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कांग्रेस को ढूँढते रह जाओगे मुलायम गढ़ में

दिनेश शाक्य
एक समय कांग्रेस को परिवारवाद के नाम पर आड़े हाथों लेने वाले सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव का गढ़ उनकी ताकत के कारण इतना मजबूत हो चला है कि करीब तीन दशक से कांग्रेस धरातल पर आ गयी है। धरातल पर आ चुकी कांग्रेस के सामने सकंट इस कदर छाया हुआ है कि चुनाव मैदान में उतरने के लिये उसे उम्मीदवार ढूँढे नही मिल रहे हैं। कांग्रेस की ओर से जो लोग टिकट के लिये दावेदारी ठोंक रहे हैं उनमें से अधिकांश तो ऐसे भी माने जा रहे हैं कि टिकट मिलने के बाद एक दिन का खर्चा भी नही उठा सकते हैं। कांग्रेस के कुछ जिम्मेदार नेता इन दावेदारों की हैसियत पर सवाल अपने इन शब्दो के जरिये उठा रहे हैं। इटावा कांग्रेस ईकाई के अध्यक्ष अनिल यादव बताते हैं कि कांग्रेस से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिये 24 लोगों टिकट माँगा है इनमे से कई महिलाएं भी हैं।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता अशोक सिंह दावे के साथ कहते हैं कि कांग्रेस मुलायम सिंह यादव के गढ़ में पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतरने जा रही है। इस संदर्भ मे बड़े स्तर पर उम्मीदवारों की सूचियों में से वजूद वाले उम्मीदवारो के नामों का चयन करने में कांग्रेस हाईकमान लगी हुयी है। चाहे इटावा हो या फिर मैनपुरी कन्नौज या फिर फिरोजाबाद एटा जलेसर फर्रूखाबाद सब जगह कांग्रेस पूरी मजबूती और मुस्तैदी के साथ चुनाव लड़ेगी।
सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के गढ़ इटावा मे करीब 30 साल पहले कांग्रेस ने अपना परचम फहराया था उसके बाद से लगातार कांग्रेस अपना परचम फहराने की कोशिश कर रही है लेकिन मुलायम के गढ़ में कांग्रेस को कामयाबी नहीं मिल रही है वैसे टिकट पाने की लाइन में तो दर्जनो कांग्रेसी लगे हुये हैं।
31 अक्टूबर 1984 को अपने ही सुरक्षाकर्मियों के हाथों मारी गयी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उपजी लहर के बाद मुलायम सिंह यादव के गढ़ इटावा मे संसदीय चुनाव में कांग्रेस के चौधरी रघुराज सिंह को 1984 मे विजय मिली थी। इंदिरा लहर का असर यह हुआ कि कांग्रेस के चौधरी रघुराज सिंह को एक लाख 84 हजार चार सौ चार मत मिले और उन्होंने करीबी प्रतिद्वंदी लोकदल के धनीराम वर्मा से पराजित किया। धनीराम वर्मा को इस चुनाव में 161336 मत मिले। इस तरह से चौधरी रधुराज सिंह 23068 मतों से विजयी रहे।
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद यह एक ऐसा चुनाव था जिसमें कांग्रेस को विजय मिली लेकिन उसके बाद कांग्रेस आज तक जीत के लिये तरस रही है। सबसे हैरत की बात यह है कि इस चुनाव के बाद मुलायम सिंह यादव की ताकत लगातार बढ़ती ही चली गयी और कांग्रेस का जनाधार धराशाई होता चला गया।
