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Palash Biswas पलाश विश्वास पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लॉगर हैं। “अमेरिका से सावधान “उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए अब जनसत्ता कोलकाता में ठिकाना
Palash Biswas पलाश विश्वास पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लॉगर हैं। “अमेरिका से सावधान “उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए अब जनसत्ता कोलकाता में ठिकाना

केंद्र सरकार तो संसद की परवाह करती ही नहीं, किसी मंत्री को भी नहीं करनी

भारत में संसदीय प्रणाली (Parliamentary system in India) का मजा यह है कि राजकाज में और नीतिगत फैसलों में संसद की कोई भूमिका नहीं है। खास खबर फिर वही है कि संसद का मॉनसून सत्र (Monsoon session of parliament) 18 जुलाई से शुरू होगा। नई दिल्ली में कैबिनेट की बैठक में इस बात का फैसला लिया गया। 12 अगस्त तक चलने वाले इस सत्र में सरकार जीएसटी संविधान संशोधन बिल (gst constitutional amendment bill in hindi,) पास कराने की कोशिश करेगी। इसके अलावा 25 और बिल भी मॉनसून सत्र में पेश किए जाएंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जीएसटी बिल को इस मॉनसून सत्र में पारित करने के लिए संसदीय कार्य मंत्री वेकैया नायडू (Parliamentary Affairs Minister Vekaiah Naidu) ने विपक्ष से सहयोग की मांग की है। उनका कहना है कि इसके पारित होने से भारत की अर्थव्यवस्था को सुधारने में मदद मिलेगी।

बताया जा रहा है कि कर्मचारियों की सेलरी में करीब 23.6 फीसद का इजाफा होगा। कर्मचारियों को 1 जनवरी,  2016 से बढ़ी हुई सैलरी का एरियर भी मिलेगा।

पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन ने ट्वीट कर बताया कि केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में 23 फीसद से ज्यादा का इजाफा होगा।

इसके साथ खबर यह भी है कि कर्मचारी भविष्य निधि कोष संगठन (ईपीएफओ) ईटीएफ के जरिये शेयर बाजारों में अपेक्षाकृत अधिक अनुपात में धन निवेश करने के बारे में 7 जुलाई की बैठक में निर्णय कर सकता है। ईटीएफ के जरिये निवेश पर संगठन को मुनाफा होने लगा है। यह बात श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने कही।

रेलवे कर्मचारियों ने हड़ताल की धमकी दी है। उन्होंने 11 जुलाई से हड़ताल में जाने का एलान भी किया है।

वहीं मिनरल एक्सप्लोरेशन पॉलिसी (Mineral Exploration Policy) को कैबिनेट ने हरी झंडी दिखाई है,  इससे माइनिंग कंपनियों को फायदा होगा। इसके अलावा मॉडल शॉप एंड इस्टैब्लिशमेंट एक्ट (Model Shop and Establishment Act) को भी मंजूरी दी गई है। मॉडल शॉप एंड इस्टैब्लिशमेंट एक्ट लागू होने से शॉपिंग मॉल्य और रेस्टोरेंट 24 घंटे खुले रहेंगे। मॉडल शॉप एंड इस्टैब्लिशमेंट एक्ट को मंजूरी मिलने से रेस्टोरेंट,  मल्टीप्लेक्स और रिटेल शेयरों में तेजी देखने को मिली। मिनरल एक्सप्लोरेशन पॉलिसी मिलने के बाद माइनिंग शेयरों में खासी तेजी देखने को मिली।

7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी मिलने के बाद डिमांड बढ़ने की उम्मीद में रियल एस्टेट,  ऑटो और सीमेंट कंपनियों के शेयरों में खासी तेजी देखने को मिली।

नई दिल्ली में केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सातवां वेतन आयोग की रिपोर्ट लागू करने के कैबिनेट के फैसले के बारे में मीडिया को जानकारी दी।

मीडिया के मुताबिक जेटली की कही बातों के मुख्य अंश –

3 बड़े हाइवे प्रोजेक्‍टस को कैबिनेट की मंजूरी।

पंजाब,  ओडिशा और महाराष्‍ट्र में हाइवे का प्रस्‍ताव।

महिलाओं के लिए रोजगार का अवसर बढ़ाने की कोशिश।

महिलाओं को देर तक काम करने की इजाजत का प्रस्‍ताव।

5वां पे कमिशन आया था तो सरकार को उस पर निर्णय लेने के लिए 19 महीने लगे,  जबकि 6वें में 36 महीने लगे थे।

