Home » समाचार » इंसाफ की लड़ाईयां वैचारिक बुनियाद पर ही लड़ी जा सकती हैं

इंसाफ की लड़ाईयां वैचारिक बुनियाद पर ही लड़ी जा सकती हैं

सांप्रदायिकता और जातिगत हिंसा के खिलाफ आंदोलन तेज करेगा रिहाई मंच
इंसाफ के सवाल पर सूबे भर से जुटे रिहाई मंच के प्रतिनिधि, जनविरोधी सरकार के खिलाफ आंदोलन की बनी रणनीति
85 सदस्यीय रिहाई मंच प्रदेश आंदोलन समन्वय समिति का हुआ गठन
लखनऊ, 15 नवंबर 2015। देश तथा प्रदेश में आवाम पर बढ़ रहे हमले, सामज में फैल रही असहिष्णुता, सांप्रदायिकता और जातिगत हिंसा का मुकाबला करने और सरकार के जनविरोधी कारपोरेट परस्त नीतियों के खिलाफ सड़क पर उतरने की तैयारियों को लेकर रिहाई मंच राज्य समन्वय समिति की बैठक शनिवार को लखनऊ के कैसरबाग स्थित जय शंकर प्रसाद सभागार में संपन्न हुई। बैठक में पूरे प्रदेश से रिहाई मंच के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में आतंकवाद के नाम पर कैद निदोंषों को रिहा करने, निमेष कमीशन की रिपोर्ट पर अमल करने, छूटे बेगुनाहों के लिए मुआवजा और पुर्नवस नीति बनाने, दलित ऐक्ट की तरह ‘माईनॉरिटी एक्ट’ बनाने, मुसलमानों और दलितों को आत्म रक्षा के लिए हथियारों के लाइसेंस जारी करने, बुंदेलखंड को दलित उत्पीड़न क्षेत्र घोषित करते हुए विशेष सामाजिक-राजनीतिक पैकेज देने, महिला थानों की तरह दलित थाने बनाने, मिली-जुली आबादी विकसित करने हेतु मिश्रित आवासीय नीति बनाने व विकास के नाम पर कनहर, करछना समेत सूबे में किसानों के दमन को तत्काल रोकने व जेलों में बंद किसानों को रिहा करने, बुनकरी, चमड़ा, मांझा, ताला, जरदोजी व पीतल व्यवसाय को बचाने जैसे विषयों पर बहस हुई। मुसलमान-दलित उत्पीड़न व किसानों-लघु उद्योग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विशेष सत्र आयोजित करने की मांग की व आगामी विधान सभा सत्र में इन सवालों पर प्रदर्शन की रणनीति बनाई गई।
रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने कहा कि रिहाई मंच आंदोलन जनता का अपना आंदोलन है। जो इसलिए अस्तित्व में आया कि उसके द्वारा उठाए जाने वाले सवाल सियासी पार्टियां नहीं उठाती थीं। रिहाई मंच ने लोकतंत्र के दायरे को और व्यापक और वास्तविक स्वरूप देने का काम किया है।
गाजियाबाद से आए पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव ने कहा कि भाजपा और सपा में सिर्फ साम्प्रदायिक राजनीति पर ही गुप्त गठबंधन नहीं है। कारपोरेट के हित में भी ये दोनों पार्टियां मिलकर काम कर रही हैं। कनहर बचाओ के नाम पर फर्जी संगठन बना कर सपा और भाजपा के लोग स्थानीय जनता को उसके जल जंगल जमीन से बेदखल करने की साजिश कर रहे हैं।
लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रमेश दीक्षित ने कहा कि बिहार में हारने के बावजूद संघ परिवार और भाजपा मुसलमानों को टारगेट करने से बाज नहीं आएंगे। ऐसे में साम्प्रदायिकता के खिलाफ एक व्यापक जनआंदोलन आज की जरूरत है।
कॉर्ड के अतहर हुसैन ने कहा कि समाज विरोधी शक्तियों को चिन्हित करके एक व्यापक संघर्ष का मंच बनाना आज समाज की जरूरत है।
एपवा और तहरीके निस्वां की ताहिरा हसन और रफत फातिमा ने महिलाओं के मुद्दों को इंसाफ के संघर्ष का मुख्य आधार बताया। उन्हें कहा कि आतंकवाद के नाम पर फंसाए गए बेगुनाहों के परिवारों की महिलाएं ही सबसे ज्यादा पीडि़त होती हैं। इसलिए रिहाई मंच का आंदोलन महिलाओं की आजादी का भी आंदोलन है।
बैठक को सम्बोधित करते हुए आइटी कॉलेज की प्रोफेसर व मनोवैज्ञानिक डॉ हम्दा जरीन ने कहा कि रिहाई मंच की ताकत सिर्फ उसके द्वारा उठाए गए मुद्दे ही नहीं हैं बल्कि उसकी वैचारिकता भी है। इंसाफ की लड़ाईयां वैचारिक बुनियाद पर ही लड़ी जा सकती हैं।
बनारस से आए जहीर अहमद हाशमी ने कहा कि मुसलमानों को गुमराह करके सपा जैसी पार्टियों ने उन्हें सिर्फ बदहाली और दंगे ही दिया है।