अगर इंदिरा लहर की बात करें तो इटावा के आसपास कन्नौज सीट से काग्रेस से शीला दीक्षित, फर्रूखाबाद से खुर्शीद आलम खान, मैनपुरी से बलराम सिंह यादव, जलेसर से कैलाश यादव, फिरोजाबाद से गंगाराम और एटा से लोकदल के महफूज अली को जीत मिली थी। 1984 मे मुलायम सिंह यादव के गढ़ के आसपास कांग्रेस का ही तिलिस्म काबिज था, लेकिन एटा में कांग्रेस के मुशीर खां मुलायम के सिपहसालार लोकदल के महमूद अली से चित हो गये।
इंदिरा लहर में मुलायम गढ़ मे काबिज हुयी कांग्रेस मंडल चमत्कार में बुरी तरह से ध्वस्त हो गयी। 1989 के चुनाव मे मंडल लहर चरम पर हो चुकी थी, ऐसे में इटावा संसदीय चुनाव में जनता दल से राम सिंह शाक्य (214264) ने कांग्रेस के सत्यनारायण दुबे (171249) को पराजित करने मे कामयाबी पाई। कुछ ऐसा ही कन्नौज की सीट पर हुआ जहाँ पर कांग्रेस की शीला दीक्षित को जद के छोटे सिंह यादव ने पराजित कर दिया। छोटे सिंह को 220840 और शीला को 167007 मत मिले। फर्रूखाबाद में जनता दल के संतोष भारतीय 165452 ने कांग्रेस के सलमान खुर्शीद 157968 को हराया। मैनपुरी में मुलायम सिंह यादव के गुरू और जनता दल के प्रत्याशी उदयप्रताप सिंह (239660) ने कांग्रेस के कैलाश चंद्र यादव (155369) को पराजित किया। जलेसर में जनता दल के मुलतान सिंह (221590) ने कांग्रेस के कैलाश यादव (123694) को पराजित किया। फिरोजाबाद से रामजी लाल सुमन (283774) ने कांग्रेस के गंगाराम (110948) को पराजित किया लेकिन मंडल लहर का असर एटा जैसी सीट पर नहीं दिखा क्यों कि यहाँ से भाजपा के महादीपक सिंह शाक्य (143442) ने कांग्रेस के सलीम शेरवानी (135969) को हराया। यहाँ जनता दल तीसरे नंबर पर रहा है।
1991 मे राममंदिर लहर के तौर पर सब जानते हैं। इस दौर मे हुये संसदीय चुनाव मे मुलायम सिंह यादव ने इटावा संसदीय चुनाव में बसपा के कांशीराम को चुनाव मैदान में उतरवा करके सहयोग किया। परिणाम स्वरूप कांशीराम (141290) की जीत हुयी लेकिन मुलायम सिंह यादव के दल, जनता पार्टी के प्रत्याशी रामसिंह शाक्य (82624) तीसरे नंबर पर जा पहुँचे लेकिन कांग्रेस के श्री शंकर तिवारी (74149) चौथे नंबर पर सिमट गये।
कन्नौज मे भी कांग्रेस के प्रत्याशी चंद्र भूषण सिंह को 68480 मत ही मिले लेकिन जनता पार्टी के छोटे सिंह 17594 मत पा कर विजयी हुये। मैनपुरी मे कांग्रेस के कैलाश चंद्र यादव को 93159 वोट मिले लेकिन जीत जनता पार्टी के उदयप्रताप सिंह 126463 को मिली। फिरोजाबाद मे कांग्रेस के आजाद कुमार कर्दम 66183 वोट ही पा सके। एटा मे भी कांग्रेस के कैलाश यादव 56939 वोट मिले लेकिन जलेसर सीट से तो कांग्रेस अपना उम्मीदवार ही खड़ा करने की हिम्मत नहीं दिखा सकी। कांग्रेस की इज्जत बचाने का काम अगर किसी ने किया तो वो निकले फर्रूखाबाद के सलमान खुर्शीद जिन्होंने जीत हासिल की अन्यथा पूरी मुलायम बेल्ट मे कांग्रेस चित्त ही रही है।
1996 के चुनाव का अगर हम ज्रिक करे तो मुलायम के गढ़ में कांग्रेस चारों खाने चित हुयी। इटावा और आसपास की सातों सीटों पर कांग्रेस बुरी तरह से चित्त हुयी है। इटावा संसदीय चुनाव में कांग्रेस के नरेंद्र नाथ चतुर्वेदी आये जो 14743 मत ही पा सके, इसी तरह से कन्नौज से रामअवतार दीक्षित पर कांग्रेस ने जोर अजमाया उन्हें सिर्फ 9957 वोट मिले। मैनपुरी से कैलाश यादव को 14993, फिरोजाबाद से गुलाब सेहरा को 5947, एटा से गिरीश चंद्र मिश्रा को 24940, जलेसर से बलराम सिंह यादव को 72917 वोट मिले। अगर इस चुनाव में कोई सही हालात में रहा है तो वो हैं फर्रूखाबाद के सलमान खुर्शीद जिनको 97261 लोगों का जनसर्मथन रहा है।
