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आरक्षण समाप्त करने का नया जादू- गुजरात में नागपुर की प्रयोगशाला

संघ की शह पर पिछड़ों व दलितों के आरक्षण को समाप्त करने के लिए नया प्रयोग शुरू हुआ है
गुजरात में नागपुर की प्रयोगशाला है, उस प्रयोगशाला में पहले व्यापक पैमाने पर लूटपाट व नरसंहार किया गया था। अब उसी प्रयोगशाला में दो-तीन महीने की कड़ी मेहनत के बाद पिछड़ों व दलितों के आरक्षण को समाप्त करने के लिए नया प्रयोग शुरू हुआ है।
गुजरात की रैली में जानबूझ कर पुलिस लाठीचार्ज व उसके बाद भड़काई गयी हिंसा ने अरबों रुपये की परिसंपत्तियों को नष्ट कर दिया तथा हिंसा करने का जो प्रयोग संघी प्रयोग शाला मुसलमानों के खिलाफ करती आ रही थी, वह अपनी ताकत को पुन: दिखाने के लिए अमादा थी और दिखाया और जिस तरीके से गुजरात पुलिस ने लोगों के घरों में घुसकर महिलाओं, बच्चों, पुरुषों को पीटा तथा संपत्ति को नुकसान पहुँचाया है, यही काम पूर्व में मुसलमानों के खिलाफ गुजरात पुलिस ने किया था।
गुजरात पुलिस का चरित्र संघ की प्रयोगशाला से निर्मित विचारों से ओत-प्रोत होने के कारण उसने जनता को जगह-जगह मारा पीटा व गोलियां चलाई। इस सब हिंसा और प्रतिहिंसा के बीच संघ आरक्षण को समाप्त करने का कार्य करना चाहता है।
अगर पाटीदार जाति ओबीसी में शामिल हो जाती है, तो गुजरात में पिछड़े वर्ग के आरक्षण का कोई अर्थ नहीं रह जायेगा। अगर नहीं हो पाती है, तो जैसा हार्दिक पटेल ने कहा है कि पटेल-पाटीदार को आरक्षण नहीं तो किसी को आरक्षण नहीं होना चाहिए।
संघी हिन्दुत्व से प्रभावित सवर्ण जाति के कुछ तत्व बराबर आरक्षण की मांग कर रहे हैं या आरक्षण समाप्त करने की। इस पूरे आन्दोलन को आरएसएस का वैचारिक समर्थन प्राप्त था, बगैर उसकी मदद के इतना बड़ा आन्दोलन खड़ा करना हार्दिक पटेल के बस की बात नहीं थी।
संघ के ऊपर हमेशा एक अवसर को छोड़ कर महाराष्ट्र की चितपावन ब्राह्मण जाति का कब्ज़ा रहा है और आज भी प्रमुख पदाधिकारीगण चितपावन ब्राह्मण जाति के हैं, वह किसी भी कीमत पर दलितों व पिछड़ों को आरक्षण नहीं देना चाहते हैं।
जब देश के प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू की थी तो पूरे देश के अन्दर आरएसएस ने एक तूफ़ान खड़ा कर दिया था और मंडल पर कमंडल लागू करने का कार्य किया था और जब आज कमंडल का ही शासन है तो वह पूरी तरह से देश को मनुस्मृति के दौर में देश को ले जाना चाहती है और उसमें सवर्ण जातियों का शासन हो और बाकी जातियां सेवक की भूमिका में हों, ऐसा सामाजिक ढांचा तैयार करने के लिए नागपुर की प्रयोगशाला किसी भी कीमत पर बनाना चाहती हैं। उसी का परिणाम है गुजरात में होने वाली हिंसा और पुलिस द्वारा की जा रही प्रति हिंसा, जिससे आरक्षण समाप्त करने की बात को आगे ले जाया जा सके। संघ की प्रयोगशाला का आरक्षण समाप्त करने का नया जादू कितना चल पाता है यह तो वक्त बताएगा।
रणधीर सिंह सुमन

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