पे और पेंशन के संबंध में कमीशन की सिफारिशों को सरकार ने स्‍वीकार किया है। 1 जनवरी 2016 से लागू होंगी।

47 लाख सरकारी कर्मचारी और 56 लाख पेंशनर्स पर प्रभाव पड़ेगा।

निजी सेक्‍टर से सरकारी सेक्‍टर की सैलरी की तुलना की गई। निजी सेक्‍टर से तुलना के आधार पर सिफारिश की गई।

कमेटी की सिफारिशें आने तक मौजूदा भत्‍ते जारी रहेंगे।

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को अधिकतर स्वीकार किया गया है।

ग्रुप इंश्‍योरेंस के लिए सैलरी से कटौती की सिफारिश नहीं मानी।

इस साल एरियर का 12 हजार करोड़ का अतिरिक्‍त बोझ पड़ेगा।

क्लास वन की सैलरी की शुरुआत 56100 रुपये होगी।

वेतन आयोग रिपोर्ट में जो भी कमी है उसे एक समिति देखेगी।

ग्रैच्युटी को 10 लाख बढ़ाकर 20 लाख किया गया।

एक्स ग्रेशिया लंपसम भी 10-20 लाख से बढ़ाकर 25-45 लाख रुपये किया गया।

वेतन आयोग द्वारा सुझाए गए भत्तों पर वित्त सचिव अध्ययन करेंगे और फिर इस अंतिम निर्णय होगा।

कुछ कर्मचारी संगठनों के विरोध के प्रश्न पर जेटली ने कहा कि विरोध का कोई औचित्य नहीं है।

इससे पहले जेटली ने ट्वीट कर कहा था कि सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशनभोगियों के पेंशन में ऐतिहासिक वृद्धि करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी (Approval of the recommendations of the seventh pay commission) दे दी।

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद जेटली ने एक ट्वीट में कहा,

“सातवें केंद्रीय वेतन आयोग द्वारा केंद्र सरकार के अधिकारियों,  कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को उनके वेतन और भत्तों में ऐतिहासिक वृद्धि पर बधाई।”

Now Union ministers will be able to approve projects up to 500 crores

वेतन आयोग की सिफारिशों को मिली मंजूरी का लाभ केंद्र सरकार के करीब 47 लाख कर्मचारियों और 52 लाख पेंशनभोगियों को मिलेगा।

वित्त मंत्रालय के अनुसार मंत्रियों को गैर-योजनागत परियोजनाओं को मंजूरी देने के संबंध में प्रशासनिक मंत्रालयों के प्रभारी मंत्री के लिए सीमा बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये तक दी है। अब केंद्रीय मंत्री 500 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को मंजूरी दे सकेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक यह सीमा 150 करोड़ रुपये थी। मंत्रालय का कहना है कि 500 करोड़ रुपये से 1, 000 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को मंजूरी देने की शक्ति वित्त मंत्री के पास होगी। वहीं 1000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी के लिए कैबिनेट या कैबिनेट की आर्थिक मामलों संबंधी समिति के पास जाना पड़ेगा।

सरकार ने यह फैसला सरकार के अलग-अलग स्तरों पर परियोजनाओं को मंजूरी देने के संबंध में प्रक्रिया में बदलाव कर लिया है। मंत्रालय का कहना है कि केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों के सभी प्रकार के गैर-योजनागत व्यय के संबंध में मंजूरी देने का काम करने वाली समिति अब 300 करोड़ रुपये तक के व्यय के प्रस्तावों को मंजूरी दे सकेगी। अब तक इस समिति को 75 करोड़ रुपये तक के प्रस्ताव को मंजूरी देने का अधिकार था।

वहीं संबंधित मंत्रालय की स्थाई वित्त समिति अब 300 करोड़ रुपये तक की गैर-योजनागत परियोजनाओं के प्रस्तावों पर विचार करेगी। सरकार ने परियोजनाओं की बढ़ी लागत के संबंध में भी सचिवों और फाइनेंशियल एडवाइजर्स के अधिकार बढ़ाए हैं।

[button-green url=”#” target=”_self” position=”left”]त्वरित टिप्पणी- हर मंत्री 500 करोड़ तक की परियोजना बेखटके मंजूर करें तो अबाध पूंजी की गंगा बहने लगेगी सर्वत्र![/button-green]

