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कॉरपोरेट के उम्मीदवार है नरेंद्र मोदी- करात

मोदी को कॉर्पोरेट मीडिया चढ़ा रहा है उसकी लड़ाकू छवि पेश की जा रही है जबकि वह एक नंबर का कायर है उसमें लड़ने की हिम्मत नहीं है-तीस्ता
बनारस में लेखकों, बुद्धिजीवियों, प्रगतिशील एवं जनवादी संगठनों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं का सम्मेलन
प्रदीप शर्मा
वाराणसी। नरेंद्र मोदी को कॉरपोरेट एवं सांप्रदायिक ताकतों का ‘‘साझा उम्मीदवार’’ करार देते हुए माकपा महासचिव प्रकाश करात ने कहा है कि सभी गैर-कांग्रेसी दलों को भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के खिलाफ एक ऐसा उम्मीदवार उतारना चाहिए था जिस पर आम सहमति हो।
करात बनारस में लेखकों, बुद्धिजीवियों, प्रगतिशील एवं जनवादी संगठनों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस सम्मेलन में बनारस की जमीन पर तरक्कीपसंद, जनवादी, वामपंथी सोच के तमाम चिन्तक, साहित्यकार, नाटककार और दूसरे क्षेत्रों के जाने-माने नाम इकठ्ठा हुए वो इस बात पर चर्चा करने और फैसला लेने के लिए आये थे कि इन चुनावों मे चिंतकों, साहित्यकारों, लेखकों की भूमिका क्या होगी.. वे बनारस, उसकी संस्कृति, उसकी गंगा-जामुनी रवायत को बचाने के लिए सामने आयेंगे या अवाम को मूंडने पर आमादा बाजार के विज्ञापनी महाअभियान के मूक दर्शक बने रहेंगे.. जिन पर अवाम को राह दिखाने की जिम्मेदारी है वे प्रतिरोध की, नीतिगत विकल्प की राह दिखाएँगे या व्यावहारिकता(मौके और सहूलियत) के तकाजे से इस या उस बाजारू इंद्रजाल के तालीपीटू सहयोगी-दर्शक की भूमिका अख्तियार करेंगे..
करात ने कहा, ‘‘कुछ महीने पहले कई लोगों ने मुझसे कहा कि मोदी के खिलाफ एक साझा उम्मीदवार होना चाहिए। इस पर मैंने कहा कि यदि सभी गैर-कांग्रेसी दल भाजपा नेता से मुकाबले के लिए एक साझा उम्मीदवार उतारने के लिए एक साथ आ सकते हैं तो हम अपना उम्मीदवार वापस ले सकते हैं।’’ माकपा नेता ने कहा, ‘‘बहरहाल, राजनीतिक दल किसी आम राय पर नहीं पहुंच सके।’’ उन्होंने कहा कि वाम मोर्चा का ही कोई उम्मीदवार पूंजीवादी एवं सांप्रदायिक ताकतों से लड़ सकता है। वाराणसी लोकसभा सीट पर माकपा ने मोदी के खिलाफ हीरा लाल यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है।
इस सीट पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, कांग्रेस की तरफ से अजय राय सहित कई अन्य नेता अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
मोदी को पूंजीवादी एवं सांप्रदायिक ताकतों का उम्मीदवार बताते हुए करात ने दावा किया कि भारत में पहली दफा कॉरपोरेट जगत एक खास शख्स का समर्थन कर रहा है। करात ने कहा कि अब तक कांग्रेस सरकार कॉरपोरेट जगत के हित के लिए काम कर रही थी, पर आर्थिक मंदी के बाद कॉरपोरेट जगत ने अब मोदी का पक्ष ले लिया है।