1998 में तो 1996 से बुरी हालत रही। कांग्रेस के प्रत्याशियों की इटावा में कांग्रेस के सत्यप्रकाश धनगर 10875, कन्नौज से प्रतिमा चतुर्वेदी को 17144, मैनपुरी से शिवनाथ दीक्षित को 6699, जलेसर से अवधेश यादव को 7505, एटा से के.पी.सिंह को 7662, फिरोजाबाद से बच्चू सिंह को मात्र 5642 ही वोट मिले। कांग्रेस के उम्मीदवारों को मिले वोट कहीं से भी नहीं लग रहे हैं कि यह देश की वजूद वाली पार्टी है। इस चुनाव में फर्रूखाबाद के सलमान खर्शीद ने जरूर 180531 वोट पा कर कांग्रेस की इज्जत को बचाया।
1999 में इटावा से सरिता भदौरिया को चुनाव मैदान में उतारा गया इनके पति कांग्रेस महासचिव अभयवीर सिंह भदौरिया की हत्या कर दी थी परिणाम स्वरूप चुनाव मैदान में उतरने पर कुछ सहानुभूति मिली। सरिता भदौरिया को 51868 वोट मिले। सभी राजनैतिक दलों ने इस वोट को कांग्रेस का नहीं सरिता भदौरिया का जनाधार माना। कन्नौज से दिग्विजय सिंह को 27082, मैनपुरी से मुंशीलाल को 15139, जलेसर से जावेद अली को 53717, एटा से राजेंद्र सिंह को 71892 वोट ही मिले। फिरोजाबाद से कांग्रेस को कोई उम्मीदवार ही चुनाव मैदान मे उतरने के लिये नहीं मिला। फर्रूखाबाद से सलमान खुर्शीद ने अपनी पत्नी लुईस खुर्शीद को चुनाव मैदान में उतारा, जहाँ उनको 155601 वोट मिले।
2004 में इटावा में कांग्रेस से राजेंद्र प्रसाद, जिनको कोई जानता पहचानता नहीं था, को चुनाव मैदान में उतारा गया। राजेंद्र प्रसाद अपनी और कांग्रेसियों को तमाम मेहनत मशक्कत के बाद 9482 वोट ही पा सके। इसी तरह से कन्नौज से विनय शुक्ला को 10501, मैनपुरी से राजेंद्र जादौन को 9897, एटा से रविन्द्र को 22442, फिरोजाबाद को 28105, जलेसर से शिवराज सिंह को 12735 वोट ही मिले लेकिन पहले की ही तरह फर्रूखाबाद से लुईस खुर्शीद को 177380 वोट मिले।
पिछले लोकसभा चुनाव यानि साल 2009 में इटावा से कांग्रेस को कोई उम्मीदवार नहीं मिला क्यों कि कांग्रेस हाईकमान ने महानदल से गठबंधन करने के बाद रिटायर्ड आयकर अधिकारी शिवराम दोहरे को चुनाव मैदान मे उतारा, जिनको किसी भी कांग्रेसी ने सहयोग नहीं किया। परिणाम स्वरूप कांग्रेस रूपी महान दल को मात्र 5824 वोट ही मिल पाये। मुलायम सिंह यादव और उनके बेटे अखिलेश यादव के निर्वाचन क्षेत्र मैनपुरी और कन्नौज से कोई उम्मीदवार कांग्रेस को चुनाव मैदान में उतरने के लिये नहीं मिला। फिरोजाबाद से राजेंद्र पाल को 6340, एटा से महादीपक शाक्य को 25037 मत मिले है।
भले ही कांग्रेसी दावा कर रहे हों कि मुलायम बेल्ट मे वो ताकत से लड़ेंगे लेकिन 1984 मे इंदिरा हत्या लहर के बाद के नतीजे यह बताने के लिये काफी समझे जा सकते हैं कि मुलायम बेल्ट मे कांग्रेस हाशिये पर जा चुकी है।
जनादेश न्यूज़ नेटवर्क

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