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काँग्रेस देगी मुलायम परिवार को “वाकओवर“

दिनेश शाक्य
काँग्रेस, समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव से मधुर रिश्ते बनाये रखना चाह रही है इसी के चलते वह संसदीय चुनाव में मुलायम परिवार के सदस्यों के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारेगी। इस तरह की खबरें राजनैतिक हलकों में चल निकली हैं। इन खबरों के सामने आने के बाद जाहिर है कि काँग्रेस के मुलायम विरोधी नेताओं को जोर का झटका लगा होगा। ठीक इसके विपरीत भाजपा और आम आदमी पार्टी, मुलायम और उनके परिवार के खिलाफ कमर कस कर उतरने का दावा कर रहे हैं।
काँग्रेस की ओर से मुलायम परिवार के सदस्यों के खिलाफ प्रत्याशी ना उतारने का कदम सम्बंध बेहतर रखने के तहत उठाया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर इस तरह की भी बातें कही जा रही हैं कि मुलायम परिवार के सदस्यों वाले इलाकों में काँग्रेस वजूदहीन हो चुकी है, इस के चलते काँग्रेस ने अपनी दोहरी रणनीति के तहत सपा से यारी बनाने का सोचा है। काँग्रेस के बड़े नेताओं का मानना है कि मुलायम सिंह के प्रभाव वाले गढ़ में काँग्रेस वजूदहीन होती चली जा रही है ऐसे मे काँग्रेस को ताकतवर बना पाना बेहद मुश्किल है तो फिर क्यों ना सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और उनके परिवार के सदस्यों को पूरी तरह से जितवा करके मुलायम सिंह यादव की सहानुभूति को हासिल किया जाये।
राजनैतिक हलकों से बाहर निकल कर आ रही खबरों में कहा जा रहा है कि समाजवादी पार्टी के साथ अपने बेहतर रिश्ते कायम रखने के नजरिए से कांग्रेस आगामी लोकसभा चुनाव के लिए मैनपुरी, कन्नौज, फिरोजाबाद और बदायूँ में अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी। मैनपुरी सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव का निर्वाचन क्षेत्र है जबकि कन्नौज से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव चुनाव लड़ती हैं। बदायूँ से मुलायम के भतीजे धर्मेंद्र यादव चुनाव मैदान में रहते हैं। सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राम गोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव पहली बार फिरोजाबाद सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान मे उतर रहे हैं। करीब एक साल से उनका जोर-सोर से प्रचार भी जारी है। इस सीट से मौजूदा काँग्रेस सांसद राज बब्बर को किसी दूसरे स्थान पर लडाने की खबरे काँग्रेस हलकों में तैरना शुरू हो गयी हैं।
2009 के चुनाव में राज बब्बर ने उपचुनाव में यहाँ से डिम्पल यादव को हराया था। सबसे हैरत भरी बात तो यह है कि काँग्रेस, मुलायम सिंह यादव के गृह जिले इटावा में भी अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी। जब कि साल 2009 में काँग्रेस ने महान दल नामक सहयोगी दल के प्रत्याशी शिवराम दोहरे को चुनाव मैदान में उतारा था। दोहरे को किसी भी काँग्रेस जन ने स्वीकार नही किया परिणाम स्वरूप उन्हें मात्र 5824 वोट के तौर काँग्रेस की ताकत सामने आई।
2009 के लोकसभा चुनाव में भी काँग्रेस ने इटावा, मैनपुरी और कन्नौज में अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे। इसके बदले सपा ने भी रायबरेली और अमेठी में अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे। सपा ने इस बार भी अभी तक रायबरेली और अमेठी में अपने उम्मीदवार घोषित नहीं किये हैं। कांग्रेस के कई नेताओं ने इस बार सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और डिम्पल यादव के खिलाफ उम्मीदवार उतारने की माँग की थी। इस पर सपा ने भी अमेठी और रायबरेली में अपने उम्मीदवार उतारने की बात कह कर सीधे तौर पर काँग्रेस हाईकमान को चुनौती दे डाली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद जब कन्नौज से डिंपल यादव को चुनाव मैदान मे कार्यकर्ताओं की माँग उतारा गया तब भी कांग्रेस की और से कोई उम्मीदवारी को सामने नही आया था ।
लगता है कि समाजवादी पार्टी की ओर से दी गई इस चुनौती के कारण ही काँग्रेस ने इस तरह का निर्णय लिया है जिसमें कहा जा रहा है कि मुलायम परिवार के सदस्यों के खिलाफ काँग्रेस अपने-अपने प्रत्याशी नहीं उतारेगी। काँग्रेस और समाजवादी पार्टी से जुड़ी इन महत्वपूर्ण खबरों को लेकर दोनों दलों के बड़े नेताओं की ओर से कोई प्रतिक्रिया नही दी जा रही है।
जनादेश न्यूज़ नेटवर्क

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