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किसानों ने किया संघर्ष का एलान

छिंदवाड़ा। जाने-माने किसान नेता डॉ. सुनीलम ने कांग्रेस की सरकार के संरक्षण में मुकेश अंबानी का बिजली कंपनियों में घोटाला करने तथा अदानी द्वारा छह करोड़ वर्ग मीटर जमीन मिट्टी के दाम पर गुजरात सरकार द्वारा आवंटित किये जाने के खिलाफ चलाए जा रहे संघर्ष का समर्थन करते हुए कहा है कि किसानों को पूरी ताकत के साथ इस संघर्ष के समर्थन करना चाहिए।
डॉ. सुनीलम छिंदवाड़ा के भूला मोहगांव में घुडु पटेल की अध्यक्षता में संपन्न किसानों की महापंचायत को संबोधित कर रहे थे। महापंचाय में किसानों ने 43 मुद्दों का किसान एजेण्डा पारित किया तथा किसानों की ओर से इस एजेण्डा को सभी राजनैतिक दलों को भेज कर उनसे इन मुद्दों को अपने घोषणा पत्र में शामिल करने की अपील करने का निर्णय लिया गया। किसान नेताओं के पहुँचने पर ढोल बाजे तथा फटाखे फोड़ कर किसानों द्वारा भूला मोहगांव में भव्य स्वागत किया गया। उपस्थित पुलिस के उच्चाधिकारियों द्वारा महापंचायत के कार्यक्रम के बीच पहुँचकर माईक बन्द कराया गया तथा टेन्ट उखडवा दिया गया।
पूर्व विधायक एवं किसान संघर्ष समिति के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. सुनीलम ने बताया कि तीन मार्च को लखनऊ में देश के अनेक किसान संगठनों द्वारा मिलकर किसान एजेण्डा तैयार किया गया था। उस एजेण्डा में छिंदवाड़ा के मुद्दे जोड़कर हर मुद्दे को हाथ खड़ा कर किसानों की सहमति से पारित किया गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राजनैतिक दल जरूर किसान एजेण्डा पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे तथा किसान एजेण्डा का समर्थन करने वाले उम्मीदवार एवं पार्टी का किसानों द्वारा समर्थन किया जायेगा। डॉ. सुनीलम ने कहा कि 1998 में जब किसान संघर्ष समिति ने पाँच हजार रूपये एकड़ मुआवजे की मांग की थी तब पार्टियों ने उन पर सपना दिखाने का आरोप लागाया था लेकिन आज कांग्रेस पार्टी 25 हजार रुपए प्रति एकड़ की मांग कर रही है तथा मुख्यमंत्री 15 हजार रू. प्रति हेक्टेयर मुआवजा देने की घोषणा कर चुके हैं। डॉ. सुनीलम ने कहा कि केन्द्र सरकार को प्रदेश के 20 हजार गांवो में हुई नुकसानी के मुताबिक राज्य सरकार को पैकेज देना चाहिए तथा राज्य सरकार को घोषणाओं के मुताबिक मुआवजा राशि का भुगतान अगले सात दिनो में अंतरिम तौर पर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के किसानों को विकास के नाम पर किसानों का विनाश करने वाले कांग्रेस के सांसद को चुनाव कराकर सबक सिखाना चाहिए।
जन आंदोलनो के राष्ट्रीय समन्वय की संयोजक तथा आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार मेधा पाटकर द्वारा फोन के माध्यम से किसानों को संबोधित कर उनसे कंपनियों के लिए काम करने वाली पार्टियों और नेताओं को हराने की अपील की गई। उन्होंने कहा कि अब तक हम किसान संघर्ष समिति तथा अन्य जन संगठनों के माध्यम से संघर्ष करते रहे हैं लेकिन अब संसद मे जाकर किसानों की आवाज उठायेंगे। उन्होंने कहा कि यदि आराधना भार्गव चुनाव लड़ेंगी तो मै अवश्य उनके समर्थन में छिंदवाड़ा आऊँगी।
किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए आराधना भार्गव ने कहा कि नया भू-अर्जन कानून संसद द्वारा पारित किये जाने के बाद सिंचित बहुफसलीय भूमि का अधिग्रहण बिना ग्राम सभा की सहमति के तथा सोशल आडिट के बिना किया जाना संभव नहीं है। इस कारण छिंदवाड़ा में तत्काल प्रभाव से भूमि अधिग्रहण पर रोक लगाई जानी चाहिए। जिन किसानों ने अभी तक मुआवजा राशि अपने खाते से नहीं निकाली है उन सभी किसानों को नये कानून के प्रावधानो के मुताबिक मुआवजा राशि का भुगतान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जेपी ऐसोसीएट द्वारा बिछुआ पठार तथा मंण्डला मण्डली में एक लाख रूपये की दर से भू अधिग्रहण किया गया है। उन्हें कर्मचारियों को दिये जाने वाले वेतन के बराबर वेतन और सुविधाओं पर नौकरी उपलब्ध कराकर मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार कम से कम पांच लाख रू. की दर पर मुआवजा दिया जाना चाहिए।
एड. आराधना भार्गव ने कहा- मैं किसानों को भरोसा दिलाती हूँ कि मैं हर मुद्दे पर आप के साथ मिलकर संघर्ष करूंगी तथा हर मंच पर इन मुद्दों को उठाने का कार्य करूंगी।
किसान महापंचायत को बलराम पटेल, नरसिंह पूर्व संरपंच, रौब सिंह पटेल, कुन्ज बिहारी पटेल, देवी चंद्रवंशी , कुंज बिहारी शर्मा, रगडु पटेल, मेखलाल चंद्रवंशी , रामा चंद्रवंशी , बलराम वर्मा, कुलदीप पहाडे आदि ने संबोधित किया।
जनादेश न्यूज़ नेटवर्क

