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कानून के राज के लिए, इंसाफ और हिफाजत के लिए दिल्ली चलो

कानून के राज के लिए! इंसाफ और हिफाजत के लिए!
कारपोरेट को लोकपाल के दायरे में लाने के लिए!
रोजगार के अधिकार के लिए!
खेती को कारपोरेट के हवाले नहीं-सहकारी खेती को प्रोत्साहन के लिए!
दिल्ली चलो
दस दिवसीय घरना व उपवास
07 फरवरी से                                                  जंतर मंतर पर
साथियो,

देश में एक बार फिर बदलाव के पक्ष में जनता का विश्वास बढ़ा है। जिन लोगों ने अवाम की जिदंगी को तबाह कर रखा है उनकी शिनाख्त अब जनता करने लगी है। आने वाले दिनों में ऐसी ताकतों के बारे में जनता की समझ और भी साफ हो जायेगी। लोकपाल कानून देश में पारित हो गया। कौन नहीं जानता कि कारपोरेट घरानों यानी बड़े पूंजीपतियों ने पूरे राजनीतिक तंत्र को भ्रष्ट कर दिया है, सरकारी परियोजनाओं में ठेके, टेण्डर या पीपीपी प्रोजेक्ट हासिल कर प्राकृतिक संसाधनों व जनता की सम्पत्ति को औने-पौने दाम पर सरकारों से खरीद लिया है, अपने मुनाफे के लिए देश को तबाह कर दिया है। लेकिन कारपोरेट को लोकपाल के दायरे में नहीं रखा गया है। इस सवाल पर देश में अभी और लड़ाई होनी बाकी है।

आए दिन पेट्रोल-डीजल-रसोई गैस के दाम तेल कम्पनियों को फायदा पहुंचाने और सरकारी तामझाम पर खर्च करने के लिए बढ़ाए जा रहे हंै। यहां तक कि खाने की चीजों व सब्जियों में भी सट्टेबाजी हो रही है और जिसके कारण दाम बढ रहे हैं लेकिन इस पर रोक नहीं लग रही है। प्रधानमंत्री महोदय ने यह स्वीकार किया है कि वह महंगाई नहीं रोक पाए पर वह यह नहीं बता रहे है कि महंगाई की प्रमुख वजह सट्टेबाजी पर रोक क्यो नहीं लगा पाए ? प्रधानमंत्री कहते हैं कि हम रोजगार नहीं दे पाए, महोदय जब आप खेती-बाड़ी, कल-कारखानों को विदेशी कम्पनियों और कारपोरेट घरानों के हवाले करने की रोजगारविहीन आर्थिक नीतियों को लागू करने में लगे रहे तब रोजगार पैदा ही कहां से होगा। देश आजाद हो रहा था, गांधी जी देश के विभाजन से हताश और निराश थे, बन रहे संविधान में रोजगार को मौलिक अधिकार नहीं बनाया गया, उनके दबाब में इसे संविधान के नीति निर्देशक तत्वों में डाला गया। वीपी सिंह की सरकार बनी, सरकार और राष्ट्रपति ने घोषणा भी की कि रोजगार के अधिकार को संविधान के मौलिक अधिकारों में शामिल किया जायेगा लेकिन आज तक यह नहीं हुआ। नौजवान ही नहीं प्रधानमंत्री जी आपकी नीतियों, जिसके पैरोकार मोदी से लेकर मुलायम तक है, ने किसानों और हमारे कुटीर उद्योगों में लगे लोगों की जिदंगी को तबाह कर दिया। लाखों किसान और गरीब आत्महत्या कर चुके है और रोज ब रोज हो रही आत्महत्याओं का कोई आकंडा नहीं है। हालत यह हो गयी है कि किसानों के लाभकारी मूल्य की बात तो छोड़ दीजिए जो उन्होंने पैदा किया है वह भी खरीदा नहीं जा रहा है और जो कुछ खरीदा गया है उसका न्यायालयों के आदेश के बाद भी भुगतान नहीं किया गया। कानून व्यवस्था की हालत यह है कि आए दिन तमाम विराधों के बाबजूद महिलाओं को अपमान और उत्पीड़न का शिकार होना पड़ रहा है। समाज के उत्पीडि़त तबके चैतरफा हमले के शिकार है। हमारे देश में जो लोग दंगाईयों द्वारा घरों से बेदखल किए जा रहे है और कब्रगाहों तक में शरण लिए है उनके रैनबसेरों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है।