साल 1991 के लोकसभा चुनावों का जिक्र करते हुए करात ने कहा कि वाम मोर्चा ने उस वक्त राज किशोर को उतारा था और मतदान से ठीक पहले दंगे हुए थे। उस साल भाजपा पहली दफा वाराणसी सीट पर जीती थी। उसके बाद के पांच चुनावों में भाजपा वाराणसी सीट अपने पास रखने में कामयाब रही है। करात ने आरोप लगाया कि मोदी को वाराणसी सीट से अपना उम्मीदवार बनाने के बाद से भाजपा अपने सांप्रदायिक एजेंडे को लेकर काफी सक्रिय है। माकपा नेता ने कहा कि ‘‘भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सोची-समझी चाल’’ के तहत मोदी को वाराणसी सीट से उतारा गया है ताकि उनका सांप्रदायिक एजेंडा आगे बढ़े और मतदाता धार्मिक आधार पर बंट जाएं। करात ने कहा, ‘‘मोदी को वाराणसी से उतारकर और उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर साफ-साफ एक संदेश दिया गया है।’’ माकपा नेता ने कहा कि यह भारत के भविष्य का सवाल है। उन्होंने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर मोदी के जरिए अपने सांप्रदायिक एजेंडे को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया।
खचखचा भरे हॉल में बोलते हुए प्रमुख अर्थशास्त्री प्रोफेसर प्रभात पटनायक ने कहा कि फासीवाद से केवल और केवल कम्युनिस्ट ही लड़ सकते हैं। इसलिए इस समय वामपंथ को मजबूत करना ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी है उन्होंने कहा की गुजरात का विकास मॉडल केवल कॉर्पोरेट्स के विकास का मॉडल है विकास दर जो गुजरात की है वही केरल की भी है पर वहां हमने कभी कॉर्पोरेट्स को छूट प्रदान नहीं की और न ही कभी किसानों की ज़मीन को औने पोन दाम पर दी, केरल का विकास सबके लिए है केवल कॉर्पोरेट्स का विकास नहीं।
प्रमुख सामाजिक कार्यकर्त्ता तीस्ता सीतलवाड ने गुजरात सरकार के प्रशासनिक तंत्र के घोर साम्प्रदायिक चरित्र को बेनकाब किया। उन्होंने आगे कहा कि वहां जिस भी अधिकारी ने सच बोलने की कोशिश की उसको फ़र्ज़ी मुक़दमे में फंसाया गया या क़त्ल कर दिया गया। उन्होंने कहा कि मोदी को कॉर्पोरेट मीडिया चढ़ा रहा है उसकी लड़ाकू छवि पेश की जा रही है जबकि वह एक नंबर का कायर है उसमे लड़ने की हिम्मत नहीं है।
जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष दूधनाथ सिंह ने कहा कि बनारस की जनता बनारस के मिथकीकरण के दुरूपयोग की कोशिश के भाजपा-मोदी के प्रयास को नकारेगी।
बनारस से वामपंथ के उम्मीदवार कामरेड हीरालाल यादव ने कहा कि भूमि के सवाल पर संघर्ष माकपा के नेतृत्व में वामपंथ ने ही किया है। भूमि अधिकरण की लड़ाई भी केवल लाल झंडे ने लड़ी है, बुनकर के सवालों पर हमेशा माकपा ने आवाज़ उठाई है बाढ़ रहत में हम ही थे। हम यकीन  भी दिलाना चाहते हैं कि बनारस इस दुनिया का सबसे पुराना जिन्दा शहर यूँ ही नही है.. इसे कोई कॉरपोरेट थैलीशाहों के पैसे, मीडिया के दुष्प्रचार की चमक-दमक और झूठ के तिलिस्म से लूट सकता तो ये शहर बनारस नही रहता, काशी नही रहता..बना रहे बनारस…..!
कन्वेंशन को इसके अतिरिक्त आई. पी एफ़  के संयोजक कामरेड अखिलेन्द्र प्रताप सिंह, माकपा के राज्य सचिव कामरेड एस पी कश्यप, प्रगतिशील लेखक संघ के राज्य सचिव संजयश्रीवास्तव सहित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी,  फॉरवर्ड ब्लॉक आदि के नेताओं ने भी संबोधित किया।

About the author

Dr. Pradeep Sharma, Assistant Professor Deptt.of Sociology /coordinator jounalism n MassCommunication Shia P.G.College , Lucknow

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