भाड़ में जाये आम जनता, वोटों के अलावा उनके जीने मरने का क्या और पढ़े लिखे जो हैं, उन्हें उनकी खास परवाह करने की कोई जरूरत भी नहीं हैं क्योंकि सरकार ने वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी दे दी है। ब्रेक्सिट से निपटने का आसार तरीका बाजार में मांग बनाये रखने के लिए नकदी की सप्लाई जारी रहे। कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोत्तरी से बाजार में भारी जोश इसीलिए हैं और शेयर बाजर बल्ले बल्ले है। मुनाफावसूली मस्तकलंदर खेल है।

बहरहाल आम नागरिकों के हक हकूक और उनके संवैधानिक, नागरिक और मानवाधिकारों के मामले में कहीं भी संसदीय हस्तक्षेप नहीं है।

आर्थिक सुधार हों या विदेशी पूंजी निवेश या विदेशी मामलों में राष्ट्रहित या सीधे तौर पर देश के प्राकृतिक संसाधनों का मामला, हमारे जनप्रतिनिधि हाथ पांव कटे परमेश्वर हैं और अब शत प्रतिशत निजीकरण और शत प्रतिशत विनिवेश के कायाकल्प के दौर में सनातन भारत के आधुनिक यूनान बनने की पागल दौड़ में भारतीय संसद की बची खुची भूमिका भी खत्म है।

केंद्र सरकार तो संसद की परवाह करती ही नहीं है, किसी मंत्री को भी किसी की परवाह नहीं करनी है।

अंधाधुंध विकास के बहाने अबाध पूंजी के लिए सारे दरवाजे और खिड़कियां खोल दिये गये हैं। परियोजनाओं की मंजूरी में तेजी लाने के लिये सरकार ने विभागों और मंत्रालयों के वित्तीय अधिकार बढ़ा दिये हैं। केंद्र सरकार के मंत्री अब 500 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को मंजूरी दे सकेंगे। अब तक उन्हें केवल 150 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं और कार्यक्रमों को मंजूरी देने की शक्ति प्राप्त थी।

निरंकुश सत्ता ने अभिनव आर्थिक सुधार के तहत सत्ता का अभूतपूर्व विकेंद्रीकरण कर दिया है और इसके तहत अत्यधिक केंद्रीयकरण के आरोप का सामना करने वाली केंद्र सरकार ने अपने मंत्रालयों को चार गुना अधिक वित्तीय अधिकार प्रदान कर दी है।

मतलब यह कि जनता के अच्छे दिन जब आयेंगे, तब आयेंगे, मंत्रालयों और मंत्रियों के दिन सुनहरे हैं और राजकाजऔर राजधर्म की स्वच्छता पर मंतव्य राष्ट्रद्रोह भी हो सकता है, इसलिए यह कहना जोखिम भरा है।

बहरहाल अब हर मंत्री चाहे तो देश में कहीं भी नियमागिरि या बस्तर या दंडकारण्य में कहीं भी आदिवासियों के सीने पर या अन्यत्र कहीं भी समुद्र तट, अभयारण्य या उत्तुंग हिमाद्रिशिखर पर स्थानीय जनगण या स्थानीय निकायों की कोई सुनवाई किये बिना, पर्यावरण हरी झंडी के बिना, किसी संस्थागत मंजूरी के बिना, संसदीय अनुमति के बिना अबाध पूंजी की निरमल गंगा बहा सकते हैं और उस गंगा में हाथ धोने की आजादी भी होगी।

गौरतलब है कि उदारीकरण के ईश्वर की विदाई के लिए वैश्विक व्यवस्था का महाभियोग नीतिगत विकलांगकता का रहा है जिसकी वजह से अरबों अरबों डालर की परियोजनाएं लटकी हुई थीं।

जाहिर है कि अब लंबित और विवादित परियोजनाओं को चालू करने के लिए कहीं किसी अवरोध को खत्म करने के लिए सरकार या संसद के हस्तक्षेप की जरुरत भी नहीं होगी।

कोई भी केंद्रीय मंत्री अपने स्तर पर पांच सौ करोड़ की परियोजना मंजूर करने की स्थिति में दिशा दिशा में विकास के जो अश्वमेधी घोड़े कारपोरेट लाबिंग और हितों के मुताबिक दौड़ा सकेंगे, उसपर संसद या भारतीय जनगण का कोई अंकुश नहीं होगा, मंत्री के हाथ मजबूत करने का मतलब यही है।

पलाश विश्वास

About Palash Biswas

पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लॉगर हैं। “अमेरिका से सावधान “उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए "जनसत्ता" कोलकाता से अवकाशप्राप्त। पलाश जी हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

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