साथियो,

जब तक लोकतंत्र के नाम पर कारपोरेट राज चलेगा तब तक देश में तबाही, बर्बादी, दंगा-फसाद जारी रहेगा। इसलिए कारपोरेट राज के खिलाफ जनता के राज के लिए निर्णायक लड़ाई लड़नी होगी, बीच का कोई रास्ता नहीं है। आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) अपने जन्मकाल से ही जनपक्षीय नीतियों और जनराजनीति के लिए लड़ाई जारी रखे हुए है। रोजगार को मौलिक अधिकार बनाने, कारपोरेट घरानों को लोकपाल कानून के दायरे में ले आने व उन पर टैक्स बढ़ाने, राष्ट्रीय वेतन नीति बनाने, शिक्षा-स्वास्थ्य-कृषि समेत जनहित के मदों पर खर्च बढ़ाने, अल्पसंख्यकों व महिलाओं की सुरक्षा की गारंटी और पूरे देश में कानून का राज स्थापित करने जैसे महत्वपूर्ण सवालों पर 07 फरवरी से जंतर-मंतर पर दस दिवसीय घरना व उपवास किया जायेगा।
आंदोलन के मुद्दे
रोजगार के सम्बन्ध में –

1.   रोजगार के अधिकार को संविधान में मौलिक अधिकार घोषित किया जाए।

2.   देश के बड़े पूंजीपतियों यानी कारपोरेट घरानों पर सम्पत्ति कर में भारी बढ़ोतरी की जाए तथा तमाम छूटों एवं इसके कानूनों व नियमों में मौजूद कमियों का अंत कर इसके दायरे को व्यापक बनाया जाए। उत्तराधिकार कर को लागू किया जाए।

3.   एक राष्ट्रीय वेतन और आय नीति बनायी जाए जो विभिन्न क्षेत्रों व वर्गों के बीच असमानता में भारी कमी करे।

4.   विभिन्न विभागों/उद्योगों में स्थायी काम में कार्यरत दिहाड़ी व ठेका मजदूरों को विनियमित किया जाए।

5.   आंगनबाड़ी, आशा, शिक्षा मित्रों व रसोइयों समेत सभी स्कीम वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।

6.   न्यूनतम मजदूरी 10,000 रुपये निर्धारित की जाए।

7.   सार्वजनिक क्षेत्रों, सरकारी सेवाओं व सभी स्तर के शिक्षा संस्थाओं में रिक्त पदों को तुरन्त भरा जाए।

8.   मनरेगा में हर हाल में 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया जाए, रोजगार न देने की स्थिति में बेकारी भत्ता दिया जाय और बकाया मजदूरी का तुरन्त भुगतान किया जाए। मनरेगा जैसी योजना को शहरों में भी लागू किया जाए।

किसानों के हित में –

1.   तत्काल प्रभाव से कृषि लागत मूल्य आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया जाए।

2.   कृषि के कारपोरेटीकरण की प्रत्यक्ष व परोक्ष पहल पर रोक लगे और इसके स्थान पर सहकारी कृषि को आर्थिक एवं प्रशासनिक मदद दी जाए। ़

3.   बंद पड़ी अथवा बंदी के कगार पर खड़ी निजी चीनी मिलों को किसान सहकारी समितियों को सौपा जाए तथा इनके संचालन के लिए राज्य सरकार द्वारा पूरी मदद दी जाए।

4.   कृषि योग्य उपजाऊ भूमि के अधिग्रहण पर रोक लगें और किसानों व भूमिहीनों के हितों की रक्षा करने वाली भूमि अधिग्रहण व भूमि उपयोग नीति बनायी जाए।

5.   वनाधिकार कानून को लागू किया जाए।

6.   किसानों को सस्ते दर पर खाद, बीज, डीजल, बिजली आदि की व्यवस्था की जाए।

7.   ठेका खेती और जेनेटिक सीड के इस्तेमाल पर रोक लगायी जाए।

भ्रष्टाचार व महंगाई के खिलाफ –

1.   कारपोरेट घराने जो सरकारी परियोजनाओं में ठेके, टेण्डर या पीपीपी प्रोजेक्ट हासिल करते है, उन्हें लोकपाल के दायरे में लाया जाए।

2.   बढ़ती महंगाई रोकने के लिए सट्टेबाजी, कालाबाजारी व जमाखोरी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए और वायदा कारोबार पर रोक लगायी जाए।

3.   मूलभूत जरूरतों की आपूर्ति में बिचैलियों के संगठनों की भूमिका को नियंत्रित किया जाए और महंगाई पर लगाम लगाने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत किया जाए तथा उसका विस्तार किया जाए।

4.   प्राकृतिक संसाधनों की लूट अवैध खनन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगायी जाये और उत्तर प्रदेश में जारी अवैध खनन की सीबीआई जांच करायी जाए।