आजमगढ़ से आए शाह आलम शेरवानी ने कहा कि रिहाई मंच ने इंसाफ को लेकर जो राजनीतिक चेतना समाज में विकसित की है उसमें भारतीय राजनीति को दिशा देने की क्षमता है। इस आंदोलन को गांव गांव में ले जाने का जो सिलसिला रिहाई मंच ने शुरू किया है वह बदलाव का कारण बनने जा रहा है। बैठक को संबोधित करते हुए आजमगढ़ रिहाई मंच प्रभारी मसीहुद्दीन संजरी ने कहा कि इस दौर में जबकि सांप्रदायिक फासीवाद का खतरा पूरी तरह से सामने खड़ा है और प्रदेश की समाजवादी पार्टी संघ के साथ मिलकर आगामी चुनाव में फासीवाद को प्रश्रय देने की कोशिश कर रही है। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव में रिहाई मंच को अपनी भूमिका तय करनी होगी।
कानपुर से आए मोहम्मद अहमद ने कहा कि रिहाई मंच के ऊपर प्रदेश को सपा और भाजपा के साम्प्रदायिक राजनीति से बचाने की जिम्मेदारी है। मंच में बढ़ती लोगों की भागीदारी साफ करती है कि संगठन इस जिम्मेदारी को पूरा करने में कामयाब रहेगा। वहीं मोहम्मद तौहीद, अब्दुल अजीज और मोहम्मद इसहाक ने संगठन को और बढ़ाने पर जोर दिया।
सीतापुर से आए बृज बिहारी ने कहा कि दलितों, मुसलमानों और वंचित समाज के हक की लड़ाई का प्रदेश व्यापी मंच के बतौर जनता रिहाई मंच की ओर उम्मीद से देख रही है। मंच को मजबूत करके ही देश विरोधी साम्प्रदायिक और सामंती शक्तियों को कमजोर किया जा सकता है।
बरेली से आए मुश्फिक रजा खान ने कहा कि रिहाई मंच के दायरे में दूसरे संगठनों को साथ लाने की जरूरत है। संगठन का इस दिशा में बढ़ना आंदोलन को और व्यापक बनाएगा।
उन्नाव से आए संजीव श्रीवास्तव और दिनेश प्रियमन ने उन्नाव के किसानों के सवालों को उठाने पर जोर देते हुए कहा कि सरकार कारपोरेट के हित में किसानों की जमीन छीन रही है।
फतेहपुर से आए संजय विद्यार्थी ने कहा कि एक ऐसे समय में जब तमाम राजनीतिक आंदोलन धर्म और जातियों के गिरोह में बदल गए हैं रिहाई मंच का धर्म और जाति से ऊपर उठकर इंसाफ की लड़ाई को आगे बढ़ाना उम्मीद जगाता है। जो इस आंदोलन को नई सियासत के लिए तैयार कर रहा है।
बांदा से आए धनन्जय चौधरी ने कहा कि बंुदेलखंड के किसानों और दलितों की बदहाली के सवाल को उठाने में हर राजनीतिक दल हिचकता है क्योंकि आज कोई भी पार्टी कारपोरेट और सामंती गुंडागदी के खिलाफ नहीं बोलना चाहती। रिहाई मंच में बहां के किसानों और दलितों को उम्मीद दिख रही है।
फैजाबाद से आए अतहर शम्सी और इंसाफ अभियान फैजाबाद के संयोजक व पहाड़गंज के क्षेत्र पंचायत सदस्य हफीज उल्लाह ने कहा कि फैजाबाद में फिर से हिंदू मुस्लिम में तनाव पैदा करने की सुनियोजित साजिश रची जा रही है। जिसमें स्थानीय प्रशासन से लेकर सूबे और केंद्र की सत्ता से जुड़े नेता शामिल हैं। आफाक उल्लाह और मो0 आकिल ने भी बैठक में शिरकत की।
बलिया से आए बलबीर यादव ने कहा कि छात्रों और युवाओं में जिस तरह संघ परिवार अपने साम्प्रदायिक एजेंडे को लेकर जा रहा है वह देश को आंतरिक तौर पर कमजोर कर रहा है। रिहाई मंच का युवा नेतृत्व के सामने देश की एकता और अखंडता को बचाने की चुनौती है।
मुरादाबाद से आए इंसाफ अभियान के प्रदेश उपाध्यक्ष सलीम बेग ने कहा कि सपा अपने को मुसलमानों और उर्दू की हमदर्द बताती है लेकिन उसने उर्दू अरबी फारसी विश्वविद्यालय में इन तीनों भाषाओं की अनिवार्यता को ही खत्म कर दिया है। जो सपा के मुस्लिम विरोधी चरित्र को दर्शाता है।
इलाहाबाद से आए एडवोकेट संतोश सिंह ने कहा कि इंसाफ के लिए रिहाई मंच के संघर्ष ने उन अधिवक्ताओं को भी अपने गिरेबान में झांकने को मजबूर कर दिया है जिन्होंने एक समय आतंकवाद के नाम पर फंसाए गए बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों के मुकदमों को लड़ने वाले वकीलों को रोकने की कोशिश की थी। उन्हें यह समझ में आ गया है कि संघ परिवार ने उन्हें गुमराह करके न्याययिक प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश की थी।
प्रतापगढ़ से आए शम्स तबरेज ने कहा कि सपा सरकार ने आतंकवाद के नाम पर फंसाए गए निर्दोषों को छोड़ने का चुनावी वादा न निभाकर साबित कर दिया है कि वे संघ परिवार की एजेंट है। जिसे जनता अब समझ चुकी है।
संचालन रिहाई मंच के नेता राजीव यादव ने किया।
बैठक में 85 सदस्यीय रिहाई मंच प्रदेश आंदोलन समन्वय समिति का गठन किया गया।

About हस्तक्षेप

Check Also

media

82 हजार अखबार व 300 चैनल फिर भी मीडिया से दलित गायब!

मीडिया के लिये भी बने कानून- उर्मिलेश 82 thousand newspapers and 300 channels, yet Dalit …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: