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इंसानों के खून का प्यासा नागपुरी गिरोह खूंखार मुद्रा में आ चुका है

मोदी का विकास माने कद्दू
मोदी का विकास देश को 1947 की स्थिति में ले जाना चाहता है
वर्तमान समय में देश की मानसिक हालत 1947 के आस पास पहुँच गयी है और सही मायने में भारत पाकिस्तान विभाजन की जिस त्रासदी का वर्णन भीष्म साहनी ने अपने उपन्यास तमस में किया था या सहादत अली मंटो ने अपनी कहानी ” खोल दो ” में किया था, देश का विकास का रथ मोदी और अमित शाह के कार्यकाल में उसी स्थिति में पहुँच गया है जिसका उदाहरण यह है कि नोएडा के दादरी के एक गांव में सोमवार रात भीड़ ने गोमांस खाने के संदेह में एक 50 वर्षीय व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। वहीं पुलिस के मुताबिक मामले की शुरुआती जांच में सामने आया है कि मृतक इखलाक मुहम्मद और उनके परिवार द्वारा गोमांस खाए जाने की अफवाह बेबुनियाद थी।
पूरा मुल्क इस समय अफवाहों के दौर से गुजर रहा है। तर्क और बुद्धि की बात बेईमानी हो गयी है। आज हम कहने के लिए जरूर कह सकते हैं कि हम मंगल ग्रह पर बस्तियां बसाने का इंतज़ार कर रहे हैं लेकिन हमारा पागलपन, हमारी आस्था और विश्वास अवैज्ञानिक और कुबुद्धि पर आधारित होता जा रहा है, जिसके फलस्वरूप हम आये दिन किसी स्त्री को डायन या चुड़ैल बताकर पीट-पीटकर मार डालने की आये दिन घटनाएं हो रही हैं। आस्था और विशवास के नाम पर तमाम सारे गली मोहल्लों में ठग पैदा हो गए हैं, जो करोड़ों-करोड़ों रुपये की ठगी आम जनता को विश्वास में लेकर कर रहे हैं।
नागपुर मुख्यालय देश की आजादी के समय दंगा कराने और लोगों की जान लेने के लिए मंदिरों में गौ मांस तथा मस्जिदों में सूअर का मांस फेंक कर हज़ारों लोगों की जान ले लेता था। आज वही प्रक्रिया झारखण्ड से लेकर बाराबंकी तक दोहराई जा रही है।
इंसानों के खून का प्यासा नागपुरी गिरोह खूंखार मुद्रा में आ चुका है. मुसलमानों की हत्या कराने के लिए नकाब डालकर धार्मिक स्थलों पर मांस फेंकने की घटनाएं हो रही हैं। अभी हाल में झारखंड के कई शहरों में एक साथ मंदिरों में मांस फेंकने का वाकया सामने आया है। पुलिस इस मामले को देख रही है कि कोई जानबूझकर कर रहा है या संगठित तरीके से हो रहा है। पुलिस इस बात की भी शिनाख्त कर रही है कि सांप्रदायिक सद्भावना बिगाड़ने के पीछे क्या वजह है। क्या ऐसा बिहार चुनाव के मद्देनजर तो नहीं किया जा रहा है। पिछले 48 घंटों के भीतर झारखंड के कई शहरों के मंदिरों में मांस फेंके गए हैं। रांची में हिनु स्थित काली मंदिर के बाहर गाय की चमड़ी बरामद हुई थी। इस वाकये को लेकर रांची में शनिवार को हिंसक झड़प हुई थी।
देश के अन्दर दंगा कराने के लिए नकाब पहन कर नागपुरी कार्यकर्ता मंदिरों और मस्जिदों में मांस फेंकते हुए पकड़े गए हैं लेकिन हमारे देश की नौकरशाही की संरचना में नागपुरी रक्तबीज है, इन घटनाओ की ओर ध्यान नहीं देते हैं, बल्कि उनके इशारों पर अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न करने से बाज नहीं आते हैं।
मोदी का विकास देश को पीछे ले जा रहा है। अफवाहों को जन्म दे रहा है। तर्क और बुद्धि का विनाश कर रहा है, इसलिए बड़े आराम से यह कहा जा सकता है कि नागपुरी विकास कद्दू का विकास है ?
 रणधीर सिंह सुमन 

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