उद्योग व मजदूरों के लिए –

1.   बिजली दरों को बढ़ाना बंद किया जाए। बिजली क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगायी जाए और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयांे को पूरी क्षमता से चलाया जाए। बिजली क्षेत्र के भ्रष्टाचार की सीबीआई से जांच करायी जाए।

2.   बुनकरों के कर्ज माफ किये जाए और उन्हें गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की तरह अन्य सभी सुविधायें मुहैया करायी जाए। बुनकरी समेत लधु व कुटीर उद्योगों को मुफ्त में बिजली दी जाए।

3.   बुनकरों, धरेलू कामगार महिलाओं समेत असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा के बने केन्द्रीय कानून 2008 को लागू किया जाए।

साम्प्रदायिकता के खिलाफ –

1.   साम्प्रदायिकता पर रोक लगाने के लिए कड़ा कानून बनाकर कड़ी कार्रवाई की जाए।

2.   साम्प्रदायिकता के मामलों की सुनवाई फास्ट टैªक कोर्ट द्वारा की जाए।

3.   मुजफ्फरनगर के साथ ही सपा सरकार के शासनकाल में हुए दंगों की न्यायिक जांच करायी जाए और इसके लिए जवाबदेह नेताओं, पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को दंडित किया जाए।

4.   आतंकवाद के नाम पर गिरफ्तार बेकसूर अल्पसंख्यक युवकों के मुकदमों के निस्तारण के लिए विशेष अदालतों का गठन हो और जितनी जल्दी हो सके जो निर्दोष हो, उनकी रिहाई हो और जो लोग अदालत द्वारा निर्दोष करार देकर छूट गये हैं, उन सबके पुनर्वास की गारंटी की जाए और उन्हें क्षतिपूर्ति दी जाए।

5.   उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक आयोग का तत्काल गठन किया जाए।

सामाजिक न्याय के सम्बन्ध में-

1.   पिछड़े मुसलमानों का कोटा अन्य पिछड़े वर्ग से अलग किया जाए। धारा 341 में संशोधन कर दलित मुसलमानों व ईसाइयों को अनुसूचित जाति में शामिल किया जाए। सच्चर कमेटी व रंगनाथ मिश्रा कमेटी की सिफारिशों को लागू किया जाय।

2.   अति पिछड़ी जातियों को अन्य पिछड़े वर्ग में से अलग आरक्षण कोटा दिया जाए।

3.   एससी/एसटी के कोटे के रिक्त सरकारी पदों को भरा जाए।

4.   निजी क्षेत्र में भी दलितों, आदिवासियों, अन्य पिछड़ा वर्ग व अति पिछड़ा वर्ग को आरक्षण दिया जाए।

5.   उ0 प्र0 की कोल जैसी आदिवासी जातियों को जनजाति का दर्जा दिया जाए।

जनहित के सम्बन्ध में-

1.   कृषि, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य समेत जनहित के मदों में खर्च को बढ़ाया जाए।

2.   शिक्षा व स्वास्थ्य सेवा का बाजारीकरण बंद किया जाए और अनिवार्य तौर पर समान पड़ोस विद्यालय व्यवस्था (छमपहीइवनतीववक ब्वउउवद ैबीववस ैलेजमउ) लागू की जाए। सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा का विस्तार किया जाए।

महिलाओं के सम्बन्ध में-

1.   महिला आरक्षण बिल संसद द्वारा पारित किया जाए।

2.   महिलाओं की हर हाल में सुरक्षा की गारंटी की जाये और उन पर जारी हिंसा के प्रति पुलिस को जवाबदेह बनाया जाये। उनके खिलाफ हुई हिंसा की तत्काल एफ0आई0आर0 दर्ज हो और महिला हिंसा व बलात्कार जैसे संवेदनशील सवालों की फास्ट टैªक कोर्ट द्वारा सुनवाई की जाए।

3.   महिलाओं को पुरूषों के बराबर वेतन का कड़ाई से अनुपालन कराया जाए।

4.   माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार सभी विभागों में ‘वूमेन सेल’ का तत्काल गठन किया जाए।

निवेदक

अखिलेन्द्र प्रताप सिंह, राष्ट्रीय संयोजक, आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ), प्रो0 निहालुद्दीन अहमद, उत्तरा विश्वविद्यालय, मलेशिया, एस. आर. दारापुरी, पूर्व आईजी व राष्ट्रीय प्रवक्ता, आइपीएफ।

सम्पर्क पताः 4 माल एवेन्यू, निकट सत्संग भवन, लखनऊ, मो0 09450153307।

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