Home » इन्साफ माँगने पर जनता को प्रताड़ित करना ही अखिलेश सरकार का समाजवाद- रिहाई मंच

इन्साफ माँगने पर जनता को प्रताड़ित करना ही अखिलेश सरकार का समाजवाद- रिहाई मंच

भैंस चोरी पर पुलिसकर्मियों का निलंबन और हत्यारों को सजा की माँग फर्जी मुकदमा, जेल
‘सबी हत्याकांड’ के आरोपियों को बचा रहा है इलाहाबाद प्रशासन

इंसाफ माँग रहे अमन पसंद अवाम का हो रहा उत्पीड़न- रिहाई मंच
रिहाई मंच के पाँच सदस्यीय जाँच दल ने किया रुदापुर, इलाहाबाद का दौरा
5 फरवरी, इलाहाबाद 2014। पिछली 28 जनवरी 2014 को चंदापुर गाँव के सबी अख्तर पुत्र वसीमुद्दीन की शांतिपुरम लेबर चैराहे पर सरेआम गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी। इंसाफ माँग रहे ग्रामीणों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और तकरीबन 50 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दबिश के नाम पर लूटपाट व महिलाओं से साथ अभद्रता की। इस घटना का संज्ञान लेते हुये रिहाई मंच के पाँच सदस्यीय जाँच दल ने चंदापुर और रुदापुर गाँव का दौरा कर पीड़ितों से मुलकात की।
जाँच दल ने बताया कि रुदापुर गाँव में पुलिस ने रात में दबिश के नाम पर लूटपाट और महिलाओं से अभद्रता की। जिन लोगों ने इंसाफ की माँग की थी, उन पर फर्जी मुकदमे लाद दिये गये हैं। रुदापुर गाँव में दहशत का माहौल कायम है और परिवार के पुरुष सदस्य अभी भी गाँव से बाहर हैं। जाँच दल ने पाया कि पुलिस ने सांप्रदायिक मानसिकता से गांव के मदरसे में भी तोड़-फोड़ की।
रिहाई मंच राज्य कार्यकारिणी सदस्य अनिल यादव ने कहा कि पूरे प्रदेश में अराजकता का माहौल है, एक तरफ जहाँ कैबिनेट मंत्री आजम खान की भैंसों की चोरी होने पर चौकी के पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया, वहीँ दूसरी ओर हत्या जैसे गम्भीर अपराध के अपराधियों को सजा दिलाने की माँग करने वालों को फर्जी मुकदमों में फँसाकर जेल भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय सपा विधायक अनसार अहमद ने पीड़ित परिवार के घर जाने की भी जरुरत नहीं समझी उल्टे हत्यारोपियों से मुलाकात की इससे साबित हो जाता है कि पूरे सूबे में समाजवादी पार्टी के लोगों और अपराधियों के गठजोड़ ने जंगल राज कायम कर दिया है।
रिहाई मंच राज्य कार्यकारिणी सदस्य मोहम्मद आरिफ ने कहा कि समाजवादी सरकार लोगों को सुरक्षा भी नहीं दे पा रही है। मुजफ्फरनगर से लेकर प्रदेश के कोने-कोने में अराजकता और भय का माहौल कायम है। इलाहाबाद की घटना ने साफ कर दिया है कि इन्साफ माँगने पर जनता को प्रताडि़त करना ही अखिलेश सरकार का समाजवाद है। इंसाफ माँगने पर फर्जी मुकदमें में फँसाकर जेल भेजना सरकार द्वारा लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है, जो कि एक गम्भीर सवाल है।
रिहाई मंच के जाँच दल ने सरकार से माँग की है कि सरकार पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपए मुआवजा और नौकरी दे और उनकी सुरक्षा की गारंटी करे। जाँच दल ने यह भी माँग की कि गाँव के लोगों से फर्जी मुकदमे वापस लिये जायें। पुलिस द्वारा दबिश के नाम पर की गयी लूटपाट और क्षति की भरपाई करते हुये दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्यवाई की जाये।
रिहाई मंच के पाँच सदस्यीय जाँच दल में तय्यब बारी खान, सोहराब अंसारी, अनिल यादव, मोहम्मद आरिफ और मोहम्मद शकीम शामिल थे। इस पूरी घटना पर रिहाई मंच जल्द जाँच रिपोर्ट लायेगा।

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