छिंदवाड़ा लोकसभा चुनाव में किसान एजेण्डा
पांच मार्च को किसान महापंचायत भूलामोहगांव, तहसील जिला छिंदवाड़ा में पारित किसान एजेण्डा –
1.किसानों की उपज का समर्थन मूल्य इतना तय किया जाए कि सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान बढ़कर 45 फीसद हो जाए। समस्त नागरिकों को जल पर सामुदायिक संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित करने वाले अधिनियम का शीध्र प्रावधान किया जाए।

2. यह सुनिश्चित किया जाए कि किसानों की न्यूनतम आमदनी छठे वेतन आयोग में निर्धारित तृतीय श्रेणी कर्मचारियों के बराबर हो जाए। किसानों को कुशल कारीगर का दर्जा दिया जाए। प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन में महिलायें अग्रणी भूमिका निभाती रही है, परन्तु उनको वो मान्यता नहीं मिल सकी है जिसकी वो हकदार हैं। अतः प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन और उपयोग में प्रथम हकदारी की मान्यता प्रदान की जाए।

3. अधिक लागत और कम मूल्य की चक्की में पिसते किसानों को राहत देने के वास्ते खेती किसानी की समस्त लागत शासन द्वारा लगाईं जाए और किसानों को संगठित वर्ग के समतुल्य श्रम मूल्य दिया जाए।

4. खेती किसानी में लगत को घटाने के लिए रसायन मुक्त जैविक ध्प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाए और एग्री बिजनेस को बढ़ावा देने की नीति का परित्याग किया जाए। कृषि क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रवेश पर रोक लगाईं जाए।

5. कृषि योग्य भूमि के अधिग्रहण पर फ़ौरन रोक लगाईं जाए। बहुत जरुरी होने पर ग्राम सभा की सहमति के बाद ही ग्राम सभा कि तरफ से तय की गई दर पर ही अधिग्रहण किया जाए। कृषि आपदा कोष का गठन किया जाए।

6. किसानों के सभी प्रकार के कर्ज माफ़ किए जाए। नए कर्जे बिना ब्याज के दिए जाएं, ताकि कर्ज मुक्त और किसानों की आत्महत्या से मुक्त भारत का निर्माण हो सके।

7. गांव को मुख्य प्रशासनिक इकाई बनाया जाए और पंचायती व्यवस्था में ग्राम सभा को विधायिका का अधिकार हो।

8. हर गांव में स्वालंबी और टिकाऊ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लागू किया जाए।

9. समुद्र, नदियों और ताल तालाबों के पानी के निजीकरण पर फ़ौरन रोक लगे।

10. जल संचय और जल वितरण की नई योजना लागू हो ताकि सभी को सिंचाई और पीने का पर्याप्त पानी मिले।

