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कश्मीरी राजनीतिक दलों का पर्दाफाश, राज्यपाल शासन ही एकमात्र उपाय

कश्मीरी राजनीतिक दलों का पर्दाफाश, राज्यपाल शासन ही एकमात्र उपाय
    नई दिल्ली। नेशनल पैंथर्स पार्टी के मुख्य संरक्षक प्रो. भीमसिंह ने जम्मू-कश्मीर के विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल की राष्ट्रपति से मुलाकात पर आश्चर्य व्यक्त किया है, जिसमें जम्मू व लद्दाख की राजनीतिक पार्टियों का कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं था।
    पैंथर्स सुप्रीमो ने कहा कि उन कश्मीरी पार्टियों का प्रतिनिधिमंडल था, जो सात दशकों से जम्मू-कश्मीर में कश्मीरियों का शोषण कर रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने पैंथर्स पार्टी या जम्मू या लद्दाख के किसी राजनीतिक प्रतिनिधि को इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं किया। उन्होंने उमर अब्दुल्ला से पूछा कि ‘राजनीतिक मुद्दे‘ से उनका क्या मतलब है और इसका हल क्या है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीतिक मुद्दा यह है कि जम्मू-कश्मीर पर 1947 से, जब महाराजा हरिसिंह ने 26 अक्टूबर, 1947 को भारत संघ से विलय किया था,  बेरहमी के साथ शासन किया गया और लोगों को पुलिस और गोलियों से दबाया गयाहै।

प्रो. भीमसिंह ने कहा कि मैंने खुद आठ साल जेलों में काटे हैं।
प्रो. भीमसिंह ने राष्ट्रपति द्वारा पैंथर्स पार्टी को प्रतिनिधिमंडल में शामिल न करने पर आश्चर्य प्रकट किया, जो जम्मू-कश्मीर की एक मान्यताप्राप्त राजनीतिक पार्टी है। कश्मीर घाटी के 20 राजनीतिक नेताओं ने राष्ट्रपति से मुलाकात की, जिनके पास मांगों की सूची नहीं थी। उन्होंने कहा कि इस मुलाकात से सिर्फ उलझन ही पैदा हुई है और भारत के दुश्मनों के इस विश्वास को मजबूती है कि जम्मू-कश्मीर एक राजनीतिक समस्या है।
    प्रो. भीमसिंह ने कहा कि भाजपा ने कश्मीरी नेताओं से हाथ मिलाकर पिछले विधानसभा चुनावों में धांधली की, जिसकी वजह से आज विधानसभा में पैंथर्स पार्टी का प्रतिनिधित्व नहीं है और इस बात का आज पर्दाफाश हो गया है।
    प्रो. भीमसिंह ने राजनीतिक दलों, राष्ट्रीय नेतृत्व और उन लोगों से, जो तीनों क्षेत्रों, लद्दाख, कश्मीर और जम्मू-कश्मीर के लोगों को बाकी देश के नागरिकों के समान अधिकार देने का हक में है, से कहा कि धारा-370 में संशोधन समस्या का एकमात्र हल है, जिससे भारतीय संविधान को जम्मू-कश्मीर के बारे में कानून बनाने का अधिकार मिलसके।
उन्होंने सवाल किया कि जम्मू-कश्मीर  भारत का कैसा अटूट हिस्सा है, जिसके भारतीय संसद कानून नहीं बना सकती है। उन्होंने राष्ट्रपति पर जोर दिया कि अपने विशेष शक्तियों का प्रयोग करके राज्यपाल को आदेश दें कि वे जम्मू-कश्मीर की धारा-92 के तहत राज्यपाल शासन लगा दें, जो इस समय सभी समस्याओं का एकमात्र हल है।

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