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केजरीवाल का समर्थन मोदी का ही समर्थन है

मध्‍यवर्ग के स्‍वार्थ की राजनीति का नया नायक केजरीवाल है।

डॉ. प्रेम सिंह 

यह दुर्भाग्‍यपूर्ण है कि नागरिक समाज के कुछ लोग और संगठन बनारस में ‘आप’ सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल का समर्थन धर्मनिरपेक्षता के नाम पर कर रहे हैं। इधर ‘मोदी विरोधी’ राजनीतिक पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने भी केजरीवाल के समर्थन की घोषणा की है। यह बिल्‍कुल साफ है कि केजरीवाल को दिया जाने वाला समर्थन वास्‍तविकता में नरेंद्र मोदी का समर्थन है।

केजरीवाल के समर्थन से वाराणसी में मोदी को चुनाव में सीधा फायदा तो होगा ही, नवउदारवादी और सांप्रदायिक शक्तियों के गठजोड् को भी नई ताकत मिलेगी।

पूंजीवाद ने कांग्रेस का भरपूर इस्‍तेमाल करने के बाद आगे देश के संसाधनों की लूट के लिए नरेंद्र मोदी को अपना मोहरा बनाया है।

मोदी के साथ और मोदी के बाद के लिए कारपोरेट घराने केजरीवाल को आगे बढा रहे हैं, ताकि देश में कारपोरेट विरोध की राजनीति हमेशा के लिए खत्‍म की जा सके।

जिस तरह कांग्रेस और भाजपा एक सिक्‍के के दो पहलू हैं, वही सच्‍चाई मोदी और केजरीवाल की भी है। दोनों कारपोरेट पूंजीवाद के सच्‍चे सेवक हैं। आरएसएस की विचारधारा का पूंजीवाद से कभी विरोध नहीं रहा है।

एनजीओ सरगना अरविंद केजरीवाल सीधे कारपोरेट की कोख से पैदा हुए हैं। वे विदेशी धन लेकर एनजीओ की मार्फत लंबे समय से ‘समाज सेवा’ का काम कर रहे हैं। लेकिन उन्‍होंने 1984 के सिख विरोधी दंगों, 1992 में बाबरी मस्जिद ध्‍वंस, 2002 में गुजरात में होने वाले मुसलमानों के राज्‍य प्रायोजित नरसंहार, हाल में मुजफफर नगर में हुए दंगों जैसे सांप्रदायिक क़त्‍यों का विरोध तो छोडिए, उनकी निंदा तक नहीं की है। गुजरात के ‘विकास की सच्‍चाई’, जिसे बता कर वे मोदी के विरोध का ढोंग करते हैं, कितने ही विद्वान और आंदोलनकारी काफी पहले वह बता चुके हैं।

केजरीवाल के द्वारा इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शन बना कर चलाए गए भ्रष्‍टाचार विरोधी आंदोलन में आरएसएस पूरी तरह शामिल था। उनके गुरू अण्‍णा हजारे ने सबसे पहले नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की थी। रामदेव और रविशंकर जैसे ‘संत’ केजरीवाल के हमजोली थे। आज भी ‘आप’ पार्टी में आरएसएस समेत सांप्रदायिक तत्‍वों की भरमार है।

वाराणसी में न केजरीवाल का पता न मोदी का पता 

बनारस में धर्म और राजनीति का जैसा घालमेल नरेंद्र मोदी कर रहे हैं, वैसा ही केजरीवाल कर रहे हैं। इस सबके बावजूद कुछ धर्मनिरपेक्षतावादी उन्‍हें अपना नेता मान रहे हैं तो इसलिए कि कांग्रेस के जाने पर उन्‍हें एक नया नेता चाहिए जो उनके वर्गस्‍वार्थ का कांग्रेस की तरह पोषण करे। राजनीति की तीसरी शक्ति कहे जाने वाली पार्टियों और नेताओं को यह भद्रलोक पसंद नहीं करता। इनमें से कुछ कम्‍युनिस्‍ट पार्टी का शासन तो चाहते हैं, लेकिन उसकी संभावना उन्‍हें नजर नहीं आती। साम्‍यवादी क्रांति के लिए संघर्ष भी ये नहीं करना चाहते, या पहले की तरह संस्‍थानों पर कब्‍जा करके करना चाहते हैं। लिहाजा, मध्‍यवर्ग के स्‍वार्थ की राजनीति का नया नायक केजरीवाल है।

डॉ. प्रेम सिंह भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला के पूर्व फेलो, दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी के शिक्षक और सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के महासचिव हैं।

( May 2,2014 08:06 को प्रकाशित )

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About डॉ. प्रेम सिंह

डॉ. प्रेम सिंह, Dr. Prem Singh Dept. of Hindi University of Delhi Delhi - 110007 (INDIA) Former Fellow Indian Institute of Advanced Study, Shimla India Former Visiting Professor Center of Oriental Studies Vilnius University Lithuania Former Visiting Professor Center of Eastern Languages and Cultures Dept. of Indology Sofia University Sofia Bulgaria

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