Home » समाचार » उप्र पुलिस की सांप्रदायिक मानसिकता को दर्शाता है मेरठ में कश्मीरी छात्रों पर देश द्रोह का मुकदमा-रिहाई मंच

उप्र पुलिस की सांप्रदायिक मानसिकता को दर्शाता है मेरठ में कश्मीरी छात्रों पर देश द्रोह का मुकदमा-रिहाई मंच

कश्मीरी छात्रों पर मुकदमा दर्ज करने वाले पुलिस अधिकारियों के निलंबन की माँग
लखनऊ 07 मार्च 2014। रिहाई मंच ने मेरठ स्थित स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वलिद्यालय में पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों पर गत दिनों भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान, पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाने के आरोप में दर्ज मुकदमे को उत्तर प्रदेश पुलिस के सांप्रदायिक और कश्मीर विरोधी मानसिकता का उदाहरण करार दिया है। मंच ने मुकदमा दर्ज करने वाले पुलिस अधिकारियों के निलंबन की माँग की है।
मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने कहा कि विश्वविद्यालय के कुलपति मंजूर अहमद का बयान सामने आ जाने के बाद कि, उन्होंने पुलिस में इस सन्दर्भ में कोई शिकायत ही दर्ज नही कराई थी तब, यह साबित हो जाता है कि कश्मीरी मुसलमानों के प्रति सांप्रदायिक पूर्वाग्रह के तहत पुलिस ने उनके ऊपर यह मुकदमा दर्ज किया था। यही वजह है कि बाद में उन्हें देशद्रोह के इस मुकदमे को हटाना पड़ गया।
अधिवक्ता व रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस कश्मीरी मुसलमानों के प्रति किस हद तक सांप्रदायिक द्वेष रखती है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान या दुनिया के किसी भी मुल्क के पक्ष में नारे लगाना देशद्रोह के दायरे में नहीं आता लेकिन, अपने सांप्रदायिक जेहेनियत और युवकों का करियर बिगाड़ने के उतावलेपन में उन्होंने इस तरह का आरोप मढ़ दिया जो कहीं तकनीकी आधार पर नहीं टिक सकता।
मोहम्मद शुऐब ने कहा कि इससे पहले भी आजमगढ़ के जमीयत-उल-फलाह मदरसे में पढ़ने वाले दो कश्मीरी छात्रों वसीम बट्ट और सज्जाद बट्ट को अखिलेश सरकार ने ही अलीगढ़ स्टेशन से आतंकी बताकर ट्रेन से उतार लिया था। यह साबित करता है कि कश्मीरी मुसलमानों को लेकर अखिलेश सरकार का रवैया पिछली बसपा सरकार से अलग नहीं है, जिनके कार्यकाल में उत्तर प्रदेश पुलिस ने नरेन्द्र मोदी की तर्ज पर मुख्यमंत्री मायावती को मारने की साजिश रचने के नाम पर चिनहट में 23 दिसंबर 2008 को दो गरीब कश्मीरी शाल विक्रेताओं को फर्जी मुठभेड़ में मार दिया था।

About हस्तक्षेप

Check Also

media

82 हजार अखबार व 300 चैनल फिर भी मीडिया से दलित गायब!

मीडिया के लिये भी बने कानून- उर्मिलेश 82 thousand newspapers and 300 channels, yet Dalit …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: