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………..और वह महिला उत्पीड़न में बदनाम हो गयी !

प्रदेश की राजनीति में दखलन्दाजी ने किया गैंग का शिकार
 सत्ता की चाहत ने पलट दिया गैंग की तस्वीर, लगा यौन उत्पीड़न का आरोप
आशीष सागर
जो महिलाओं के लिये ही मोर्चा सभांलती रही, उनके ऊपर हो रहे जुल्म का एक भी मुद्दा जिसे सुकून से सोने नही देता था और वह ही महिला उत्पीडन में बदनाम हो जाये तो क्या कहा जाय। जब समाज के लिये संघर्ष करने वाले लोगो पर ही मर्यादा का मर्दन करने के आरोप लगाये जाने लगे और उन्हे उत्पीड़न, धन हड़पने, बंधक बनाकर सामूहिक दुराचार के आरोपों में गिरफ्तार करने की मांगे प्रशासन से की जाने लगे तो आखिर आम आदमी, महिलायें भरोसा करे तो किस पर?
बुंदेलखंड से लेकर देश विदेश तक अपने प्रभाव का असर और गुलाबी रंग का बुखार पैदा करने वाली गुलाबी गैंग की कमांडर संपतपाल को नामी ’ द गार्जियन ’ समाचार पत्र ने भी दुनिया के 100 प्रभावशाली महिलाओं में शुमार किया है। हमेशा ही महिलाओं के लिये और खासकर दलित महिलाओं के लिये संघर्ष करने का उनका तरीका कई राजनीतिक दलों की गले की हड्डी बनता जा रहा है और वहीं सामाजिक संगठन भी इस बात को हजम नही कर पा रहे है। थाना बिसण्डा के कुर्रम क्षेत्र की निवासी सम्पत पाल का बचपन बड़े बिन्दास तरीके से गुजरा है। चित्रकूट के रौली कल्याणपुर ग्राम पंचायत से इस पंचवर्षीय चुनाव में उनके पुत्र  कामता पाल प्रधान निर्वाचित हुये है और यह गांव गैंग कमाण्डर की ससुराल भी है।
बीते दिवस एक दलित लडकी नीलम निवासी खरौंच, नरैनी ने यह आरोप लगाकर सभी के होश उडा दिये कि महिलाओं के लिये और खासकर प्रेमी जोड़ो के लिये पैरोकारी करने वाली संपत पाल ने एक लाख रू0 को हड़पने की नियत से पहले तो दो पक्षो में समझौता कराया और युवती को बरगलाने के बाद कई दिनों तक अपने ही बदौसा स्थित घर में गैंग से सम्बंध रखने वाले लोगो द्वारा दुराचार करवाया गया। युवती ने इस बात की तहरीर जनपद के पुलिस अधिक्षक के समक्ष दिये गये हलफनामें में की है। वहीं संपत पाल का कहना है कि उसने तो युवती को उसके कथित प्रेमी राजू से बचाकर समझौता कराया था और अपने घर मे पनाह दी थी।  बकौल संपत ने स्वीकार किया है कि युवती ने एक लाख रू0 रखने के लिये उन्हे दिये थे जिसे बाद में नीलम को सौपा जाना था। पीडि़त नीलम का कहना है कि उसके माता पिता भी संपत पाल के साथ मिल गये है और गुलाबी गैंग द्वारा ही उसके साथ यौन उत्पीड़न किया गया है।
बताते चले कि विधान सभा चुनाव 2012 का खुमार गुलाबी गैंग पर भी सिर चढकर बोल रहा है। आये दिन महिला मुद्दों पर सरकार को घेरना, विरोध प्रदर्शन और एक खास पार्टी का पक्ष लेकर खुद भी राजनीति के मैदान में आने की चाहत ने ही संपत की मुश्किले बढ़ा दी। इधर समाजसेवी संगठनों से जुड़े लोगो के अनुसार प्रदेश में जिस तरह से संपत पाल सरकार के विरोध मे खड़ी है उससे कई राजनेताओं की नींदें उड़ गयी है। अंदर की खबर है कि मिशन 2012 मे गुलाबी गैंग गुलाबी पार्टी के नाम से चुनाव में ताल ठोकेगा। संपत ने भी मानिकपुर क्षेत्र से कांग्रेस से टिकट देने की गुहार की है। जनपद बांदा में गैंग कमांडर पर नीलम द्वारा लगाये गये दुराचार के आरोप कितने सच है यह तो कानून की किताब ही तय करेगी लेकिन जिस तरह से गैंग की महिलायें लगातार मुकदमें के विरोध में विरोध प्रदर्शन कर रही है वह संपत की जमीन तैयार करने का ही एक हिस्सा है। उधर युवती को कोर्ट ने नाबालिग करार देते हुये नारी निकेतन भेजने का फैसला सुनाया है। वहीं युवती के माता पिता प्रेमी राजू पर लड़की को बहकाने के आरोप लगा रहे है। हकीकत क्या है और कैसे राजनीति के पचड़े में उलझी संपत निकल पायेगी आरोपो के इस बुने जाल से बाहर यह तो नीलम और गुलाबी गैंग में छिड़ा शब्द युद्ध ही तय करेगा मगर गुलाबी गैंग की सदस्या जमुना बाई ने अपनी मुखिया के खिलाफ, मूर्ती सिंह, राहत जहां, शकुन्तला, रामदुलारी सहित बनाय देते हुये कहा है कि सम्पत पाल ने गुलाबी गैंग की छवि खराब की है। नीलम पर लगाये गये चोरी के इंल्जाम बेबुनियाद है। बुन्देलखंड की इस समाज की पैरोकारी करने वाली महिला के ऊपर लगाये गये आरोप कहीं इस उठापटक में एक और शीलू कांड की तस्दीक न कर दे। ऐसा अन्देशा प्रकरण की नजाकत को देखकर और कुछ संगठनो, ब्राहम्ण सेवादल द्वारा संपत पाल के ऊपर लगाये सभी आरोपों को सही ठहराने से प्रतीत होता है। इधर पुलिस अभी खामोश है।

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