11. प्राकृतिक ससाधनों के इस्तेमाल के लिए राष्ट्रीय स्तर का कानून बनाया जाए और खनिजों के निजीकरण को फ़ौरन रोका जाए। नदियों की भूमि पर किसी भी प्रकार का रेत, पत्थर का उत्खनन करने पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया जाए।

12. समस्त नागरिकों को शुद्ध पेयजल सुनिश्चित कराने के लिये भारतीय संविधान की धारा 21 की भावना के मुताबिक ‘पेयजल सुरक्षा अधिनियम’ बनाया जायेगा। इस अधिनियम में महिलाओं की पानी पर प्रथम हकदारी सुनिश्चित किया जाए।

13. मछुवारों और आदिवासियों को किसान की श्रेणी में रखा जाए। आदिवासी किसान को किसानों से अलग देखने का नजरिया बंद होना चाहfए और उन्हें भी किसान माना जाना चाहिए।

14. ग्राम पंचायत में समन्वयित जल प्रबंधन में लोगो की भागीदारी और स्थानीय समस्याओं और आवश्यकता पर केन्द्रित समुदाय आधारित दीर्घ कालीन विस्तृत जल सुरक्षा कार्ययोजना बनाया जाए।

15. किसानी के संकट के मूल बैंककारी विनियम अधिनियम की धारा 21 (क) को निरस्त किया जाए। आजादी के बाद से अबतक विस्थापित किसानों पर श्वेत पत्र जारी किया जाए।

16. प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन में महिलायें अग्रणी भूमिका निभाती रही हैं, परन्तु उनको वो मान्यता नहीं मिल सकी है जिसके वो हकदार है। अतः प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन और उपयोग में प्रथम हकदारी की मान्यता प्रदान की जाए।

17. जल संरचनाओं को अतिक्रमणए प्रदूषण एवं शोषण से मुक्त कराने के लिए उनका सीमांकन एवं चिन्हीकरण कराकर उसकी रोकथाम करने का प्रावधान किया जाये।

18. नदियों, तालाबों, एवं अन्य पारंपरिक जल स्रोंतो के संरक्षण के लिए कड़े प्रावधान किए जाएं तथा उसमें महिलाओं के अनुभवों का उपयोग करते हुए उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जाये।

19. नदियों, तालाबों अन्य पारंपरिक जल स्रोंतो में गन्दे नाले, औद्योगिक कचरे व बेकार जल को नहीं मिलाए जाने का सख्त प्रावधान किया जाए।

20. वर्षा जल और गन्दा जल को अलग.अलग संग्रहित व संधारित करने का प्रावधान किए जाएं।

21. मछुवारों और आदिवासियों को किसान की श्रेणी में रखा जाए। आदिवासी किसान को किसानों से अलग देखने का नजरिया बंद होना चाहए और उन्हें भी किसान माना जाना चाहिए।

22. कृषि क्षेत्र का प्रबंधन बाजार केंद्रित करने की बजाय किसान कल्याण केंद्रित किया जाए।

23. किसानों को न्यूनतम आय की गारंटी दी जाए।

24. बीज पर विदेशी घुसपैठ बंद की जाए।

25. बीटी बीजों के प्रयोग और इस्तेमाल पर फ़ौरन रोक लगे।

26. मछुवारों और आदिवासियों को किसान की श्रेणी में रखा जाए। आदिवासी किसान को किसानों से अलग देखने का नजरिया बंद होना चाहिए और उन्हें भी किसान माना जाना चाहिए। किसानों को कुशल कारीगर का दर्ज दिया जाए।

27. राजस्व/ कृषि विभाग द्वारा फसल नुकसानी के आकलन के मुल्यांकन का अधिकार ग्राम सभा को दिया जाए। मुआवजा राशि लागत से कम से कम दुगुनी हो। अनावारी खेत स्तर पर निकाली जाए।

28. कृषि को विश्व व्यापर संगठन की परिधि से बाहर रखा जाए। अब तक किए गए सभी समझौते निरस्त किए जाएं। खुला व्यापार समझौता (एफटीए) के तहत विकसित देशों से बड़े पैमाने पर आ रही खाद्द सामग्री एवं कृषि उत्पादों पर रोक लगाई जाए। कृषि सम्बन्धी कोई भी अंतराष्ट्रीय करार बिना संसद तथा विधान सभाओं की मंजूरी के न किया जाय।

