समझने वाला व्यक्ति केंद्र सरकार में मंत्री है. दोनों ही व्यक्ति नागपुरी मुख्यालय से संचालित होने वाले हैं. उनकी विषाक्त विचारधारा का पोषण यह लोग करते हैं. आदमी को कुत्ता, कुत्ते का पिल्ला समझना इनकी मुख्य समझदारी है.
यही बात नागपुर मुख्यालय अपने कार्यकर्ताओं को पढ़ाता रहता है. इंसान, इंसान नहीं है उसको जानवर में तब्दील करो और उसकी हत्या करने में कोई भी संकोच करने में परेशानी न हो.
लालू प्रसादयादव ने ट्वीट कर कहा, ‘जो वीके सिंह ने बोला वही बीजेपी का मूल विचार है। जो दलित-पिछड़ा को जितना अधिक गाली देगा, शोषण करेगा उसको संघ और बीजेपी उतना ही बड़ा नेता मानता है।’
 जेडीयू के प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा, ‘हमलोग स्तब्ध हैं कि ऐसे लोगों को मोदी ने मंत्री बना रखा है। वीके सिंह अक्सर गैरजिम्मेदार और असंवेदनशील बयान देते हैं। हमलोग को चुनावी मुद्दा बनाने की जरूरत नहीं है बल्कि बीजेपी खुद बनवा रही है।’
नागपुरी मुख्यालय आदमी को जानवर बनाने की प्रयोगशाला है. अभी तक ज्ञात जानकारी के अनुसार वानर से वर्तमान मनुष्य बनने की प्रक्रिया है लेकिन ये पुरातनपंथी नरभक्षी विचारधारा आदमी को जानवर बना कर उस आदमी का वध करने के लिए तैयार है और कर रही है यही उसका मूलमंत्र है.
सत्ता स्थापित करने के लिए अम्बेडकर के अन्दर शंकराचार्य की आत्मा दिखाई देती है और अम्बेडकर समर्थकों को शंकराचार्य के पास ले जाकर पंडित विष्णु शर्मा द्वारा रचित पंचतंत्र की कहानी का यह वाक्य जो भेड़िया कहता है खरगोश को खाने के लिए कि “उदार चरितानाम वसुधैव कुटुम्बकम”. मतलब की बूढ़ा भेड़िया जब शिकार करने में असमर्थ हो जाता है और भोजन करने के लिए खरगोश को यह उपदेश देता है उसी तरीके से नरभक्षी प्रयोगशाला के लोग भेड़िये की तरह सारा संसार एक है का नारा दे रहे हैं, मतलब कि वनवासी आदिवासी, दलित, पिछड़े भी हिन्दू हैं, लेकिन कब तक? जब तक वोट चाहिए.
वोट मिलने के बाद आरक्षण ख़त्म, छुआछूत जारी. वैदिक काल के अनुसार जिन्दा जलाना, घर फूंक देना, बस्तियों को आग लगा देना का कार्यक्रम जारी रहेगा. हमारा देवता गौ मांस भक्षण कर सकता है लेकिन उसकी पूजा बंद नहीं होगी, लेकिन तुमने अगर गाय को मारा तो गौ हत्या लगेगी और सब कुछ त्याग कर भीख मांग कर गुजारा करना होगा। यह तो समझो नहीं तो जानवर के लिए तुम्हारी नस्ल को नष्ट कर दिया जायेगा. वोट तुम्हारा सत्ता हमारी जलने के लिए तैयार रहो.
रणधीर सिंह सुमन

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