29. कृषि के कारपोरेटीकरण पर रोक लगाईं जाए। भूमि सुधार कानून तथा भूमि हदबंदी कानून सख्ती से लागू किया जाए।

30. देश के सभी गन्ना किसानों का बकाया दिलाया जाए।

31. देश भर में किसान आंदोलन से जुड़े मुक़दमे वापस लिए जाए।

32. कृषि बीमा योजना लागू की जाए। सभी किसानों की फसल बीमा का प्रीमियम सरकार दे और फसल के नुकसान पर बीमा कंपनियों से एक माह के भीतर भुगतान सुनश्चित किया जाए। कृषि बीमा योजना भी कटान क्षेत्र के लिए अलग हो।

33. किसानों को पेंशन मिलनी चाहिए। किसानों के बच्चों को शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधा मिलनी चाहिए। इसका बीमा भी होना चाहिए।

34. महिला किसान का भूमि पर अधिकार सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

35. पारम्परिक कौशल से किसान किस तरह बेहतर जीवन जी सकता है इसका ध्यान रखते हुए योजना बने। गाँव का अस्सी फीसद पैसा गाँव में ही निवेश हो।

36. योजना आयोग में किसानों का वाजिब प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो।

37. किसान नीति ग्राम सभा में चर्चा के बाद बनाई जाए।

38. सभी सरकारें पृथक् किसान बजट पेश करे।

39. किसानों को बजट का आवंटन उनकी आबादी के अनुसार हो।

40. कीटनाशक और खाद बीज में मिलावट करने वालों को कानून में दस साल की सजा का प्रवधान हो।

41. पिछले 68 वर्षों में दस करोड़ विस्थापित किसानों का पुनर्वास नए कानून के मुताबिक किया जाए तथा जिन अधिकृत जमीनो पर अबतक परियोजना शुरू नहीं हुई है उन जमीनों को किसानों को वापस दिया जाए

42.  छिंदवाड़ा में पेंच परियोजना का कार्य पुलिस दमन से शुरू किया गया है, जिसे किसान संघर्ष समिति ने गत सात वर्ष से जमीन के बदले जमीन की मांग को लेकर रोका हुआ था। एक जनवरी से लागू हुए नए कानून में ग्रामसभा के प्रस्ताव के बिना अधिग्रहण पर रोक है तथा बहुफसलीय जमीन का अधिग्रहण न किए जाने तथा पांच वर्ष तक अधिग्रहित भूमि पर संबंधित परियोजना का काम शुरू न होने पर जमीन किसानों को वापस देने का प्रावधान है, लेकिन नए कानून के प्रावधानों का पालन नहीं किया जा रहा है। तहसीलदार के निर्देष के बावजूद अब तक छोटे झाड के जंगल पर बनी चार मंजिला अदानी प्रोजेक्ट की इमारत को गिराया नहीं गया है। सार्वजनिक सड़के और कुएं ग्रामीणों के इस्तेमाल के लिए नहीं खोले गए हैं। एसकेएस और मैक्सो प्रोजेक्ट को निरस्त किया जाये। छिंदवाड़ा जिले के 48 गांव बफरजोन में शामिल किए जा रहे हैं, उन्हें मुक्त किया जाये। तोतलाडोह डेम के विस्थापितो को जमीन के बदले जमीन दी जाए तथा डेम का पानी छिंदवाड़ा जिले को उपलब्ध कराने के साथ ही डेम में मछवारों को मछली पकड़ने का अधिकार किया जाए।

43. प्रदेश में गत दिनों ओलावृष्टि के चलते फसनो की बडे पैमाने पर बरबादी हुई है। तत्काल नुकसानी का आकलन करा कर मुआवजा प्रदान किया जाये। खरीफ फसल की नुकसानी का इंतजाम आज तक प्रदेश के किसानों को राज्य सरकार द्वारा नहीं दिया गया। राज्य सरकार ने जो पैकेज केन्द्र सरकार से मांगा वह भी उसे नहीं मिला। इस तरह कांग्रेस और भाजपा की सरकारें किसानों को फुटबाॅल बना कर एक दुसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रही है लेकिन किसानों को मुआवजा नहीं मिला है। चुनाव आयोग किसानों के मुआवजा वितरण की अनुमति प्रदान करे ताकि अगले एक सप्ताह में किसानों को समुचित मुआवजे का भुगतान किया जा सके। मुआवजा राशि कम से कम लागत की कीमत से दो गुना हो।

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